नई दिल्ली6 मिनट पहले
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ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र सरकार की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। केंद्र ने इस साल 11 मार्च को आया फैसला लागू करने में राहत मांगी थी। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की आमदनी देखना काफी नहीं है। उनका पद और सामाजिक स्थिति को भी देखा जाना चाहिए।
केंद्र ने अचानक इसे लागू करने से जटिलता बढ़ने का हवाला देते हुए यूपीएससी परीक्षा 2025 और 2026 के लिए छूट की मांग की थी।
केंद्र की क्या थी दलील?
- फैसले को तुरंत लागू करने से कई प्रशासनिक परेशानियां पैदा हो सकती हैं।
- निजी क्षेत्र के पदों को सरकारी पदों के बराबर मानने के लिए भी काफी समय लग सकता है।
- केंद्र सरकार ने अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग की थी।
- राज्यों से बातचीत और बड़ी संख्या में सरकारी संस्थानों को देखते हुए इसमें करीब 2 साल तक का समय लग सकता है।
- सिविल सेवा परीक्षा 2025 के कैडर और सेवाओं का आवंटन, ट्रेनिंग और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
- 2016 के बाद केंद्र सरकार, रेलवे, बैंक, अर्धसैनिक बलों और विश्वविद्यालयों में करीब 3 लाख 70 हजार ओबीसी नियुक्तियां हुई हैं। अगर फैसले को पिछली तारीख से लागू किया गया तो बड़ी संख्या में नए विवाद और मुकदमे हो सकते हैं।
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