{“_id”:”6ad80605c2788a0e6c0783f7″,”slug”:”jio-not-telecom-company-but-technology-giant-akash-ambani-ai-cloud-focus-2026-10-21″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”‘जियो दूरसंचार कंपनी नहीं, तकनीक दिग्गज’: आकाश अंबानी बोले एआई व क्लाउड पर फोकस; क्या है जियो की अगली तैयारी?”,”category”:{“title”:”Business Diary”,”title_hn”:”बिज़नेस डायरी”,”slug”:”business-diary”}}
आकाश अंबानी
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
रिलायंस इंडस्ट्रीज की प्रमुख डिजिटल इकाई, जियो प्लेटफॉर्म्स, अपने कारोबार के विस्तार के लिए अब सिर्फ दूरसंचार क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी का फोकस एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी पर है। देश के अब तक के सबसे विशाल आईपीओ के खुदरा निवेशकों के लिए खुलने से पहले, जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने एक साक्षात्कार में यह बातें कहीं।
आकाश अंबानी ने कहा कि जियो को सिर्फ एक दूरसंचार कंपनी मानना गलत होगा, क्योंकि यह असल में एक हाई-टेक टेक्नोलॉजी फर्म है। उन्होंने कहा, हमारे लिए कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी अलग-अलग चीजें नहीं हैं, क्योंकि हमारा पूरा टेलीकॉम नेटवर्क खुद में एक एडवांस्ड सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है। कंपनी ने अपने दम पर 5जी कोर नेटवर्क, क्लाउड-संचालित रेडियो तकनीक और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का विकास किया है, जो वर्तमान में देश के 53.33 करोड़ ग्राहकों को अपनी सेवाएं दे रहा है।
जियो के इस आईपीओ का लक्ष्य लगभग 30,200 करोड़ रुपये जुटाना है, जिससे कंपनी का कुल मूल्यांकन करीब 108 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है। वर्तमान बाजार में सिर्फ नए ग्राहक जोड़ने से तेज विकास हासिल करना संभव नहीं है। ऐसे में कंपनी अपने विशाल उपभोक्ता आधार का लाभ उठाकर डिजिटल सेवाओं, एंटरप्राइज टेक और एआई के जरिये राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
ये भी पढ़ें: रेडसीर रिपोर्ट: ऑनलाइन खरीद बढ़ी, 90 अरब डॉलर के पार होगा कारोबार; पहली छमाही में कितनी रही बिक्री?
होम ब्रॉडबैंड से डिजिटल सोल्यूशंस तक विस्तार
आकाश ने कहा कि जियो का विस्तार अब मोबाइल सेवाओं से आगे बढ़कर होम ब्रॉडबैंड और कॉर्पोरेट डिजिटल सोल्यूशंस तक पहुंच चुका है। देश में आज भी लगभग 26 करोड़ लोग 2जी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं, और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच देश के महज 21 फीसदी घरों तक ही हो पाई है। इसके अलावा, देश के 7.9 करोड़ से अधिक एमएसएमई में से तीन प्रतिशत से भी कम ने डिजिटल सेवाओं को अपनाया है, जो जियो के लिए विकास की अपार संभावनाएं पेश करता है।