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नई दिल्ली49 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के तहत मतदाताओं को नोटिस देने का आधार पूछा।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47 लाख नाम हटाए गए हैं। जबकि करीब 33 लाख ऐसे मतदाताओं को नोटिस दिए गए हैं, जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में बने हुए हैं।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने आयोग से यह जांचने को कहा कि कहीं बिना पर्याप्त जांच के तो नोटिस नहीं भेजे जा रहे। नोटिस में वोटर्स को आपत्ति की सही वजह बताई जा रही है या नहीं।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को अब तक उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, बिहार और पश्चिम बंगाल SIR मामलों में दिए अंतरिम निर्देशों का पालन करने को कहा।

याचिका में वोटर्स को दिए गए नोटिस पर सवाल
- नोटिस में नाम पर आपत्ति क्यों- कई वोटर्स को नोटिस तो दिए गए, लेकिन उसमें यह साफ नहीं बताया गया कि उनके नाम पर आपत्ति क्यों है। वोटर्स को रिकॉर्ड में गड़बड़ी की कैटेगरी में किस आधार पर रखा गया है और जवाब देने के लिए उन्हें कौन से दस्तावेज देने होंगे।
- माता-पिता और बच्चों की उम्र के अंतर को आधार कैसे बनाया- याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने उम्र के अंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के अंतर को आधार बनाया गया है, तो मतदाता इसका जवाब कैसे देगा, जबकि जरूरी जानकारी वाले दस्तावेज उसके पास हो भी सकते हैं और नहीं भी।

- नोटिस में वोटर को शिफ्टेड बताया- भूषण ने दावा किया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में मतदाताओं को शिफ्टेड यानी दूसरी जगह चले जाने की कैटेगरी में रखा गया है। ऐसे मतदाता अपना सही स्टेटस कैसे साबित करेंगे।
कोर्ट रूम लाइव:
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना के सवाल और चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डीएस नायडू के जवाब-
- जस्टिस बागची- मतदाताओं को नोटिस किस आधार पर भेजे जा रहे हैं और क्या उन्हें आपत्ति की सही वजह बताई जा रही है।
- चीफ जस्टिस- चुनाव आयोग को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ का मतलब और आधार स्पष्ट करना होगा।
- एडवोकेट नायडू- मतदाताओं की मदद के लिए 14 हजार BLO और 1,200 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तैनात किए गए हैं।
- जस्टिस मोहना- BLO को नोटिस का जवाब देने में मतदाताओं की मदद करनी चाहिए। वार्ड कार्यालयों में भी अधिकारियों की उपलब्धता का सुझाव दिया गया।
- एडवोकेट नायडू- इसके लिए कैंप और वॉट्सएप ग्रुप पहले से चलाए जा रहे हैं।
- जस्टिस बागची- आम आपत्तियों के लिए मानक जवाब तैयार किए जा सकते हैं, ताकि मतदाताओं को स्पष्ट और एक जैसी जानकारी मिल सके।
- एडवोकेट नायडू- हर नोटिस में कारण बताया गया है। मामला याचिकाकर्ताओं के बताए अनुसार इतना गंभीर नहीं है। सत्यापन के लिए बताए गए 12 दस्तावेजों की लिस्ट अंतिम या सीमित सूची नहीं है। प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख 29 अक्टूबर है। अगर जरूरत पड़ी तो समयसीमा बढ़ाई जा सकती है। हम कोर्ट को भरोसा देते हैं कि तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।

दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR का तीसरा फेज
चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है।
पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

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