कमजोर व अनियमित मानसून के बीच बढ़ती महंगाई के दबाव और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च के बीच जरूरत पूरी करने के लिए परिवार घर में रखे सोने का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ लोग पुराने गहने बेच रहे हैं तो कुछ उन्हें गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले रहे हैं।
नए जेवर खरीदने के लिए पुराने सोने को एक्सचेंज कराने का चलन भी बढ़ा है। ऐसे में सोना अब सिर्फ निवेश और आभूषण का जरिया नहीं, बल्कि मुश्किल समय में नकदी जुटाने का अहम साधन बनता जा रहा है।
नई ज्वेलरी के लिए खप रहा पुराना सोना
सोने की बढ़ती कीमतों के बावजूद पूरा पुराना सोना स्क्रैप के रूप में बाजार में नहीं आ रहा है। नई ज्वेलरी खरीदने के लिए पुराने गहनों को एक्सचेंज कराने का चलन बढ़ा है। ग्राहक पुराने आभूषण देकर नई खरीद कर रहे हैं।
103 टन गोल्ड स्क्रैप सप्लाई का अनुमान
कमोडिटी रिसर्च फर्म मेटल फोकस के अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में गोल्ड स्क्रैप सप्लाई करीब 11 फीसदी बढ़कर 103 टन पहुंच सकती है। 2025 में यह करीब 93 टन थी। दो साल की गिरावट के बाद स्क्रैप सप्लाई में यह पहली सालाना बढ़ोतरी होगी। कमजोर मानसून को इसके पीछे अहम वजह माना जा रहा है। मानसून कमजोर रहने पर फसल उत्पादन और ग्रामीण आय प्रभावित हो सकती है। ऐसे में परिवार घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए सोना बेचने का विकल्प चुन सकते हैं।
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5.52 लाख करोड़ पहुंचा बैंकों का गोल्ड लोन…
जुलाई 2026 के अंत में बैंकों का गोल्ड लोन बकाया करीब 5.52 लाख करोड़ रुपये रहा।
सोना बेचने के बजाय कर्ज लेने का विकल्प
गोल्ड लोन की बढ़ती उपलब्धता ने भी सोने की बिक्री को प्रभावित किया है। जरूरत के समय परिवार सोना बेचने के बजाय उसे गिरवी रखकर पैसा जुटा सकते हैं। यही वजह है कि बैंकों और गैर वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के गोल्ड लोन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2024 के अंत में बैंकों और एनबीएफसी का कुल गोल्ड लोन बकाया करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये था।



