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रायपुर के सरोरा में ‘घर-जमाई’ के ताने से परेशान होकर एक व्यक्ति ने अपने साले की चाकू से गोदकर हत्या कर दी. हत्या के बाद आरोपी ने खुद पुलिस को फोन कर आत्मसमर्पण कर दिया.
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रायपुर के सरोरा इलाके में घरेलू तनाव और रोजाना के तानों ने एक खौफनाक खूनी मोड़ ले लिया. पिछले तीन सालों से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ससुराल में ‘घर-जमाई’ बनकर रह रहे प्रकाश नामक व्यक्ति ने अपने ही साले गिरधर साहू की बेरहमी से हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक, गिरधर अक्सर प्रकाश को घर-जमाई होने का ताना मारता था, जिसे लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. साला जब भी ‘घर जमाई’ कहता, ये बात प्रकाश के दिल को चुभ जाती थी. ऐसे में बुधवार की शाम यह विवाद इतना बढ़ा कि प्रकाश ने गिरधर को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली. हत्या की इस वारदात को बेहद शातिराना तरीके से अंजाम दिया गया.
आरोपी प्रकाश सबसे पहले अपने साले गिरधर को रिंग रोड नंबर-2 स्थित एक शराब दुकान पर ले गया. वहां उसे शराब पिलाने के बाद वह उसे सरोरा मोड़ के पास ले गया और दोबारा शराब पिलाई. जब गिरधर नशे में पूरी तरह धुत्त हो गया, तब प्रकाश ने चाकू और कटहल काटने वाले धारदार औजार से उसके सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि गिरधर की मौके पर ही मौत हो गई. हैरानी की बात यह रही कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी प्रकाश ने भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि खुद ‘डायल 112’ पर कॉल कर पुलिस को अपनी लोकेशन बताई और सरेंडर कर दिया. पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के मुताबिक, जानकार बताते हैं कि घरेलू ताने, आर्थिक निर्भरता और अत्यधिक शराब का सेवन इस तरह के हिंसक अपराधों का मुख्य कारण बन रहे हैं. एडवोकेट परीक्षित तिवारी के अनुसार, हाल के महीनों में पारिवारिक तनाव से जुड़ी हिंसक घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है. रायपुर में बढ़ते अपराधों के आंकड़े डराने वाले हैं. शहर में जब से कमिश्नरेट प्रणाली (23 जनवरी) लागू हुई है, तब से अब तक महज चार महीनों में 18 हत्याएं हो चुकी हैं. चाकूबाजी की घटनाओं की बात करें तो यह आंकड़ा 60 को पार कर गया है. सबसे ज्यादा मामले कोतवाली सब-डिवीजन क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं. पुलिस अब तक इन मामलों में 110 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि अपराधियों में कानून और पुलिस का खौफ खत्म होता जा रहा है.
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