त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के हाजिर बाजारों में गेहूं की कीमतों में फिर तेजी लौटने लगी है। मानसून की सुस्त रफ्तार, जलाशयों में घटता जलस्तर और आगामी रबी सीजन की बुआई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच बीते एक महीने में देश की प्रमुख मंडियों में गेहूं के दाम 3.8 फीसदी से लेकर 7.5 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। कम आवक और खुले बाजार में सरकारी बिक्री शुरू होने में हो रही देरी ने कीमतों को और हवा दी है। व्यापारियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सरकार अपने बफर स्टॉक से खुले बाजार में गेहूं की बिक्री शुरू नहीं करती, तब तक गेहूं के साथ-साथ आटा और मैदा भी महंगे हो सकते हैं।
आखिर कमजोर मानसून से गेहूं पर संकट क्यों गहराने लगा है?
इस साल मानसून के दौरान बारिश सामान्य से कम रही है। कोटा के कारोबारी रवि मेहता के मुताबिक, कम बारिश के कारण जलाशयों का जलस्तर घटने की आशंका है। इसका सीधा असर रबी सीजन की सिंचाई पर पड़ सकता है, जिससे गेहूं की बुआई और उत्पादन दोनों प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
सरकारी बिक्री में देरी से बाजार पर क्या असर पड़ रहा है?
नवी मुंबई के थोक व्यापारी देवेंद्र वोरा का कहना है कि सरकार ने गेहूं और चावल के लिए रिजर्व प्राइस तो घोषित कर दिए हैं, लेकिन खुले बाजार में गेहूं की नीलामी अभी तक शुरू नहीं की गई है। उनका अनुमान है कि सरकार त्योहारी सीजन के चरम पर पहुंचने के बाद, यानी करीब एक महीने बाद, बिक्री शुरू कर सकती है। इस देरी के कारण खुले बाजार में आपूर्ति सीमित बनी हुई है, जिससे कीमतों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
एक महीने में प्रमुख मंडियों में गेहूं के दाम कितने बढ़े?
| मंडी | 23 जून (₹/क्विंटल) | 23 जुलाई (₹/क्विंटल) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| इंदौर | 2,578 | 2,770 | +7.45% |
| राजकोट | 2,475 | 2,650 | +7.07% |
| कानपुर | 2,535 | 2,650 | +4.54% |
| दिल्ली | 2,703 | 2,810 | +3.96% |
| कोटा | 2,600 | 2,700 | +3.85% |
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त्योहारी मांग और कम आवक से दाम क्यों चढ़ रहे हैं?
इंदौर के व्यापारी गौरव कोचर के अनुसार, दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले गेहूं की मांग तेजी से बढ़ने लगती है, जबकि मंडियों में नए माल की आवक अपेक्षाकृत कम है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर की वजह से गेहूं की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।



