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‘पापा, मैं बहुत परेशान हूं…’ आखिरी कॉल के कुछ घंटों बाद बेटे की मौत, पिता का दावा- ‘जज बहू और IAS साली ने उसे जीने नहीं दिया’


Judicial Officer Aman Suspicious Death Case: एक पिता की जिंदगी में सबसे बड़ा सहारा उसका बेटा होता है. वह बेटा, जिसके जन्म पर मिठाई बांटी जाती है, जिसके स्कूल के पहले दिन पर आंखें भर आती हैं, जिसकी नौकरी लगने पर पूरा परिवार गर्व महसूस करता है. लेकिन जब वही बेटा अपनी जिंदगी की सबसे मुश्किल घड़ी में अपने पिता को फोन करके कहे, ‘पापा, मुझे बचा लो…’, और कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो जाए, तो उस पिता के भीतर क्या बचता होगा? कुछ ऐसा ही हाल दिल्‍ली के ग्रीनपार्क इलाके में रहने वाले पिता प्रेम कुमार शर्मा का है.

प्रेम कुमार शर्मा बताते हैं कि उन्‍होंने अपने बेटे अमन को पढ़ा-लिखा कर एक सम्‍मानित पद तक पहुंचाया. वह कड़कड़डूमा कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी में सेक्रेटरी के पद पर था. आमतौर पर यह पद एक सीनियर सिविल जज या न्यायिक मजिस्ट्रेट रैंक के न्‍यायिक अधिकारी द्वारा संभाला जाता है. लेकिन, लेकिन 2 मई 2026 को सब कुछ खत्म हो गया. अमन अब इस दुनिया में नहीं है. पिता का सीधा आरोप है कि उसकी जज पत्‍नी और उसकी आईएएस साली ने उसे जीने नहीं दिया.

पिता प्रेम कुमार शर्मा का आरोप है कि चूंकि मामला चुन्‍नी से लटकर मौत का था और शव का पोस्‍टमार्टम होना था, लिहाजा दिल्‍ली के सफदरजंग पुलिस स्‍टेशन ने एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन अभी तक कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात वाली स्थिति बनी हुई है. चूंकि, बहू और उसके परिवार वाले रसूकदार हैं, लिहाजा उन्‍हें न्‍याय के लिए दर-दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

आखिरी फोन कॉल ने पिता को डरा दिया था

59 वर्षीय प्रेम कुमार शर्मा पेशे से वकील हैं. उन्होंने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनका बड़ा बेटा अमन कुमार शर्मा दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में डीएलएसए में सचिव के पद पर कार्यरत था. 1 मई 2026 को अमन का फोन आया. फोन पर उसकी आवाज सामान्य नहीं थी. वह बेहद परेशान और टूटा हुआ लग रहा था. अमन ने कहा कि वह पिछले करीब डेढ़ महीने से मानसिक रूप से परेशान है. उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी, साली और ससुराल पक्ष के अन्य लोग उसे लगातार तनाव दे रहे हैं.

अमन ने अपने पिता से कहा कि उसे बच्चों से भी ठीक से बात नहीं करने दी जाती और उसकी जिंदगी मुश्किल हो चुकी है. पिता का आरोप है कि बातचीत के दौरान बेटे ने बेहद निराशा था. उसने कहा कि उसके पास अब मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. यह सुनकर प्रेम कुमार शर्मा घबरा गए. उन्होंने बेटे को ढांढस बंधाया और तुरंत उसके पास पहुंचने का फैसला किया. उसी रात करीब 12 बजे प्रेम कुमार शर्मा बेटे के घर ग्रीन पार्क पहुंच गए. उन्हें लग रहा था कि परिवार के बीच बातचीत से शायद हालात सुधर जाएं. उस रात वह अपने बेटे के साथ ही सोए. उन्हें उम्मीद थी कि सुबह सबको बैठाकर बातचीत करेंगे.

