नई दिल्ली58 मिनट पहले
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दवाओं की कीमत तय करने वाली नेशनल फॉर्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं पर मुनाफा 30 फीसदी तय कर दिया है। यह फैसला 9 नवंबर से लागू होगा।
इससे इन जीवनरक्षक दवाओं की रिटेल कीमतें मौजूदा कीमतों के आधार पर 70% तक घट सकती हैं। शनिवार को इस बारे में गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया।
दो दिन पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि कैंसर दवाओं पर मुनाफे की सीमा 30 फीसदी तय करने से मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ समिति ने की थी सिफारिश
कीमतें कम करने की सिफारिश डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत बनी विशेषज्ञ समिति ने की थी। समिति में देशभर के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल विशेषज्ञ, अस्पतालों के विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल थे।
समिति ने मार्जिन को तर्कसंगत बनाने के लिए 137 दवाओं की सिफारिश की है। इस सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।
कीमतों की जांच और निगरानी
उपभोक्ता NPPA की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल ऐप पर दवाओं की नई कीमतें देख सकते हैं।
कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य दवा नियंत्रकों को निर्देश दिए गए हैं। वे निर्माताओं, डीलरों, रिटेलरों, अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों पर निगरानी रखेंगे।
कैसे तय होती है दवा की कीमत
1. ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) जरूरी दवाओं की कीमत कंट्रोल करता है। 2013 के DPCO तहत नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत सरकार तय करती है।
2. बाजार में बिक रही दवाओं की कीमत के आधार पर जरूरी दवाओं की अधिकतम सीमा तय की जाती है। इससे ज्यादा कीमत पर दवा बेचना गैरकानूनी है।
3. स्वास्थ्य मंत्रालय दवाओं की सुरक्षा, असर और कीमत को देखते हुए जरूरी दवाओं की लिस्ट बनाता है। इसमें देश में आम बीमारियों और लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का ध्यान रखा जाता है।
4. इस लिस्ट की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार नई दवाएं जोड़ी जाती हैं। जो दवाएं इस सूची में नहीं होतीं, उनकी कीमतों पर सरकार का सीधा नियंत्रण कम होता है।
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