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Tripur Sundari Devi Temple: अगर आप मध्यप्रदेश जा रहे हैं और माता रानी में आपकी आस्था है तो शक्तिपीठ जबलपुर की जरूर यात्रा करें. जबलपुर में माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर है. यहां की महिमा अलौकिक है. माना जाता है कि यहां आदि पराशक्ति जगतजननी का पहला अंश माता त्रिपुर सुंदरी के रूप में इसी स्थान पर अवतरित हुआ था.यहां की सबसे बड़ी विशेषता यहां के एक पेड़ पर विराजमान काला नाग है. भक्त इसे देवों के देव महादेव के आभूषण का प्रतीक मानते हैं.
जबलपुर त्रिपुर माता मंदिर. Photo: AI
मध्य प्रदेश की पावन धरती पर यदि आप घूमने जा रहे हैं तो यहां के त्रिपुर सुंदरी माता का मंदिर जरूर जाएं. यहां अत्यंत प्रसिद्ध और अलौकिक सिद्ध धाम है. भोपाल से लगभग 350 किलोमीटर दूर स्थित यह पवित्र क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतों और शांत वातावरण से घिरा हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदि पराशक्ति जगतजननी का पहला अंश माता त्रिपुर सुंदरी के रूप में इसी स्थान पर अवतरित हुआ था. इस दिव्य धाम में प्रवेश करते ही भक्तों को सबसे पहले एक पेड़ पर काला नाग दिखाई देता है, जिसे भगवान शिव के आभूषण का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस पवित्र मंदिर की स्थापना राजा कस्तूरी कर्ण द्वारा की गई थी. यहां आने वाले भक्तगण माता के मंगल रूप और उनकी पवित्र पादुकाओं के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं. देश भर के प्रमुख शहरों से यहां बस और ट्रेन द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है.
राजा कस्तूरी कर्ण ने कराई थी मंदिर की स्थापना
यहां मिलती है मां त्रिपुर सुंदरी का अखंड आशीर्वाद
नाग देवता के दर्शन के बाद श्रद्धालु ‘ॐ त्रिपुर सुंदरी मतारै नमः’ का जाप करते हुए मुख्य विशाल प्रांगण में प्रवेश करते हैं. मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही सबसे पहले माता की पवित्र पादुकाओं के दर्शन होते हैं. पादुकाओं के पास ही भगवान श्री गणेश (विनायक) की मूर्ति भी स्थापित है. मंदिर में महिला श्रद्धालुओं के लिए कुमकुम और सिंदूर का विशेष धार्मिक महत्व है. यहां माता के चरणों का कुमकुम सिंदूर के रूप में धारण करने वाली महिलाओं को मां त्रिपुर सुंदरी का अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है.
मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण
त्रिपुर सुंदरी मंदिर में अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. यहां भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए नारियल को रंगीन कपड़े में लपेटकर मंदिर परिसर में बांधते हैं. जब मन्नत पूरी हो जाती है, तो श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार भेंट अर्पित करते हैं. इसके अलावा, मन्नत मांगने वाले श्रद्धालु माता को झूले पर सवार कराकर उनकी सवारी निकालते हैं. यह दृश्य अत्यंत रमणीय होता है और भक्तों को अनुभूति होती है कि स्वयं जगजननी मां त्रिपुर सुंदरी अपनी लीलाओं से उनका कल्याण कर रही हैं.यहां भक्त मां से जो भी कामनाएं करते हैं, उसे एक रंगीन कपड़े में एक नारियल के साथ वहां बांध देते हैं. कामनाएं पूर्ण होने के बाद अपनी अपनी इच्छानुसार उनकी पूर्ति करते हैं. मां से कामनाएं करने वाले भक्त मां को झूले में सवार कर उनकी सवारी उठाते हैं. ये दृश्य बहुत ही रमणीय हो जाता है. इस क्षण में मानो स्वयं त्रिपुर सुंदरी माता अपने भक्तों से ये सब करवाती है, ऐसी अनुभूति. भक्तों को होने लगती है.
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मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…
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