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कोलकाता33 मिनट पहले
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चोरबागान दुर्गा पंडाल हादसे से ठीक पहले लोग डेढ़ घंटे तक लाइन में लगे थे।
बाहर बारिश हो रही थी और कोई भी बाहर नहीं जाना चाहता था। बारिश से बचने के लिए एंट्री गेट पर खड़े लोग अंदर आने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे।भीड़ इतनी बढ़ गई कि सांस लेना मुश्किल हो गया। दबाव को न झेल पाने के कारण, अंदर खड़े सभी लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।मैं भी लोगों के नीचे दब गया था। बचना मुश्किल था, किसी तरह खुद को संभाला, मां के पास पहुंचा, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। वो मेरी आंखों के सामने मर गईं।

यह कहना है 25 साल के सोनू पाल का। शनिवार शाम कोलकाता चोरबागान दुर्गा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, इसमें उनकी मां भी थीं।
हादसे को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है कि पंडाल के आयोजकों ने एक घोषणा की थी, जिसमें चेतावनी थी कि यदि भीड़ कंट्रोल नहीं हुई तो पंडाल गिर सकता है।
CM अधिकारी ने भी मीडिया से आयोजकों की किसी घोषणा का जिक्र किया था। इसके ठीक बाद भगदड़ मच गई, एग्जिट गेट का एक हिस्सा भी गिर गया।
गौरतलब है कि 91 साल से बनाया जा रहा चोरबागान पंडाल इस बार अपनी थीम के चलते सोशल मीडिया पर वायरल है। इसे देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
इतना ही नहीं, चोरबागान पंडाल को इस बार बंगाल सरकार के देवी दुर्गा सम्मान 2026 में सर्वश्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ (सेरार सेरा) पंडाल का तीसरा अवॉर्ड भी मिला है।
हादसे से जुड़े वीडियोज देखने के लिए यहां क्लिक करें…
हादसे से पहले की 5 तस्वीरें…

पहली तस्वीर: चाेरबागान पंडाल चित्तरंजन एवेन्यू से एक संकरी सड़क पर बनाया गया है। हादसे से ठीक पहले यहां हजारों की भीड़ थी।

दूसरी तस्वीर: पंडाल के एंट्री गेट के ठीक सामने की है। जब बारिश शुरू हुई तो लोग तेजी से अंदर जाने लगे। वे पुलिस की बात भी नहीं मान रहे थे।

तीसरी तस्वीर: पंडाल के एग्जिट गेट के बाहर मौजूद भीड़, बारिश तेज हुई तो बाहर जाती भीड़ के साथ सड़क पर मौजूद लोग भी अंदर घुसे।

चौथी तस्वीर: लोग अंदर घुसने लगे तो पंडाल का एक हिस्सा गिर गया। इसके बाद भगदड़ मची।

पांचवी तस्वीर: हादसे के समय लोग एक-दूसरे पर गिरते नजर आ रहे हैं। कुछ गिरे हुए लोगों को उठाते दिख रहे हैं तो कुछ घबराहट में चीख रहे हैं।
चोरबागान हादसा 4 किस्से…
एंबुलेंस नहीं पहुंची, घायलों को बाइक से अस्पताल पहुंचाया: पुलिस, वॉलंटियर और एंबुलेंस मौके पर नजर नहीं आए। स्थानीय लोगों ने खुद घायलों को बाहर निकालकर बाइक से अस्पताल पहुंचाया। कुछ लोगों ने कहा कि वे शवों को ओला-उबर से ले जा रहे हैं, पुलिस-एम्बुलेंस नहीं है।
वर्धमान से आए शख्स ने पत्नी, बहन और भांजे को खोया: पिता ने 5 साल के बेटे को बचाने उठाकर दूसरी तरफ फेंका। पत्नी को बचा नहीं पाया। वह नीचे गिर गई और भीड़ में दबकर उसकी मौत हो गई। उसके साथ आई बहन और भांजा भी दबकर मर गए।
3 महिलाएं दब गईं, पंडाल को तोड़कर बाहर निकाला: एक महिला ने बताया- अचानक पीछे से जोरदार धक्का लगा और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। करीब 40-45 मिनट तक सांस लेना मुश्किल हो गया। मैंने उन्हें निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई। आखिरकार पंडाल का एक हिस्सा तोड़कर बाहर निकाला गया।
जान तो बच गई, लेकिन बेहद डरावना पल था: एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह अपनी दोस्त के साथ दुर्गा पूजा पंडाल आए थे। भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोगों को घुटन होने लगी और वे बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगे। उनकी दोस्त भीतर ही फंस गई। काफी मशक्कत के बाद वह बाहर आई। उसे हल्की चोट लगी है।
अब जानिए पंडाल की खासियत: थीम- बियॉन्ड साउंड, 360° का ट्रैक
कोलकाता के जिस चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार शाम भगदड़ हुई, वह सारदा पार्क मैदान में करीब 20 हजार वर्ग फीट में बना है। यह चित्तरंजन एवेन्यू से एक संकरी सड़क पर बनाया गया है।
चोरबागान पूजा पंडाल ने हाल के कुछ सालों में लोकप्रियता हासिल की है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
इस बार इसकी थीम बियॉन्ड साउंड है। इसलिए पंडाल के अंदर लगभग अंधेरे जैसा माहौल था। मां की प्रतिमा के ऊपर छोटे-छोटे छेद से रोशनी पहुंच रही थी।
पंडाल में एंट्री के बाद ऊंचे गोलाकार कॉरिडोर से 360 डिग्री घूमकर ही बाहर निकलने की व्यवस्था की गई थी। एंट्री और एग्जिट एक-एक ही थे। दोनों ही संकरी गलियों में खुलते हैं।
यह पंडाल ‘बियॉन्ड साउंड’ यानी आवाज से आगे के अनुभव पर बना है। यह पंडाल रोशनी, संगीत, सजावट और जगह की डिजाइन मिलकर दर्शकों को शोर के बीच गहरी शांति का अनुभव कराता है।
पंडाल के केंद्र में मां दुर्गा की बारीकी से गढ़ी गई प्रतिमा है, जिसे शांत ब्रह्मांड जैसी आकृति दी गई है। अपनी अनूठी थीम के कारण यह पंडाल सोशल मीडिया पर वायरल है।
