Last Updated:
Crime News: अपराधी जुर्म करते वक्त अक्सर खुद को सुपरपावर समझता है. उसको लगता है कि वह जो कर रहा है, उसके बारे में पुलिस कभी पता लगा पाएगी. हालांकि, ऐसे क्रिमिनल्स अक्सर ऐसे सुराग छोड़ जाते हैं, जिससे वे कानून की गिरफ्त में आ जाते हैं. ऐसे ही दो मामले सामने आए हैं.
20 साल पुरानी हत्या के मामले की जांच में खुला 30 साल पुराना राज. (फाइल फोटो)
Crime News: आपने कई क्राइम थ्रिलर फिल्में देखी होंगी, जिसमें अंत तक यह पता लगा पाना मुश्किल होता है कि असली कातिल कौन है. क्राइम करने वाला कुछ न कुछ ऐसा कर रहा होता है, जिससे उसके बारे में अंदाजा लगाना काफी मुश्किल हो जाता है कि उसने इस तरह की घटना को अंजाम दिया होगा. बॉलीवुड में इस तरह की कई फिल्में बन चुकी हैं. लेकिन आज आपको एक रियल स्टोरी के बारे में बताते हैं. इस कहानी में पत्नी पर बेवफाई का शक और महज एक साड़ी हासिल करने की जिद दो लोगों की हत्या की वजह बन जाती है. एक कांड को दिल्ली में अंजाम दिया गया तो दूसरे को मुंबई में. दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों हत्या की घटनाओं को अंजाम देने वालों के बीच अटूट रिश्ता निकला. रियल टाइम क्राइम थ्रिलर 30 साल पुरानी है. दिल्ली और मुंबई पुलिस की कड़ी मेहनत ने आखिरकार हत्यारोपी भाइयों को अंजाम पहुंचाया. एक मामले में पत्नी ने ही पति की सुपारी दे डाली. पुलिस की सालों की छानबीन के बाद आरोपी भाइयों में से एक को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद तो दूसरे को झारखंड के गोड्डा से गिरफ्तार किया गया.
दिल्ली और मुंबई पुलिस ने लगभग 30 वर्षों से कानून से बचते आ रहे दो सगे भाइयों को गिरफ्तार कर एक सनसनीखेज अपराध की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है. इसकी कड़ियां दो शहरों और दो अलग-अलग हत्या के मामलों से जुड़ी हैं. आरोपियों फिरासत अली और शाहनवाज को हाल ही में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया. दोनों भाई 1996 में दिल्ली में कपड़ा व्यापारी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जा चुके थे, लेकिन जमानत मिलने के बाद फरार हो गए थे. बाद में जांच में उनका नाम 2006 में मुंबई में हुए एक सनसनीखेज हत्या और शव के टुकड़े-टुकड़े कर ठिकाने लगाने के मामले में भी सामने आया.
14 मई 2006 और मुंबई का भिंडी बाजार
मामले की शुरुआत 14 मई 2006 को मुंबई के भिंडी बाजार स्थित मटन मार्केट से हुई थी. सुबह एक फेरीवाले को अपने ठेले पर एक प्लास्टिक बैग मिला, जिसके भीतर सिर और हाथ-पैर से अलग किया गया मानव शरीर था. शव की पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया, क्योंकि शरीर के बाकी हिस्से गायब थे. DNA जांच और लापता लोगों के रिकॉर्ड खंगालने के बावजूद पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला और मामला वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा.
पत्नी ने दी पति की सुपारी
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक दशक बाद एक मुखबिर की सूचना ने मामले को नई दिशा दी. जांच में पता चला कि मृतक की पहचान किशन खारवा के रूप में हुई. पुलिस ने उनकी पत्नी बंसीबेन से पूछताछ की तो कथित रूप से यह खुलासा हुआ कि उसने पति की हत्या के लिए दो लाख रुपये की सुपारी दी थी. पुलिस के अनुसार, किशन शराब का आदी था और पत्नी के साथ मारपीट तथा दुर्व्यवहार करता था. आरोप है कि फिरासत अली और उसके साथी ने किशन की हत्या कर शव के कई टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया.
30 साल पुराना मामला आया सामने
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि फिरासत अली पहले से ही दिल्ली के एक पुराने हत्या के मामले में दोषी था. यह मामला 27 सितंबर 1996 का है, जब पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर में पुराने कपड़ों के कारोबार को लेकर हुए विवाद के बाद कपड़ा व्यापारी इश्तियाक अहमद की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस के अनुसार, साड़ी खरीदने को लेकर हुए विवाद के बाद शाहनवाज ने धमकी दी थी और कुछ घंटे बाद अपने भाई फिरासत तथा अन्य साथियों के साथ इश्तियाक के कमरे में पहुंचकर हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल इश्तियाक की अस्पताल में मौत हो गई थी. इस मामले में अदालत ने फिरासत और शाहनवाज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. हालांकि वर्ष 2000 में अपील लंबित रहने के दौरान दोनों को जमानत मिल गई और वे फरार हो गए. वर्ष 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी, लेकिन दोनों ने आत्मसमर्पण नहीं किया.
मुरादाबाद और गोड्डा से गिरफ्तारी
मुंबई हत्या मामले में गिरफ्तारी के बाद भी फिरासत को 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह फिर फरार हो गया. हाल ही में दिल्ली पुलिस की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल को दोनों भाइयों के ठिकानों की सूचना मिली. इसके बाद दो अलग-अलग टीमें बनाकर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और झारखंड के गोड्डा में एक साथ छापेमारी की गई, ताकि कोई आरोपी दूसरे को सतर्क न कर सके. दोनों को उनके ठिकानों से गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक फरारी के दौरान दोनों भाई सामान्य जीवन जीते हुए पुराने कपड़ों के कारोबार का विस्तार करते रहे. फिरासत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से माल की आपूर्ति संभालता था, जबकि शाहनवाज झारखंड और महाराष्ट्र में कारोबार देखता था. दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं. दिल्ली पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की सूचना मुंबई पुलिस को भी दे दी है, जिससे 2006 के हत्या मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है.
About the Author

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
और पढ़ें



