Homeट्रैवलनैनीताल के पास छिपा अनोखा खजाना, 3 KM ट्रेक के बाद मिलेगा...

नैनीताल के पास छिपा अनोखा खजाना, 3 KM ट्रेक के बाद मिलेगा पहाड़ों का शानदार नजारा, जानें


Last Updated:

Brahmasthali Temple Nainital: नैनीताल घूमने वाले ज्यादातर लोग नैनी झील और माल रोड तक ही सीमित रह जाते हैं, लेकिन शहर से कुछ दूर पहाड़ों के बीच एक ऐसी जगह भी है जहां पहुंचने के लिए करीब 3 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है. घने बांज और देवदार के जंगलों के बीच स्थित ब्रह्मस्थली मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, शांत माहौल और पहाड़ों के खूबसूरत नजारों के लिए खास है. चोटी तक पहुंचने के बाद आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का शानदार दृश्य देखने को मिलता है. मानसून में यहां की हरियाली और धुंध इसकी खूबसूरती और बढ़ा देती है.

नैनीताल अपनी खूबसूरत नैनी झील, माल रोड और खूबसूरत पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां कई ऐसे स्थान भी हैं जो आज भी पर्यटकों की नजरों से दूर हैं. इन्हीं में से एक है ब्रह्मस्थली मंदिर. ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह धार्मिक स्थल शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए खास है. यहां पहुंचते ही जंगलों की हरियाली, ठंडी हवा और पहाड़ों का सुकून मन को अलग एहसास कराता है. अगर आप नैनीताल की भीड़भाड़ से दूर प्रकृति और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो ब्रह्मस्थली आपके लिए एक खास जगह हो सकती है.

नैनीताल शहर से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ब्रह्मस्थली मंदिर भगवान ब्रह्मा को समर्पित बताया जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर करीब 13वीं शताब्दी का है. मान्यता है कि इस स्थान पर गर्ग ऋषि ने तपस्या की थी और उन्हीं के द्वारा यहां भगवान ब्रह्मा की स्थापना की गई. सदियों पुराना यह धार्मिक स्थल आज भी आसपास के ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है. मंदिर की प्राचीन मान्यताएं और पहाड़ी वातावरण इसे नैनीताल के दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग बनाते हैं.

ब्रह्मस्थली मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है. विनायक-कुंजाखरक मार्ग के बीच से शुरू होने वाला यह ट्रेक घने जंगलों के बीच से होकर पहाड़ी की चोटी तक जाता है. रास्ते में खड़ी चढ़ाई ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए रोमांच बढ़ा देती है. देवदार और बांज के पेड़ों से घिरा रास्ता सफर को और खूबसूरत बनाता है. जैसे-जैसे ट्रेकर ऊंचाई की ओर बढ़ता है, आसपास का नजारा बदलता जाता है. हालांकि रास्ता चुनौतीपूर्ण है, लेकिन चोटी तक पहुंचने के बाद दिल को सुकून मिलता है

Add News18 as
Preferred Source on Google

ब्रह्मस्थली मंदिर समुद्र तल से करीब 3300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बताया जाता है. पहाड़ी की चोटी पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के बाद चारों तरफ पहाड़ों और जंगलों का शानदार दृश्य दिखाई देता है. यहां का वातावरण बेहद शांत रहता है और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताने का मौका मिलता है. मंदिर के पास माधव मुनि की कुटिया भी स्थित है. धार्मिक आस्था के साथ यह स्थान अपनी ऊंचाई और प्राकृतिक वातावरण के कारण भी खास माना जाता है. साफ मौसम में यहां से दूर-दूर तक फैली पहाड़ी श्रृंखलाओं को देखने का अवसर मिलता है.

ब्रह्मस्थली मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. इनमें से एक मान्यता गाय और भैंस के बछड़े को जन्म देने से जुड़ी है. स्थानीय लोगों के अनुसार आसपास के गांवों में जब किसी गाय या भैंस के बछड़ा होता है, तो उसका पहला दूध मंदिर परिसर में बने कुंड में चढ़ाया जाता है. इसे भगवान ब्रह्मा के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है. पंगोट, घुघुखाम, बेतालघाट समेत आसपास के कई गांवों के ग्रामीण इस मंदिर से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

ब्रह्मस्थली तक जाने वाला रास्ता प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास अनुभव देता है. विनायक-कुंजाखरक मार्ग से आगे बढ़ने पर घने जंगलों के बीच पैदल रास्ता शुरू होता है. बांज और देवदार के पेड़ों के बीच से गुजरते हुए ट्रेकर्स धीरे-धीरे पहाड़ी की ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं. मानसून के दौरान यह पूरा इलाका हरियाली से ढक जाता है. बारिश के बाद पहाड़ियों पर छाई धुंध और बादलों का खेल इस जगह को बेहद खूबसूरत बना देता है. जंगलों के बीच शांत वातावरण और पक्षियों की आवाजें ट्रेकिंग के अनुभव को और यादगार बनाती हैं.

ब्रह्मस्थली की चोटी पर पहुंचने के बाद आसपास का विस्तृत नजारा दिखाई देता है. यहां से नैनीताल, पंगोट, घुघुखाम, कोटाबाग और बेतालघाट की पहाड़ियां देखी जा सकती हैं. साफ मौसम में अल्मोड़ा और रानीखेत की दिशा के साथ दूर तक फैली हिमालय की पर्वत श्रृंखलाएं भी दिखाई देने की बात कही जाती है. यही खूबसूरत नजारे ट्रेक की सारी थकान मिटा देते हैं. पहाड़ी की चोटी से दिखाई देने वाला प्राकृतिक दृश्य फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.

मानसून के दौरान ब्रह्मस्थली की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है. बारिश के बाद जंगलों का हरा रंग और गहरा नजर आता है, जबकि पहाड़ियों पर छाई धुंध पूरे वातावरण को आकर्षक बना देती है. कई बार बादल पहाड़ी की चोटियों के आसपास मंडराते दिखाई देते हैं. ऐसे मौसम में ब्रह्मस्थली का ट्रेक किसी रोमांचक सफर से कम नहीं लगता. हालांकि बारिश के दौरान रास्ता फिसलन भरा हो सकता है, इसलिए ट्रेक करते समय सावधानी बेहद जरूरी है. मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करना और उचित जूते व जरूरी सामान साथ रखना बेहतर रहेगा.

स्थानीय ट्रेकर मनोज के अनुसार ब्रह्मस्थली का ट्रेक बेहद शानदार है और वह अक्सर यहां आते हैं. उनके मुताबिक पहाड़ी की चोटी से दिखाई देने वाले नजारे दिल को छू जाते हैं. आसपास का क्षेत्र कैंपिंग के लिए भी आकर्षक बताया जाता है. रात के समय मौसम साफ हो तो आसपास के पहाड़ी इलाकों की रोशनी और आसमान का दृश्य अलग अनुभव देता है. प्रकृति के करीब समय बिताने और शांत माहौल का आनंद लेने वाले लोगों के लिए यह जगह खास हो सकती है. हालांकि कैंपिंग से पहले स्थानीय नियमों और सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर लेनी चाहिए.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments