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बंदूक से पर्यटन तक! धौलपुर की बदली पहचान, अब चंबल किनारे उमड़ रहे सैलानी


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Chambal Tourism Rajasthan: राजस्थान का धौलपुर जिला, जो कभी बीहड़ों, बागियों और बंदूकों के लिए बदनाम था, अब अपनी नई पहचान बना रहा है. चंबल नदी, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता के कारण धौलपुर तेजी से पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है. यहां की चंबल सफारी, प्राचीन किले, मंदिर और प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं. प्रशासन और पर्यटन विभाग भी नेचर और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में जुटे हैं. बदलती तस्वीर के साथ धौलपुर अब डर नहीं बल्कि आस्था, इतिहास और रोमांचक पर्यटन अनुभव के लिए जाना जाने लगा है.

राजस्थान का धौलपुर जिला कभी चंबल के खौफनाक बीहड़ों और डकैतों की कहानियों के लिए जाना जाता था. जैसे ही लोगों की जुबान पर धौलपुर का नाम आता था, दिमाग में बीहड़, बागी और बंदूक की तस्वीर उभर जाती थी. चंबल घाटी के इन बीहड़ों में कभी पान सिंह तोमर, निर्भय सिंह गुर्जर, जगजीवन परिहार, मलखान सिंह और फूलन देवी जैसे डकैतों का दबदबा रहा. उस दौर में बीहड़ों में गोलियों की आवाज गूंजती थी और लोग यहां आने से डरते थे. कहा जाता है कि इन डकैतों ने बीहड़ों में एक तरह से अपनी समानांतर सरकार चला रखी थी.

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यही वजह है कि चंबल का इलाका सिर्फ बंदूक नहीं, बल्कि भक्ति और आस्था के लिए भी जाना जाता है. धौलपुर शहर चंबल नदी के किनारे बसा हुआ है. चंबल नदी के आसपास बने गहरे और विशाल बीहड़ इस इलाके की सबसे खास पहचान हैं सदियों से यह क्षेत्र अपने दुर्गम रास्तों, विद्रोही संस्कृति और खौफनाक इतिहास के कारण पूरी दुनिया में चर्चित रहा.

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लेकिन चंबल के ये बीहड़ सिर्फ डकैतों और डर की पहचान नहीं रहे. इन्हीं बीहड़ों में आस्था और आध्यात्म का भी गहरा संबंध रहा है. धौलपुर के बीहड़ों में माता रहेना वाली का मंदिर स्थित है, जहां डकैत भी घंटा और झालर चढ़ाने पहुंचते थे. इसके अलावा बनखंडी धाम हनुमान मंदिर और दिन में तीन बार रंग बदलने वाले अचलेश्वर महादेव मंदिर भी इन्हीं घने बीहड़ों के बीच बसे हुए हैं.

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जहां कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब पक्षियों की चहचहाहट गूंजती है. शांत बहती चंबल नदी, विशाल बीहड़ और प्राकृतिक सुंदरता अब पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. नदी किनारे घड़ियालों का नजारा और विदेशी पक्षियों की मौजूदगी लोगों को खास अनुभव देती है. भूलभुलैया जैसे बने ये बीहड़ अब प्रकृति की अनमोल धरोहर बन चुके हैं, जहां पर्यटक बिना किसी डर के घूमने पहुंच रहे हैं.

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इन्हीं बीहड़ों में स्थित ऐतिहासिक शेरगढ़ दुर्ग धौलपुर की पुरानी विरासत को आज भी जीवित रखे हुए है. ये दुर्गा कभी जाट रियासत की प्रारंभिक राजधानी रहा था हालांकि आज यह दुर्ग जर्जर हालत में है, लेकिन इसकी दीवारों में इतिहास की गूंज अब भी महसूस की जा सकती है. समय के साथ अब चंबल के बीहड़ों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.

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धौलपुर के बीहड़ों की खूबसूरती अब बॉलीवुड को भी खूब पसंद आ रही है. यहां इंस्पेक्टर अविनाश, सोन चिड़िया और पान सिंह तोमर जैसी फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग हो चुकी है. हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर की आने वाली फिल्म “शक्ति शालिनी” की शूटिंग भी धौलपुर के इन्हीं घने बीहड़ों में हुई है. धौलपुर का घना बीहड़ बॉलीवुड को बेहद पसंद आने लगा है चंबल के बीहड़ अब डर नहीं, बल्कि इतिहास, प्रकृति और पर्यटन की नई पहचान बनते जा रहे हैं.

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