अब निजी क्षेत्र के बड़े बैंक सिर्फ ग्राहकों की संख्या और मुनाफे की होड़ तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि एक-दूसरे के कारोबार और पूंजी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया फैसले इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं।
आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक को अन्य बैंकों में हिस्सा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। एचडीएफसी बैंक को अपने समूह की अन्य कंपनियों के साथ आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में कुल 9.95 फीसदी तक हिस्सेदारी रखने की अनुमति मिली है। एचडीएफसी बैंक समूह में एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी एर्गो, एचडीएफसी पेंशन फंड और एचडीएफसी सिक्योरिटीज जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसी तरह कोटक महिंद्रा बैंक अब एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और फेडरल बैंक में 9.99 फीसदी तक हिस्सेदारी रख सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि ये बैंक दूसरे बैंकों का अधिग्रहण करने जा रहे हैं। यह एक वित्तीय या रणनीतिक निवेश की तरह है। मजबूत बैंकिंग समूह अपने ही सेक्टर की अच्छी कंपनियों में लंबी अवधि के अवसर देख रहे हैं। इससे कमजोर बैंकों को सहारा मिल सकता है। बोनस डेस्क
बाजार पर क्या असर पड़ेगा: बैंकिंग शेयरों के लिए अब माहौल सकारात्मक हो सकता है। बैंकिंग क्षेत्र कुछ समय से जमा वृद्धि, मार्जिन दबाव और मूल्यांकन की चिंता से जूझ रहा था। ऐसे में बड़े बैंकिंग समूहों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी बाजार को यह संकेत देती है कि सेक्टर में लंबी अवधि की वैल्यू अभी बची हुई है। हालांकि, असर ज्यादा उन्हीं बैंकों पर दिखेगा जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है और संपत्ति की गुणवत्ता बेहतर है। बैंकिंग सेक्टर के लिए यह भरोसे की खबर है।
ईसीएल प्रावधान नियमों से बैंकों पर दबाव नही: फिच
नई दिल्ली। वैश्विक रेटिंग फिच रेटिंग्स ने कहा है कि भारतीय बैंक आरबीआई के नए अनुमानित क्रेडिट लॉस (ईसीएल) प्रावधान ढांचे को लागू करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। इससे बैंकिंग क्षेत्र पर बड़े दबाव की आशंका नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बैलेंस शीट मजबूत की है, प्रावधान कवरेज बढ़ाया है और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार किया है। ऐसे में एक अप्रैल 2027 से लागू होने वाले ईसीएल ढांचे का असर सीमित रहने की संभावना है।
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