बात सुलझने की जगह और उलझ गई…

2 मई की सुबह प्रेम कुमार शर्मा ने बेटे और बहू को साथ बैठाकर समझाने की कोशिश की. उनका कहना है कि वह परिवार को टूटने से बचाना चाहते थे. बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया. उन्होंने आरोप लगाया कि बहू का व्यवहार उनके प्रति बेहद आपत्तिजनक था और उनसे घर छोड़कर जाने को कहा गया. उन्‍हें धमकी दी गई कि वह वहां से तुरंत चले जाए. उनसके कहा गया कि जज बहू ने धमकी देते हुए कहा कि वह उनकी ताकत को नहीं जानते है. वह पुलिस बुलाकर उन्हें अरेस्‍ट करा देगी.

स्थिति बिगड़ती देख प्रेम कुमार शर्मा ने रिश्तेदारों से मदद लेने की कोशिश की. उन्होंने अपनी बहू के परिवार से जुड़े युधवीर मलिक को फोन कर घर बुलाया ताकि वह दोनों पक्षों को समझा सकें. कुछ देर बाद युधवीर घर पहुंचे, लेकिन मामला सुलझने के बजाय और उलझता चला गया. प्रेम कुमार शर्मा का आरोप है कि जब युधवीर घर पहुंचे तो इसकी सूचना दूसरे पक्ष को दी गई. इसके बाद उन्हें दूसरे स्थान पर बुला लिया गया. उन्होंने कई लोगों को फोन कर बातचीत की कोशिश की, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. वह खुद भी मिलने गए, तो उन्हें अपमानित करके वापस भेज दिया गया.

आखिरकार बेटे की चली गई जान

प्रेम कुमार शर्मा ने अपने बयान में कहा कि दोपहर के समय वह घर के पिछले कमरे में बैठे थे जबकि अमन और उसकी पत्नी दूसरे कमरे में थे. उन्हें दूसरे कमरे से तेज आवाजें सुनाई दे रही थीं. आरोप है कि अमन को डांटा जा रहा था और वह रो रहा था. एक पिता के लिए अपने बेटे के रोने की आवाज सुनना बेहद पीड़ादायक था. प्रेम कुमार शर्मा का आरोप है कि वह पीछे बैठे सब सुन रहे थे, लेकिन स्थिति को संभालने का कोई रास्ता नहीं निकाल पा रहे थे.

करीब 12:30 बजे के आसपास जब उन्होंने अमन के बारे में पूछा तो उनसे कहा गया कि नहीं पता वह कहां गया है. पिता को यह बात अजीब लगी. उन्होंने बेटे को फोन किया. फोन की घंटी घर के बाथरूम से सुनाई दी.
उन्होंने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्‍होंने बाथरूम का दरवाजा खोलने की कोशिश की तो पाया कि गेट लॉक है. उन्होंने बाथरूम की चाबी मांगी, लेकिन उन्हें नहीं दी गई. उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की. कुछ ही देर बाद उनकी बहू अपने मायकेवालों के साथ वहां से चली गई.

पिता की उजड़ गई पूरी दुनिया

आखिरकार नीचे रहने वाले एक कर्मचारी की मदद ली गई. सीढ़ी लगाकर बाथरूम का शीशा तोड़ा गया और अंदर पहुंचने की कोशिश की गई. दरवाजा खुलते ही जो दृश्य सामने था, उसने प्रेम कुमार शर्मा की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. उनका बेटा बाथरूम के अंदर फंदे से लटका हुआ मिला. पिता ने कांपते हाथों से फंदा खोला और बेटे को नीचे उतारा. जिस बेटे को बचपन में गोद में उठाया था, उस दिन उसे निर्जीव अवस्था में अपनी बाहों में उठाना पड़ा. पिता तुरंत अमन को सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने जांच के बाद अमन को मृत घोषित कर दिया.

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह भी है कि अमन अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं. अब वे बच्चे बड़े होकर शायद यह सवाल पूछेंगे कि उनके पिता के साथ आखिर क्या हुआ था. प्रेम कुमार शर्मा ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि उनके बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसे इस स्थिति तक पहुंचाया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुश्किल की घड़ी में अमन को बचाने की कोशिश भी नहीं की गई. पुलिस को दिए बयान में उन्होंने अपनी जज बहू, उसकी आईएएस बहन सहित कई अन्‍य परिजनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है.



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