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कर्मचारियों का सवाल- क्या ISRO रॉकेट नहीं बनाएगा?: 9 संगठनों ने प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा; कांग्रेसी बोली- साराभाई की विरासत खत्म की जा रही


6 मिनट पहले

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ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी आज सामने आई है।

कर्मचारियों ने लेटर में ISRO की मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों को सौंपने की प्रस्तावित योजना पर आधिकारिक जवाब मांगा है।

संगठनों ने भविष्य की भूमिका, मौजूदा कर्मचारियों पर असर और आगे होने वाली भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

यह पत्र 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका की टिप्पणी के बाद लिखा गया है। IN-SPACe निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, मंजूरी देने और उनकी निगरानी का काम करता है।

एक कार्यक्रम में गोयनका ने कथित तौर पर कहा था, “आखिरकार, ISRO कोई लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या PSU करेगा।”

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कर्मचारी संगठन बोला- ISRO को सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट तक सीमित न किया जाए

कर्मचारी संगठनों ने कहा कि तय व्यावसायिक कामों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत और सरकारी स्वामित्व वाला संगठन बना रहना चाहिए।

लेकिन बिना चर्चा के ऐसी नीति स्वीकार नहीं की जा सकती, जिसमें ISRO को केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) संस्था तक सीमित कर दिया जाए।

और देश के लॉन्च व्हीकल बनाने तथा लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने का काम सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर चला जाए।

कांग्रेस बोली- मोदी सरकार जानबूझकर ISRO की भूमिका सीमित कर रही

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा- स्पेस इकोनॉमी में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के नाम पर मोदी सरकार जानबूझकर ISRO की भूमिका सीमित कर रही है।

इससे भी बदतर यह है कि ISRO ने दशकों की मेहनत से जो क्षमताएं विकसित की हैं, उन्हें ऐसी निजी कंपनियों को हस्तांतरित किया जा रहा है, जिनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता संदिग्ध है।

ISRO समुदाय के भीतर से आवाजें अब उठ रही हैं। यह साहसपूर्ण और सराहनीय है। GSLV के हालिया शानदार सफल प्रक्षेपण ने निश्चित रूप से उनका हौसला बढ़ाया है। वहीं, यह सफलता भारत और विदेशों में ISRO के संशयवादियों और आलोचकों के लिए निराशाजनक रही होगी।

ISRO के एक पूर्व अध्यक्ष ने अपनी चिंताएं जाहिर करने का साहस दिखाया है। उनके जैसे अन्य लोगों को भी अपने विचारों के लिए आवाज उठाने का साहस दिखाना चाहिए और चुप नहीं रहना चाहिए, जबकि शानदार साराभाई-धवन विरासत को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है।

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