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कच्चा तेल महंगा होने से ओएमसी को बड़ा घाटा, रोजाना ₹530 करोड़ का नुकसान


सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी IOC, BPCL और HPCL पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर दिखाई दे रहा है। घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं होने के कारण कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने 23 सितंबर 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। यदि यह स्थिति बनी रहती है और घरेलू ईंधन की कीमतों में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं होती, तो OMCs की लाभप्रदता पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है। 

ICRA के आकलन के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा घरेलू LPG सिलेंडर की बिक्री पर भी कंपनियों को अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर में घरेलू LPG पर प्रति सिलेंडर नुकसान लगभग ₹300 रहने का अनुमान है। ICRA के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह नुकसान लगभग ₹500 प्रति सिलेंडर था, यानी सितंबर तक इसमें कुछ कमी आई है, लेकिन कंपनियों पर दबाव अभी भी बना हुआ है। 

इन सभी कारकों को मिलाकर ICRA ने अनुमान लगाया है कि मौजूदा स्तर पर सरकारी OMCs को लगभग ₹530 करोड़ प्रतिदिन का नुकसान हो सकता है। यह अनुमान पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG से जुड़ी मौजूदा अंडर-रिकवरी को ध्यान में रखकर लगाया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और घरेलू ईंधन की कीमतें उसी अनुपात में नहीं बढ़तीं, तो कंपनियों के लिए लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर लगातार बढ़ सकता है। 

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का घरेलू तेल कंपनियों की लागत पर सीधा असर पड़ता है। Petroleum Planning & Analysis Cell (PPAC) भारतीय क्रूड बास्केट की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का आधिकारिक डेटा जारी करता है। 21 सितंबर 2026 को PPAC के अनुसार दिल्ली में IOC के आउटलेट पर पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर थी। 

मौजूदा संकट की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और तेल की आपूर्ति से जुड़े जोखिम हैं। ICRA के अनुसार संघर्ष बढ़ने तथा प्रमुख सप्लाई रूट प्रभावित होने की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है। साथ ही रिफाइनिंग क्षेत्र में व्यवधान और इन्वेंट्री में बदलाव ने भी तेल बाजार पर असर डाला है। 

इस स्थिति का असर केवल OMCs तक सीमित नहीं रह सकता। लंबे समय तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहने पर कंपनियों की कमाई और नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, घरेलू पेट्रोल-डीजल और LPG कीमतों में बदलाव होने पर इसका प्रभाव उपभोक्ताओं तथा परिवहन लागत पर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया की स्थिति और घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण OMCs की वित्तीय स्थिति के लिए महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।



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