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तालाब के बीच बनी रहस्यमयी मस्जिद, सदियों बाद भी इंजीनियरिंग देख रह जाएंगे दंग


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Dharohar Telangana Floating Mosque: तेलंगाना के विकाराबाद जिले के मुजाहिदपुर गांव में स्थित एक प्राचीन मस्जिद इन दिनों पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. हैदराबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित यह मस्जिद एक विशाल तालाब के बीचों-बीच बनी है. माना जाता है कि इसका निर्माण कुतुब शाही शासनकाल में 16वीं-17वीं शताब्दी के दौरान हुआ था. मानसून में तालाब भर जाने पर यह मस्जिद पानी के बीच तैरते द्वीप जैसी नजर आती है, जबकि गर्मियों में इसका पारंपरिक रास्ता दिखाई देता है. इसकी अनोखी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है. स्थानीय लोग चाहते हैं कि पुरातत्व विभाग इस धरोहर को संरक्षित कर आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे, जिससे विरासत संरक्षण के साथ ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके.

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हैदराबाद: आधुनिकता और विकास की दौड़ में अक्सर इतिहास के पन्ने कहीं पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कभी-कभी प्रकृति खुद इन पन्नों को हमारे सामने लाकर खड़ा कर देती है. ऐसा ही एक अद्भुत नजारा तेलंगाना के विकाराबाद जिले में देखने को मिल रहा है. हैदराबाद से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर, परगी मंडल के मुजाहिदपुर गांव में स्थित एक प्राचीन मस्जिद इन दिनों पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है.

इस मस्जिद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक विशाल तालाब के बीचों-बीच स्थित है जो अपनी अनोखी बनावट से लोगों को हैरान कर रही है. स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के अनुसार, यह ऐतिहासिक धरोहर कुतुब शाही राजवंश 16वीं-17वीं शताब्दी के दौर की है. कुतुब शाही काल की पारंपरिक वास्तुकला, बारीक नक्काशी और मजबूत मेहराब आज भी इस ढांचे में साफ नजर आते हैं. सदियों पुराने इस निर्माण की इंजीनियरिंग इतनी बेमिसाल है कि सालों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद मस्जिद का ढांचा पूरी तरह सुरक्षित और अडिग खड़ा है.

तालाब भर जाने पर द्वीप जैसी दिखाई देती है मस्जिद

इस मस्जिद का रहस्य मौसम और पानी के स्तर के साथ बदलता है. मॉनसून के दिनों में जब तालाब पूरी तरह भर जाता है, तब यह मस्जिद पानी के बीच एक तैरते हुए द्वीप जैसी दिखाई देती है. वहीं, गर्मियों के मौसम में जब जलस्तर घटता है तो मस्जिद की असल खूबसूरती और इसके भीतर जाने का पारंपरिक रास्ता साफ तौर पर उभरकर सामने आ जाता है. पानी कम होने पर लोग पैदल या नाव के जरिए इस प्राचीन इबादतगाह के करीब पहुंचकर इसकी वास्तुकला को निहारते हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस फ्लोटिंग मस्जिद के वीडियो वायरल होने के बाद से यहां वीकेंड पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. कई लोग इसकी तुलना राजस्थान के मशहूर जल महल से भी कर रहे हैं.

ऐसे पुरातत्व विभाग पर्यटन स्थल के तौर पर कर सकते हैं विकसित

हालांकि पानी के लगातार संपर्क में रहने के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुरातत्व विभाग इस जगह को अपने हाथ में ले और इसे एक आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे, तो यह न केवल तेलंगाना की समृद्ध विरासत को संजोए रखेगा, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा देगा. फिलहाल, मुजाहिदपुर की यह जल मस्जिद इतिहास, वास्तुकला और प्रकृति के अनूठे मिलन का एक जीवंत उदाहरण बनी हुई है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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