Homeटेक्नोलॉजीतिब्बत की निर्वासित सरकार बोली-लद्दाख से तुलना बेबुनियाद: हकीकत कुछ और;...

तिब्बत की निर्वासित सरकार बोली-लद्दाख से तुलना बेबुनियाद: हकीकत कुछ और; वांगचुक ने कहा था- चीन ने तिब्बत का ऐसा दमन नहीं किया, जैसा हमारा हुआ


10 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फाइल फोटो

सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने सोनम वांगचुक के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें वांगचुक ने लद्दाख के हालात की तुलना तिब्बत से की थी।

CTA के प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि यह तुलना गलत और हकीकत से परे है। वांगचुक का बयान चीन के सत्तावादी शासन में तिब्बतियों की स्थिति नहीं दिखाता।

वांगचुक ने लेह में 24 सितंबर 2025 में हुई हिंसा की पहली बरसी पर एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।

कार्यक्रम लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन ने आयोजित किया था। इसमें वांगचुक ने 2019 से लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार के रवैए की आलोचना की थी।

वांगचुक ने कहा था-

quote image 17 1790352484452

वांगचुक ने यह भी कहा था- लोकतंत्र के कारण भारत को चुना

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख ने भारत के साथ रहना इसलिए चुना, क्योंकि उसे लोकतंत्र और सम्मान के साथ जीने के अधिकार पर भरोसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख के हालात ने डर का माहौल बना दिया है। उनके मुताबिक, यह उस लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ है, जिसके कारण लोगों ने भारत को चुना था।

वांगचुक ने कहा कि 2014 से 2019 तक देश में हालात अच्छे थे, जब बीजेपी सत्ता में आई थी। वांगचुक ने कहा, “एक तरफ लद्दाख के पास चीन था और दूसरी तरफ भारत। हमने भारत को इसलिए चुना, क्योंकि हमें भरोसा था कि यहां लोकतंत्र है और हम सिर ऊंचा करके जी सकेंगे।”

CTA ने तुलना को गलत बताया

तिब्बती निर्वासित सरकार CTA ने अब लद्दाख और तिब्बत की स्थिति की तुलना पर गहरी चिंता जताई है। तिब्बती सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि तिब्बत अब भी चीन के सत्तावादी शासन के अधीन है। वहां तिब्बतियों को उनके मूल अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के दमन का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि तिब्बत की अलग सांस्कृतिक पहचान मिटाने के उद्देश्य से उठाए जा रहे कदम भी लगातार तेज किए जा रहे हैं।

तिब्बत में चीन के दमन के हालात

  • सांस्कृतिक पहचान पर हमला: चीन तिब्बती भाषा, संस्कृति और परंपराओं को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से ‘सिनिसाइज़ेशन’ की नीति अपना रहा है।
  • धार्मिक दमन: चीन ने तिब्बत के हजारों मठों को नष्ट कर दिया है और भिक्षुओं व नन को जबरन धर्म छोड़ने पर मजबूर किया है।
  • भाषा के अधिकार का दमन: तिब्बती भाषा की शिक्षा और उसके संरक्षण की वकालत करने वाले कार्यकर्ताओं जैसे ताशी वांगचुक को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है।
  • अभिव्यक्ति की आजादी का अभाव: सरकार के खिलाफ कोई भी असहमति जताने पर लोगों को ‘अलगाववाद’ का झूठा आरोप लगाकर प्रताड़ित किया जाता है और जेल भेजा जाता है।
  • व्यापक निगरानी: तिब्बती लोग अत्यधिक निगरानी और ‘ड्रैकोनियन’ यानी कठोर नियंत्रण वाले माहौल में जीने को मजबूर हैं, जहां उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।
  • धार्मिक उत्तराधिकार में हस्तक्षेप: चीन दलाई लामा और पंचन लामा के चयन की पारंपरिक आध्यात्मिक प्रक्रिया में जबरन हस्तक्षेप कर रहा है, जो तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है।
  • बाहरी दुनिया से अलगाव: तिब्बत को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग-थलग रखा गया है, और स्वतंत्र मीडिया या विदेशी राजनयिकों को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।
  • मनमानी हिरासत और अत्याचार: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और असंतुष्टों को बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जाता है और यातनाएं दी जाती हैं।
  • पर्यावरण का शोषण: तिब्बत में बड़े बांधों जैसे लियांगहेको बांध का निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों का दोहनप र्यावरण और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा रहा है।
  • प्रचार और इतिहास बिगाड़ना: चीन अपने अवैध कब्जे को सही ठहराने के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है और तिब्बत को ‘प्राचीन काल से चीन का हिस्सा’ बताने का झूठा प्रचार करता है।

——————————————-

वांगचुक से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

वांगचुक ने CJP के विदेशी कनेक्शन के आरोप खारिज किए: बोले- 94% फॉलोअर्स भारत से; जांच के लिए तैयार, विदेशी फंडिंग नहीं ली

cover 1790266717424 1790353032532

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़े विदेशी कनेक्शन के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अमेरिका में बड़ी संख्या में समर्थन मिलने की बात कही जा रही थी।

इसके बाद उन्होंने CJP के सोशल मीडिया फॉलोअर्स के डेटा का विश्लेषण किया। उनके मुताबिक, करीब 94% फॉलोअर्स भारत से थे, जबकि सिर्फ 6% दूसरे देशों से थे। पढ़ें पूरी खबर…



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments