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नैनीताल में स्थित है एशिया का सबसे मुश्किल गोल्फ कोर्स, ऐसा क्या है खास?


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Nainital News: नैनीताल स्थित ऐतिहासिक राजभवन, जिसे अब लोकभवन के नाम से जाना जाता है, अपने भीतर एक ऐसा गोल्फ कोर्स समेटे हुए है, जिसे देखकर पर्यटक भी हैरान रह जाते हैं और खिलाड़ी इसे खेलना किसी बड़े रोमांच से कम नहीं मानते. आइए इस गोल्स फोर्स के बारे में सबकुछ जानते हैं.

नैनीताल: उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसा नैनीताल अपनी झीलों, पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही शहर एशिया के सबसे चुनौतीपूर्ण गोल्फ कोर्स का भी घर है. नैनीताल स्थित ऐतिहासिक राजभवन, जिसे अब लोकभवन के नाम से जाना जाता है, अपने भीतर एक ऐसा गोल्फ कोर्स समेटे हुए है, जिसे देखकर पर्यटक भी हैरान रह जाते हैं और खिलाड़ी इसे खेलना किसी बड़े रोमांच से कम नहीं मानते.

करीब 45 एकड़ में फैला यह 18-होल गोल्फ कोर्स अपनी अनोखी बनावट और कठिन ट्रैक के कारण खास पहचान रखता है. पहाड़ों की ढलानों पर बने इस गोल्फ कोर्स की सबसे बड़ी खासियत इसकी सीढ़ीनुमा संरचना और घने देवदार व बांज के जंगल हैं. यहां खेलते समय खिलाड़ियों को कई बार सीधे होल दिखाई तक नहीं देते, क्योंकि कई होल पेड़ों और पहाड़ी ढलानों के पीछे छिपे रहते हैं. ऐसे में हर शॉट बेहद सोच-समझकर और सटीक लगाना पड़ता है. यही वजह है कि अनुभवी गोल्फर भी इस कोर्स को बेहद चुनौतीपूर्ण मानते हैं.

अंग्रेजों का बनाया गोल्फ कोर्स है बेहद खास
नैनीताल के इस गोल्फ कोर्स में खेलना सिर्फ तकनीक का ही नहीं, बल्कि फिटनेस का भी बड़ा टेस्ट माना जाता है. पूरे कोर्स के दौरान खिलाड़ियों को करीब 4 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है. लगातार चढ़ाई और उतराई होने के कारण यहां खेलना मैदानों में बने सामान्य गोल्फ कोर्स की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है. यही कारण है कि यह कोर्स खिलाड़ियों के बीच खास पहचान रखता है. ब्रिटिश काल में साल 1926 में बने इस ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स का इतिहास भी काफी दिलचस्प है. अंग्रेजों के समय तैयार किए गए इस गोल्फ ग्राउंड को आज भी बेहद अच्छी तरह से संरक्षित रखा गया है. लोकभवन आने वाले पर्यटक यहां की हरियाली, शांत वातावरण और पहाड़ों के बीच बसे इस खूबसूरत गोल्फ कोर्स को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.

पहाड़ों के बीच 42 एकड़ में बना गोल्फ कोर्स
लोकभवन गोल्फ कोर्स के ओरनरी गोल्फ कैप्टन कर्नल (सेनि.) विवेक भट्ट बताते हैं कि पहाड़ों में गोल्फ कोर्स होना अपने आप में बहुत बड़ा आश्चर्य है. गोल्फ कोर्स तैयार करने के लिए 40 से 50 एकड़ समतल जमीन की जरूरत होती है, लेकिन नैनीताल में पहाड़ों के बीच यह कोर्स अंग्रेजों के समय से करीब 42 एकड़ में मौजूद है. उन्होंने बताया कि यहां कुल 18 होल बनाए गए हैं और हर साल आयोजित होने वाले गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट के दौरान इन्हें 9 होल में बदल दिया जाता है.

साल में दो बार गोल्फ का प्रशिक्षण
उन्होंने बताया कि इस गोल्फ कोर्स को सिर्फ प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि बच्चों को भी गोल्फ सिखाने का काम किया जा रहा है. राज्यपाल के निर्देश पर नैनीताल के पब्लिक और सरकारी स्कूलों के बच्चों को साल में दो बार गोल्फ का प्रशिक्षण दिया जाता है. पिछले चार सालों में 500 से ज्यादा बच्चे यहां गोल्फ सीख चुके हैं. भविष्य में पर्यटकों को भी गोल्फ सिखाने की योजना तैयार की जा रही है.

वहीं नैनीताल पहुंचे कुमाऊं रेजिमेंट के कर्नल अवतार सिंह, जो पिछले 45 वर्षों से गोल्फ खेल रहे हैं, बताते हैं कि यह कोर्स बाकी गोल्फ कोर्सों से बिल्कुल अलग है. पहाड़ी क्षेत्र में बने होने के कारण यहां हर शॉट सोच-समझकर खेलना पड़ता है. उन्होंने कहा कि यहां खेलने के लिए अच्छी फिजिकल फिटनेस बेहद जरूरी है और यही चीज इसे खास बनाती है.

ऐसे करें गोल्फ कोर्स की सैर
अगर आप नैनीताल घूमने जा रहे हैं, तो लोकभवन स्थित इस ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स को जरूर देखना चाहिए. यहां पहुंचने के लिए आप कैब या पैदल लोकभवन तक जा सकते हैं. मात्र 50 रुपये का टिकट लेकर पर्यटक लोकभवन परिसर घूम सकते हैं, जहां गाइड आपको इस शानदार गोल्फ कोर्स की भी सैर कराता है. इसके अलावा यहां समय-समय पर गोल्फ प्रशिक्षण कैंप और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, जिनका हिस्सा बनकर पर्यटक गोल्फ का रोमांचक अनुभव ले सकते हैं.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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