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Palamu Best Tourist Spot: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में कमलदह झील गर्मी में भी ठंडक देने के लिए मशहूर है. यहां हरी भरी घास होने की वजह से सबसे बेस्ट टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है. यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. वहीं, ऐतिहासिक पलामू किला और मड हाउस होने की वजह से पर्यटकों का पसंदीदा जगह बन गया है.
वन विभाग द्वारा कमलदह झील के समीप वॉच टॉवर का निर्माण कराया गया है, जो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है. इस टॉवर पर चढ़कर आसपास के घने जंगलों, पहाड़ियों और झील का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है. सुबह और शाम के समय यहां का नजारा बेहद मोहक दिखाई देता है. प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोग इस स्थान को विशेष रूप से पसंद करते हैं. वॉच टॉवर से दिखाई देने वाला प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों की यात्रा को यादगार बना देता है.

कमलदह झील की खासियत सिर्फ इसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है. यह झील पलामू किले से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. माना जाता है कि चेरो राजवंश के शासनकाल में राजा और रानियां यहां आया करते थे. पलामू किला आज भी बीते दौर की अनेक कहानियों को अपने भीतर समेटे हुए है. किले और झील के बीच का यह क्षेत्र इतिहास प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है. यहां पहुंचकर पर्यटक उस दौर की संस्कृति, जीवनशैली और राजसी वैभव की झलक महसूस कर सकते हैं.

कमलदह झील पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक विकल्प है. मेदिनीनगर से राष्ट्रीय राजमार्ग-39 होते हुए दुनियाखाड़ और बेतला के रास्ते पर्यटक आसानी से पहुंच सकते हैं. बेतला नेशनल पार्क से पलामू किला जाने वाले मार्ग पर आगे बढ़ने के बाद किले के पीछे दाईं ओर कच्चे रास्ते से कमलदह झील तक पहुंचा जा सकता है. मार्ग में दिशा-सूचक बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे पर्यटकों को रास्ता खोजने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है.
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स्थानीय लोगों के अनुसार कमलदह झील राजा और रानी की कई रोचक कहानियों से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि जब चेरो राजवंश का शासन था, तब राजा यहां तैराकी करने आया करते थे. वहीं, रानियां अपनी सहेलियों के साथ इस झील में स्नान के लिए पहुंचती थीं. सदियों पुरानी यह परंपरा और इससे जुड़ी लोककथाएं आज भी ग्रामीणों के बीच जीवंत हैं. यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कमलदह झील को सामान्य पर्यटन स्थल से अलग पहचान देती है. यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के साथ इतिहास की अनोखी यात्रा का अनुभव भी करते हैं.

कमलदह झील केवल प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और सुविधाओं के मामले में भी बेहतर मानी जाती है. यहां चौबीसों घंटे टाइगर ट्रैकर गार्ड तैनात रहते हैं। इसके अलावा इको विकास समिति के सदस्य भी क्षेत्र की निगरानी करते हैं. पर्यटकों की सुविधा के लिए बेतला क्षेत्र में कैंटीन की व्यवस्था उपलब्ध है. वहीं, बक्सा मोड़ के पास जंगल के बीच बने मड हाउस पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अनुभव देते हैं. यहां ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था भी मौजूद है.

गर्मी के मौसम में जब शहरों की तपिश लोगों को परेशान करने लगती है, तब हर किसी का मन किसी ऐसे स्थान की तलाश करता है जहां ठंडी हवाएं, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य एक साथ मिल जाएं. झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में स्थित एक झील ऐसा ही एक मनमोहक पर्यटन स्थल है. घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसी यह झील पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाती है. यहां पहुंचते ही शहरी भागदौड़ से दूर शांति और सुकून का अहसास होता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में भी यह जगह प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों की पहली पसंद बनती जा रही है.

पलामू टाइगर रिजर्व अपने वन्यजीवों, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. इसी रिजर्व के अंतर्गत स्थित कमलदह झील पर्यटकों को रोमांच और इतिहास दोनों का अद्भुत संगम प्रदान करती है. यहां आसपास कई झीलें, तालाब और नदियां मौजूद हैं, लेकिन कमलदह झील की पहचान सबसे अलग है. झील के चारों ओर फैली हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और शांत वातावरण लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है. यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ पलामू के गौरवशाली इतिहास को भी करीब से महसूस कर सकते हैं.

जहां गर्मी के मौसम में अधिकांश क्षेत्रों के पेड़-पौधे सूखने लगते हैं. वहीं, कमलदह झील के आसपास हरियाली बरकरार रहती है. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताएं और प्राकृतिक जल स्रोत इसे सदाबहार बनाए रखते हैं. झील के शांत जल में खिले सफेद कमल किसी सफेद चादर की तरह दिखाई देते हैं, जो इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं. चारों तरफ फैले जंगल और ठंडी हवाएं यहां आने वालों को ताजगी से भर देती हैं. यही वजह है कि गर्मी में भी यह स्थल लोगों को ठंडक का एहसास कराता है.



