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- Rijinagar Bypoll | TMC Candidate Rabiul Alam Chowdhury Withdraws Nomination
5 मिनट पहले
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रबीउल आलम चौधरी रेजीनगर सीट से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट के उम्मीदवार थे।
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने इसकी मुख्य वजह TMC का पुराना चुनाव चिह्न ट्विन फ्लावर्स यानी जोड़ा घास फूल नहीं मिलना बताया है।
रबीउल आलम ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं को प्रचार करने की इजाजत नहीं मिल रही थी और दबाव बनाया जा रहा था। रबीउल ने यह भी कहा कि नया चुनाव चिन्ह मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए समय कम था।
इससे एक दिन पहले शुक्रवार को नंदीग्राम में भी ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था।
हालांकि, इसके कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जबकि रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई।

कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान हुए एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में उनके खिलाफ पहले से वारंट भी जारी हुआ था।
TMC के दोनों गुटों का नया नाम-सिंबल, ममता सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं
ममता बनर्जी ने TMC का नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने शुक्रवार को अपनी याचिका में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को पक्षकार बनाया है।
इससे एक दिन पहले 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों TMC गुटों को मूल नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोकते हुए अलग-अलग नाम और सिंबल दिए थे। अब दोनों गुट उपचुनाव में नई पार्टी नाम और सिंबल से चुनाव लड़ेंगे।
ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ सिंबल मिला, जबकि अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल आवंटित किया गया।
नाम वापसी और उम्मीदवार की गिरफ्तारी के बाद आगे क्या…10 सवाल-जवाब में समझें…
सवाल: उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद अगला कदम क्या होगा?
जवाब: नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी करेगा।
सवाल: क्या नाम वापस लेने वाला उम्मीदवार अपना फैसला बदल सकता है?
जवाब: नहीं। एक बार नाम वापसी वैध तरीके से हो जाने के बाद उसे वापस लेकर फिर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होती।
सवाल: अगर एक सीट पर कई उम्मीदवार मैदान में बचे हैं तो क्या होगा?
जवाब: सभी बचे हुए उम्मीदवारों के नाम अंतिम सूची में शामिल होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार मतदान होगा।
सवाल: अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है तो क्या होगा?
जवाब: ऐसी स्थिति में चुनाव निर्विरोध हो सकता है। रिटर्निंग ऑफिसर प्रक्रिया पूरी कर उस उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित करता है।
सवाल: क्या नाम वापसी के बाद नया उम्मीदवार खड़ा किया जा सकता है?
जवाब: नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद नए उम्मीदवार को उसी चुनाव में नामांकन दाखिल करने का मौका नहीं मिलता।

ममता बनर्जी की महिला कैंडिडेट संचिता प्रधान डे शुक्रवार को रिटर्निंग ऑफिसर को नामांकन वापसी का लेटर सौंपती हुई।
सवाल: कैंडिडेट के नाम वापसी के बाद ममता बनर्जी अब क्या करेंगी?
जवाब: नंदीग्राम में संचिता डे के नाम वापस लेते ही ममता ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। रेजीनगर को लेकर TMC ने अभी अपना अगला कदम नहीं बताया है।
सवाल: नंदीग्राम सीट पर ममता और कांग्रेस साथ हैं, तो क्या भाजपा के वोट शेयर गिरेंगे?
जवाब: 4 मई को आए विधानसभा चुनाव रिजल्ट में यहां से शुभेंदु को जीत मिली थी। तब भाजपा को 50.37% वोट मिले थे। वहीं टीएमसी के खाते में 46.55% वोट आए थे, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 0.31% वोट मिले थे।
अब इस लिहाज से उपचुनाव परिणाम का अनुमान लगाएं तो ममता और कांग्रेस के साथ आने पर भी दोनों पार्टियां मिलाकर भाजपा से ज्यादा वोट शेयर नहीं ला सकतीं। हालांकि ये सिर्फ अनुमान है।
सवाल: कांग्रेस उम्मीदवार के गिरफ्तार होने से क्या चुनाव रद्द हो जाएगा?
जवाब: नहीं। केवल गिरफ्तारी होने से चुनाव रद्द नहीं होता। चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रह सकता है।
सवाल: क्या गिरफ्तार उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है?
जवाब: हां, अगर वह कानूनी रूप से चुनाव लड़ने के लिए योग्य है। केवल किसी केस में गिरफ्तार होना अपने-आप में चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं बनाता।
सवाल: फिर उम्मीदवार की गिरफ्तारी का चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: वह प्रचार, जनसभाओं और मतदाताओं से सीधे संपर्क में शामिल नहीं हो पाएगा। हालांकि, उसका नाम अंतिम उम्मीदवारों की सूची में रह सकता है।

नंदीग्राम TMC और भाजपा, दोनों के लिए अहम सीट
नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
2021 में ममता ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। अधिकारी BJP में शामिल होने के बाद TMC के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले।
बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई।
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बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से 18 दिन पहले चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…




