1 घंटे पहले
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अगर आपका नाम SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो आप फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं। मंगलवार को चुनाव आयोग ने कहा चाहे आप 10 साल से वोटर रहे हों, फिर भी फॉर्म-6 ही भरना होगा। इसको झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा, न ही कोई केस होगा।
यह फैसला उनके लिए मददगार होगा, जिनका नाम SIR के दौरान काट दिया गया। दरअसल, फॉर्म 6 में लिखना पड़ता है कि “मेरा नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है”।
कानूनी पेंच की वजह से फॉर्म-6 पर सेक्शन 31 के तहत लिखा होता है – गलत जानकारी दी तो 1 साल तक की सजा। लोग सोच रहे थे – हम तो पुराने वोटर हैं, पहली बार वाला कॉलम टिक करेंगे तो केस हो जाएगा। इस डर से लाखों लोग फॉर्म नहीं भर रहे थे। चुनाव आयोग ने कहा कि ये डर निकाल दीजिए, हम इसे फॉल्स डिक्लरेशन नहीं मानेंगे।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में 2025-26 में बिहार, दिल्ली समेत 30 राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए। दिल्ली में ही 1.45 करोड़ में से 47 लाख नाम हट गए।

अब क्या करना होगा…
- voters.eci.gov.in पर EPIC नंबर से नाम चेक करें
- अगर नहीं है तो फॉर्म 6 भरें + डिक्लेरेशन + डॉक्यूमेंट
- 1987 से पहले जन्म: खुद का 1 डॉक्यूमेंट
- 1987-2004 जन्म: खुद का + माता/पिता का 1 डॉक्यूमेंट
- 2004 के बाद जन्म: खुद का + माता-पिता दोनों का डॉक्यूमेंट
- BLO घर-घर जाकर भी फॉर्म 6 भरवा रहे हैं
क्यों डर रहे थे पहले से रजिस्टर्ड वोटर
चुनाव आयोग ने माना कि कई लोगों को डर था कि फॉर्म 6 में लिखना पड़ता है कि “मेरा नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है”। ऐसे में पहले से रजिस्टर वोटर को लगता था कि ये झूठा शपथ पत्र होगा और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत उन पर झूठा बयान देने का केस चल सकता है। इसी वजह से लोग फॉर्म 6 भरने से हिचक रहे थे।
फॉर्म-6 से 2003 वाला सवाल हटा चुका आयोग
चुनाव आयोग ने SIR प्रकिया कम्पलीट हो चुके राज्यों के लिए भी फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव कर चुका है। अक्टूरबर में हुए इस बदलाव के बाद SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी। आवेदक को यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि उसका, माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस लिस्ट में था या नहीं। फॉर्म-6 से इससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया। पढ़ें पूरी खबर…
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