Last Updated:
क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेशों में पैसा भेजने और मंगाने के खेल पर ED ने बड़ा एक्शन लिया है. बेंगलुरु में कई कंपनियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी में जांच एजेंसी को FEMA नियमों के उल्लंघन से जुड़े अहम सुराग मिले हैं. ईडी का आरोप है कि कुछ कंपनियां आईबीआई की मंजूरी के बिना क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के जरिए विदेशों में पैसे का लेन-देन करा रही थीं.
ईडी ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करोड़ों की हेराफेरी का मामला पकड़ा है.
Crime News: क्रिप्टो करेंसी की दुनिया में चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ कंपनियां क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चुपचाप विदेशों में पैसा भेजने और मंगाने का काम कर रही थीं. इस मामले में शुरुआती जांच में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के फेमा उल्लंघन का खुलासा हुआ है.
इसी सिलसिले में ED के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 17 जून 2026 को बेंगलुरु के छह ठिकानों पर छापेमारी की है. जांच के दायरे में ट्रांसैक टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कैरेटएक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, मोक्शाग्ना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बायहाटके इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड और अभिभा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां जांच के दायरे में हैं.
आरबीआई की मंजूरी नहीं, फिर भी चल रहा था कारोबार!
ईडी के मुताबिक, ये कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अनुमति के बिना इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर जैसी सेवाएं दे रही थीं. इंटरनेट पर इन्हें विदेशी पैसे के लेन-देन का आसान तरीका बताकर एडवरटाइज किया जा रहा था. ग्राहक कुछ ही क्लिक में पैसा भेज और हासिल कर सकते थे, लेकिन जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे ट्रांजेक्शन के पीछे नियमों की अनदेखी की जा रही थी.
आखिर कैसे घूम रहा था पैसा?
जांच में सामने आया कि ग्राहक पहले प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करता था और अपने बैंक खाते से पैसा जमा करता था. इसके बाद उस रकम से यूएसडीटी जैसे स्टेबलकॉइन खरीदे जाते थे. फिर इन क्रिप्टो एसेट्स को अलग-अलग एक्सचेंजों और ओटीसी डील्स के जरिए बेचकर पैसा दूसरे देशों या लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था. ईडी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में विदेशी धन प्रेषण से जुड़े जरूरी दस्तावेज और नियम का पालन नहीं किया जा रहा था. यानी पैसा सीमाओं के पार जा रहा था, लेकिन नियामकीय निगरानी से काफी हद तक बाहर था.
अमेरिका से चल रहा था नेटवर्क!
जांच एजेंसी के अनुसार, मोक्शाग्ना टेक्नोलॉजीज अमेरिका के ग्राहकों से धन जुटाकर उसे क्रिप्टो में बदलती थी. इसके बाद बड़े पैमाने पर OTC ट्रेडिंग के जरिए उसे नकदी में बदलकर भारत में लोगों तक पहुंचाया जाता था. ED का दावा है कि कंपनी का मुख्य संचालक अमेरिका में बैठकर भारत में मौजूद अपने परिवार के सदस्यों की मदद से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था. वहीं ट्रांसैक टेक्नोलॉजी पर आरोप है कि वह बिना आईबीआई की मंजूरी के ऑफ-रैम्प सेवाएं चला रही थी.
शेल कंपनियां, OTC डील और करोड़ों की रकम
छापेमारी के दौरान ईडी को टैक्स हेवन देशों में बनी शेल कंपनियों, बड़े ओटीसी सौदों और विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के जरिए कथित अवैध धन हस्तांतरण के कई सुराग मिले हैं. शुरुआती जांच में 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनधिकृत सीमा-पार ट्रांसफर का पता चला है. एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए कुछ कंपनियों के बैंक खातों पर रोक भी लगा दी है. इन खातों में करीब 6 करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं.
About the Author

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



