Homeट्रैवलगांव में बना ‘मिनी मरीन ड्राइव’, सुबह-शाम टहलने पहुंचते हैं सैकड़ों लोग

गांव में बना ‘मिनी मरीन ड्राइव’, सुबह-शाम टहलने पहुंचते हैं सैकड़ों लोग


Last Updated:

सीतामढ़ी जिले की महुआवा पंचायत ने सीमित संसाधनों में विकास का ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है. बागमती नदी के किनारे स्थित शिवगंगा घाट को पंचायत के मुखिया ने महज 10 लाख रुपये की लागत से ‘मिनी मरीन ड्राइव’ का रूप दे दिया है. हरियाली, बैठने की बेहतर व्यवस्था और आकर्षक डिजाइन के कारण यह स्थान अब केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीणों के लिए सैर, योग और स्वास्थ्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया है. पंचायत स्तर पर किए गए इस नवाचार ने साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और सही योजना के दम पर गांवों की तस्वीर भी बदली जा सकती है.

सीतामढ़ी जिले का महुआवा पंचायत इन दिनों पूरे देश के लिए ग्रामीण विकास की एक नई मिसाल पेश कर रहा है. यहां बागमती नदी के किनारे स्थित ‘शिवगंगा घाट’ को स्थानीय मुखिया ने अपनी दूरदर्शिता से एक खूबसूरत ‘मिनी मरीन ड्राइव’ का रूप दे दिया है.

ट्रेवल

करीब 400 फीट लंबे इस घाट को महज 10 लाख रुपये के सीमित मुखिया फंड से तैयार किया गया है. पटना के मरीन ड्राइव से प्रेरित होकर बने इस घाट के चारों तरफ हरे-भरे पेड़-पौधे और बैठने की बेहतरीन व्यवस्था की गई है, जो इस ग्रामीण परिवेश को एक बेहद आधुनिक और मनोरम लुक देती है.

ट्रेवल

​महुआवा पंचायत का यह घाट अब केवल छठ पूजा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए सेहत और सुकून का नया केंद्र बन चुका है. यहां रोजाना सुबह और शाम करीब 200 से 300 बुजुर्ग और युवा टहलने, कसरत करने और योग के लिए जुटते हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

ट्रेवल

मुखिया जी बताते हैं कि गांव के बुजुर्गों ने शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से राहत पाने के लिए एक साफ-सुथरी जगह की मांग की थी, जिसके बाद इस शानदार स्ट्रेच का निर्माण कराया गया। दिन के समय भी ठंडी हवाओं और छांव का आनंद लेने के लिए यहां ग्रामीणों का तांता लगा रहता है.

ट्रेवल

​इस बदलाव से गांव के बुजुर्ग बेहद खुश और उत्साहित हैं. नियमित रूप से यहां सुबह की सैर के लिए आने वाले गांव के बुजुर्ग राम इकबाल महतो कहते हैं, “पहले हमें टहलने के लिए धूल-मिट्टी वाली सड़कों पर जाना पड़ता था, जिससे दुर्घटना का डर रहता था.

ट्रेवल

अब बागमती किनारे इस सुंदर घाट पर आकर मन खुश हो जाता है और ताजी हवा में हमारी सेहत भी सुधर रही है.” वहीं, एक अन्य बुजुर्ग कलेवर महतो ने मुखिया के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा, “आजादी के बाद से हमारे गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी. यहां नदी पर चचरी (बांस) का पुल था, जिससे कई हादसे होते थे. आज पक्का पुल भी बन गया है और यह सुंदर मरीन ड्राइव जैसा घाट भी, जिसने हमारे गांव की सूरत ही बदल दी है.

ट्रेवल

​महुआवा पंचायत की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इसके लिए किसी नगर विकास विभाग या बड़े बजट की मदद नहीं ली गई, बल्कि पंचायत स्तर के सीमित संसाधनों का ही सही इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, बाढ़ के दिनों में नदी का पानी इस घाट के ऊपर तक आ जाता है, लेकिन बाकी समय में यह स्थान पूरे इलाके के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहता है. मुखिया जी के इस सराहनीय कदम की बदौलत अब महुआवा पंचायत न सिर्फ सीतामढ़ी बल्कि राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास और नवाचार (इन्नोवेशन) का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहा है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments