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चुनाव आयोग अधिकारी पर कामकाज में दखल देने का आरोप: सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी, कार्रवाई नहीं हुई


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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ कैबिनेट सचिवालय में शिकायत की थी, लेकिन कैबिनेट सचिव ने गर्ग के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

दोनों आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखा था। इसमें आरोप लगाया था कि गर्ग ने बिना चुनाव आयोग से चर्चा के वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज में बदलाव का आदेश जारी किया।

हालांकि, कैबिनेट सचिवालय का मानना था कि दोनों पत्र पूरे चुनाव आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं थे। इसलिए कार्रवाई करने से आयोग के कामकाज में दखल देने का सवाल उठ सकता था।

RTI कार्यकर्ता और रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के. बत्रा को मिले जवाब से यह जानकारी सामने आई। मनीष गर्ग को 2 सितंबर 2024 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के जरिए चुनाव आयोग में तैनात किया गया था।

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EC ने कहा- पत्र मनीष गर्ग की रिजॉइनिंग से जुड़े थे

  • द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे थे।
  • दोनों ने चुनाव आयोग में अधिकारियों के काम बांटने से जुड़े एक आदेश पर सवाल उठाए थे। उन्हें आशंका थी कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की शक्तियां राज्य स्तर से केंद्रीय स्तर पर केंद्रित हो सकती हैं।
  • 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि संबंधित आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया। आयोग ने यह भी कहा था कि दोनों के पत्र मनीष गर्ग की रिजॉइनिंग से जुड़े थे, न कि नीति या IT डिवीजन से।

कैबिनेट सचिवालय का शिकायत रिकॉर्ड में रखने का फैसला

कैबिनेट नोट में 2023 के कानून की धारा 18 का जिक्र किया गया। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग को सर्वसम्मति से फैसले लेने की कोशिश करनी चाहिए और मतभेद होने पर बहुमत से निर्णय लिया जा सकता है।

नोट में कहा गया कि मनीष गर्ग के कामकाज और आचरण से जुड़े मामलों पर चुनाव आयोग के नियमों के तहत विचार होना चाहिए।

3 अगस्त को तैयार एक नोट में मुख्य चुनाव आयुक्त से इस मामले पर राय लेने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, अगले दिन के नोट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की शिकायत को पूरे आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं माना जा सकता।

कैबिनेट सचिवालय के मुताबिक, चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज में कार्यपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने 5 अगस्त 2026 को दोनों पत्र मिलने की पुष्टि की थी। शिकायतों की प्रतियां कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), स्थापना अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय को भेजी गईं।

कैबिनेट सचिव के हस्ताक्षर वाले नोट में शिकायतों को रिकॉर्ड पर रखने का फैसला किया गया, ताकि भविष्य में संबंधित अधिकारी के बारे में निर्णय लेते समय उन पर विचार किया जा सके।



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