दिल्ली पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर के जरिए जॉब पोर्टल से डेटा लेकर 500 बेरोजगारों से ठगने वाले गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गया यह गैंग लोगों को टाटा मोटर्स में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपना शिकार बनाता था।
हेमंत कुमार पांडेय, नई दिल्ली
दिल्ली पुलिस के उत्तर जिला एएटीएस ने वजीराबाद से ठगी में लिप्त फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर संचालक समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह जॉब पोर्टल ऐप से डेटा लेकर टाटा मोटर्स में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अब तक 500 लोगों से ठगी कर चुका है। पुलिस ने परिसर से 9 मोबाइल फोन, 7 एटीएम कार्ट एवं दो बैंक पासबुक आदि बरामद किए हैं।
डीसीपी निहारिका भट्ट ने रविवार को बताया कि एएटीएस को सूचना मिली थी कि वजीराबाद के संगम विहार स्थित एक फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चलने की सूचना मिली थी। एडिशनल डीसीपी पुखराज कमल गुप्ता के निर्देश पर एएटीएस प्रभारी इंस्पेक्टर संजय कुमार की टीम गठित की गई। एसआई हीरालाल, एसआई दिनेश एवं हेड कॉन्स्टेबल रविंद्र की टीम ने परिसर पर छापा मारा और दो महिलाओं समेत तीन को दबोचा। इसमें कॉल सेंटर संचालक सतीश मौर्या और अन्य युवतियां टेली कॉलर थीं। पुलिस ने दो और टेली कॉलर युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। सतीश तीन महीने से इस परिसर में कॉल सेंटर चला रहा था।
500 रुपये की ठगी के बाद सूझा उपाय
36 वर्षीय सतीश मौर्या ने एमएससी की पढ़ाई करने के बाद एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स सहितअन्य संस्थाओं में नौकरी की। इस बीच उसके साथ नौकरी के नाम पर 500 रुपये की ठगी हो गई थी। इसके बाद उसने भी इसी तरह से ठगी करने की योजना बनाई। पहले वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में साझेदारों के साथ कॉल सेंटर चला रहा था, लेकिन एक साल से वह अकेले कॉल सेंटर चला रहा था। आरोपी ने बताया कि वह ‘जॉब है सपोर्ट’ ऐप पर नौकरी देनेके लिए सम्पर्क करता था। उसने इसी जगह से टेली कॉलर युवतियों को भर्ती किया था। फिर उसने इसी पोर्टल-ऐप से नौकरी के इच्छुकों का डेटा लेकर टेलीकॉलर युवतियां बात करती थीं। वे डेटा एंट्री ऑपरेटर, वेब डिजाइनर, डेटा एनेलिस्ट और एकाउंटेट की नौकरी के लिए इंटरव्यू लेती थीं। यह गैंग पांच चरणों में अलग-अलग बहाने अपने शिकार से रुपये लेता था। पहले चरण में पांच सौ रुपये फीस होती थी और आखिरी चरण में 8500 रुपये फीस होती थी। अभी तक की जांच में मालूम हुआ है कि सतीश ने 500 लोगों से करीब 20 लाख रुपये की ठगी की थी।
जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी ने बताया कि सतीश देसी शराब के ठेके पर आए मजदूरों से 500 रुपये में सिम कार्ड खरीदता था। इन्हीं मजदूरों को फंसा कर 5000 रुपये में बैंक खाता खरीदता था।



