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दुर्लभ बिल्ली को बचाने के लिए ‘GOAT बैंक’ खुलेंगे: ‘कैरेकल’ को जिंदा जलाने की घटना के बाद अनूठी पहल, जानिए- कैसे फायदा मिलेगा – Jaisalmer News


अगर कैरेकल किसी की बकरी का शिकार करेगा, तो विभाग मुआवजे में बकरी बैंक से बकरी देगा।

जैसलमेर में दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल कैट (सियागोश) को बचाने के लिए वन विभाग प्रदेश का पहला ‘गोट बैंक’ (बकरी बैंक) शुरू करने जा रहा है। यह कदम मार्च 2026 में हुई उस दिल दहला देने वाली घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी 50 बकरियों के शिकार

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वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के साथ मिलकर तैयार इस प्रोजेक्ट का मकसद ‘रिवेंज किलिंग’ (बदले की हत्या) को रोकना है। अब अगर कैरेकल किसी की बकरी का शिकार करेगा, तो विभाग मुआवजे की कागजी कार्रवाई के बजाय सीधे बकरी बैंक से नई बकरी पशुपालक को सौंप देगा।

मार्च में बकरियों के शिकार के शक में ग्रामीणों ने कैरेकल कैट को मारकर जला दिया था।

50 बकरियों के बदले जला दी कैरेकल मार्च 2026 में जैसलमेर के सरहदी इलाके में एक जला हुआ कैरेकल मिला था। ग्रामीणों ने वीडियो भी वायरल किया था। पूछताछ में सामने आया कि कैरेकल ने ग्रामीणों की करीब 50 बकरियां मार दी थीं। गुस्से में ग्रामीणों ने पैरों के निशान का पीछा किया और कैरेकल को घेरकर मार डाला। भारत में अब महज 50 कैरेकल बचे हैं, जिनमें से जैसलमेर में सिर्फ 4 के कुनबे की पुष्टि हुई है।

कैरेकल को मारकर जलाने के आरोप में वन विभाग ने 2 आरोपियों को पकड़ा था। उनपर वन संरक्षण अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज किया गया था।

कैरेकल को मारकर जलाने के आरोप में वन विभाग ने 2 आरोपियों को पकड़ा था। उनपर वन संरक्षण अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज किया गया था।

कैसे काम करेगा ‘गोट बैंक’

6 महीने का सर्वे : WTI की टीम मई के अंत में जैसलमेर आएगी। अगले 6 महीने उन इलाकों की मैपिंग होगी, जहां कैरेकल और इंसान आमने-सामने हैं।

25 बकरियों का स्टॉक : शुरुआत में एक बैंक में 25 बकरियां रखी जाएंगी।

तुरंत भरपाई : शिकार की पुष्टि होते ही विभाग उसी उम्र और स्वास्थ्य की बकरी पशुपालक को दे देगा।

सस्टेनेबल मॉडल : भविष्य में नियम बन सकता है कि बैंक से मदद पाने वाले ग्रामीण को अपनी बकरी का एक बच्चा बैंक में दान करना होगा, ताकि स्टॉक बना रहे।

कैरेकल के संरक्षण के लिए सवाई माधोपुर में भी रिसर्च सेंटर की शुरुआत करने की योजना है।

कैरेकल के संरक्षण के लिए सवाई माधोपुर में भी रिसर्च सेंटर की शुरुआत करने की योजना है।

क्यों जरूरी है यह पहल?

जैसलमेर के DFO शुभम कुमार कहते हैं- हमारा टारगेट इंसानों और कैरेकल के बीच के संघर्ष को कम से कम करना है। सरहदी इलाकों में इनकी मौजूदगी हमारे इकोसिस्टम के लिए गर्व की बात है। हम चाहते हैं कि ग्रामीण इन्हें दुश्मन न समझें। कैरेकल एक शर्मीला लेकिन बेहद फुर्तीला शिकारी है। जब किसी गरीब पशुपालक का मवेशी मरता है, तो उसे आर्थिक चोट लगती है। इसी कड़वाहट को खत्म करने के लिए ‘बकरी बैंक’ का विचार आया है। जब ग्रामीण को पता होगा कि नुकसान की भरपाई तुरंत होगी, तो वह वन्यजीव पर हमला नहीं करेगा।

कैरेकल विलुप्त होने की कगार पर है। इसलिए इनके संरक्षण के लिए वन विभाग प्रयास कर रहा है।

कैरेकल विलुप्त होने की कगार पर है। इसलिए इनके संरक्षण के लिए वन विभाग प्रयास कर रहा है।

कैरेकल…कानों पर काले बालों के गुच्छे देते हैं अलग पहचान

आबादी : पूरे भारत में मात्र 50।

खासियत : ऊंची छलांग लगाने और पक्षियों को हवा में पकड़ने में माहिर।

संरक्षण : सवाई माधोपुर में भी इनके लिए रिसर्च सेंटर बनाने की योजना है। जैसलमेर का बॉर्डर इलाका इनका सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है।

अब तक की कार्रवाई : वन विभाग ने मार्च की घटना में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जेल भेजा है। विभाग का लक्ष्य अब डर नहीं, बल्कि सहानुभूति के जरिए संरक्षण करना है।

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बॉर्डर इलाके में कैरेकल कैट की अच्छी संख्या

DFO शुभम कुमार कहते हैं- फील्ड सर्वे से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित सरहदी इलाकों में कैरेकल कैट की अच्छी मौजूदगी है। अब केंद्र और राज्य सरकार इनके संरक्षण पर खास ध्यान दे रही हैं। कैरेकल उन जीवों में शामिल है, जो लुप्त होने की कगार पर हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षा अब वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।

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2- 11 फीट ऊंची छलांग लगाने वाली दुर्लभ बिल्ली के खुलेंगे रहस्य:राजस्थान के 4 टाइगर रिजर्व में ‘कैरेकल’ पर होगा रिसर्च, सही संख्या पता चलेगी

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