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Bharatpur Keoladeo National Park: भरतपुर के केवलादेव पार्क में स्थित प्राचीन केवलादेव मंदिर आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम माना जाता है. मान्यता है कि यहां एक गाय की चमत्कारी लीला देखने के बाद महाराजा सूरजमल इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया. तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है. यहां आने वाले श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ प्रकृति और इतिहास का अनूठा अनुभव भी प्राप्त करते हैं.
भरतपुर: भरतपुर का विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान न सिर्फ पक्षियों के लिए जाना जाता है. बल्कि अपनी ऐतिहास के कारण भी विशेष पहचान रखता है. इसी पार्क के भीतर एक अनोखा और प्राचीन मंदिर स्थित है. जिसका इतिहास करीब 270 से 300 वर्ष पुराना बताया जाता है. यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि भरतपुर के इतिहास और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है.
इतिहासकार अरविन्द पाल सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस मंदिर का निर्माण भरतपुर के महाराजा सूरजमल के समय में करवाया गया था. उस दौर में केवलादेव का पूरा क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था और यह स्थान राजाओं के शिकारगाह के रूप में जाना जाता था. महाराजा सूरजमल जब भी शिकार के लिए इस क्षेत्र में आते थे, तो यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और रहस्यमयी वातावरण से प्रभावित होते थे.
मंदिर निर्माण का निर्णय लिया
इसी दौरान एक दिन महाराजा सूरजमल ने एक अद्भुत और चमत्कारी दृश्य देखा जिसने इस स्थान को धार्मिक आस्था का केंद्र बना दिया बताया जाता है कि उन्होंने देखा कि एक गाय स्वयं ही एक स्थान पर खड़ी होकर अपने आप दूध की धारा अर्पित कर रही थी. यह दृश्य अत्यंत आश्चर्यजनक था और उस स्थान पर एक शिवलिंग की उपस्थिति पाई गई इस चमत्कारी घटना से प्रभावित होकर महाराजा सूरजमल ने वहीं पर मंदिर निर्माण का निर्णय लिया.
केवलादेव का यह मंदिर भरतपुर की आस्था का केंद्र
इतिहास की जानकारी रखने वाले अरविंद पाल सिंह ने बताया कि केवलादेव का यह मंदिर भरतपुर की आस्था का प्रमुख केंद्र है. उन्होंने कहा कि जब भरतपुर नगर की स्थापना की जा रही थी उसी समय इस मंदिर का निर्माण भी करवाया गया था. उस समय यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था और शिकारगाह के रूप में उपयोग में आता था. ऐसे वातावरण में इस तरह की चमत्कारी घटना का होना अपने आप में अद्वितीय था. जिसने इस स्थान को विशेष धार्मिक महत्व प्रदान किया.
श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना
आज भी यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है. खासकर महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय लोग इस मंदिर को अत्यंत पवित्र मानते हैं और यहां आकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही आस्था के साथ निभाई जा रही है. इतना ही नहीं, यह मंदिर आज भी खास पहचान बनाए हुए है.
प्राचीन मंदिर न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर
जहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ कई बड़े जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं. कुछ समय पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी यहां आए थे और उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की थी. इस प्रकार केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर है. बल्कि आस्था विश्वास और चमत्कार का प्रतीक भी बना हुआ है.
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