- Hindi News
- National
- Dharmendra Pradhan Resignation News | NEET Paper Leak Controversy Update
नई दिल्ली14 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच 24 जुलाई को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बातचीत हुई थी। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 25 जुलाई को हुआ। यह फैसला नीट पेपर लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते दबाव के बाद लिया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफा देने से पहले केंद्र सरकार ने एक समझौता करने की कोशिश की थी। सरकार ने प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय में रखने का प्रस्ताव दिया था।
सीजेपी ने इस्तीफे की मांग पर अड़े रहने का फैसला किया
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क किया था। सीजेपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही थी। सरकार ने उनसे पूछा था कि क्या धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलना उन्हें स्वीकार होगा। हालांकि, प्रदर्शनकारी नेताओं ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि प्रधान का पूरी तरह इस्तीफा देना ही एकमात्र विकल्प है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के लिए कोई ठोस जरिया नहीं होने के कारण गतिरोध बढ़ गया था। दोनों पक्षों का रुख सख्त हो गया था।
नीट-यूजी 2026 के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
यह आंदोलन नीट-यूजी 2026 परीक्षा से जुड़ी शिकायतों के बाद शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग करने वाले एक बड़े आंदोलन में बदल गया। सीजेपी नेताओं ने इसे केवल एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की व्यवस्था में खामियों के खिलाफ चुनौती बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफे से 48 घंटे पहले भाजपा और सरकार के भीतर चर्चा शुरू हो गई थी। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि बढ़ते जन आक्रोश और संसद में हंगामे के बीच प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना मुश्किल हो गया है।
सोशल मीडिया पर मजबूत रही आंदोलन की पकड़
सरकार ने बैक-चैनल के जरिए संकट को सुलझाने की कोशिश की थी और प्रधान को कैबिनेट से न हटाने का विकल्प दिया था। सीजेपी ने साफ किया कि केवल इस्तीफा ही उनकी मुख्य मांग को पूरा करेगा। यह प्रदर्शन सोशल मीडिया पर मजबूत लामबंदी और पहली बार वोट देने वाले युवाओं व परीक्षार्थियों के बीच अपील के कारण राजनीतिक रूप से चर्चा में रहा।
ओडिशा के वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोलियम और स्टील जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले हैं। करीब पांच हफ्ते के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। प्रधान के हटने के बाद सीजेपी नेताओं ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की और इसे छात्र शक्ति की जीत बताया। प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।




