महाराष्ट्र के मीरा रोड में रहने वाले 81 साल के असगरअली वोहरा को उनकी जमीन वापस मिल गई है। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने मंगलवार को कहा कि वह विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं और प्लॉट पर मिली निर्माण अनुमति भी सरेंडर कर रहे हैं। उन्होंने वोहरा के खिलाफ पहले की गई पुलिस शिकायत वापस लेने की बात भी कही। असगरअली ने 8 सितंबर को पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उनका दावा है कि वह पीएम मोदी के साथ गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ाई करते थे। उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान जमीन विवाद में दखल देने और सीबीआई जांच की मांग की थी। मामले के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में बैठक बुलाई। इसमें असगरअली वोहरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे। बैठक में मेहता ने जमीन और निर्माण अनुमति से जुड़े अपने फैसले की जानकारी दी। क्या है पूरा मामला? विवाद भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में 2,810 वर्गमीटर जमीन का है। वोहरा के मुताबिक, उन्होंने यह जमीन 1989 में खरीदी थी। उनका आरोप है कि 2011 में स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने जमीन पर कब्जा कर लिया। वोहरा ने दोनों कंपनियों को नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। वोहरा का आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया। उनका कहना था कि वह करीब 15 साल से अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने इस मामले को उठा रहे थे। 2015 में इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। 2019 में कंपनी ने जमीन खरीदने की बात कही सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने अपने पत्र में कहा कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए यह जमीन खरीदी थी। कंपनी को 17 अप्रैल 2026 को इस प्लॉट पर निर्माण की अनुमति मिली थी। अब कंपनी ने जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद का हवाला देते हुए अपना निर्माण प्रमाणपत्र सरेंडर कर दिया है। उसने मीरा-भायंदर नगर निगम से निर्माण अनुमति रद्द करने और प्रोजेक्ट के लिए पहले जमा की गई फीस वापस करने का अनुरोध किया है। मेहता ने वोहरा की शिकायत वापस लेने की बात कही नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को भी अलग पत्र भेजा। इसमें उन्होंने असगरअली वोहरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही और बताया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। यह शिकायत 2015 में वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ कथित आपराधिक अतिक्रमण और धमकी को लेकर की गई थी। शिकायत वापस लेने से जुड़े आधिकारिक पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए हैं। 16 सितंबर को नगर निगम में सुनवाई मामले में मीरा-भायंदर नगर निगम ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन को 16 सितंबर को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया था। नगर निगम में जमीन विवाद से जुड़ी सुनवाई भी इसी दिन तय की गई थी। वोहरा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि मामला सुलझ जाएगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने भी पीएम मोदी और वोहरा की मुलाकात की तस्वीरें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री अपने स्कूलमेट के मामले में न्याय सुनिश्चित करेंगे।
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पीएम से मुलाकात के बाद स्कूलमेट को जमीन वापस मिली: BJP विधायक ने कब्जा छोड़ने और प्लॉट का निर्माण परमिट लौटाया, केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू
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