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बाजार: लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहा नियामक? सेबी अध्यक्ष ने खोला राज


मुंबई में ‘एसोसिएशन ऑफ एनएसई मेंबर्स ऑफ इंडिया’ (एनएनएमआई) के 16वें इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए भारतीय प्रतिभूति व एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) तुहिन कांत पांडे ने बाजार के तौर-तरीकों पर बात की। उन्होंने बताया कि सेबी लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाने के लिए शार्ट सेलिंग और सुरक्षित लेडिंग और बॉरोइंग का रिव्यू कर रहा है। इसके साथ ही ट्रेडिंग टर्मिनलर्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सेफगार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, सेबी कॉर्पोरेट बॉन्ड में सेकेंडरी ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए एक ‘मार्केट-मेकिंग’ फ्रेमवर्क भी तैयार कर रहा है।।

स्टॉक ब्रोकर्स पर सेबी अध्यक्ष क्या बोले?

उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सेबी स्टॉक ब्रोकर्स के लिए उनके स्केल, क्लाइंट एक्सपोजर तथा टेक्नोलॉजी पर निर्भरता के आधार पर ग्रेडेड कम्पलायंस पर विचार कर रहा है। पांडे ने कहा कि सेबी कैश सेगमेंट में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) जैसे कस्टोडियल क्लाइंट्स को ऑटोमेटेड गिव-अप और टेक-अप सुविधा देगा।

सेबी अध्यक्ष ने टेक्नोलॉजी से जुड़े बढ़ते हुए जोखिम के बारे में बोलते हुए कहा, क्योंकि एल्गोरिदम का ट्रेड में बड़ा हिस्सा बनता जा रहा है। एआई निवेशकों के निवेश करने के तरीको को बदल रहा है। साइबर अटैक और धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रहा है। एक ही आउटेज कुछ ही मिनटों में हजारों निवेशकों को भारी नुकसान पहुंच सकता है और पूरे सिस्टम को हिला सकता है। इसलिए साइबर सिक्योरिटी को आईटी खर्च नहीं बल्कि कारोबार का प्राथमिकता समझा जाना चाहिए। इसके साथ ही अपने सिस्टम को टेस्ट करते रहना और फेलियर के लिए एक प्लान सदैव तैयार रखें।

नियमों में किन बदलावों पर जोर?

कम्प्लायंस को आसान बनाने के लिए सेबी डिपॉजिटरी और पार्टिसिपेंट्स के लिए नियमों को दोबारा से आसान बनाने पर जोर दे रहा है, जिसमें धोखाधड़ी के खिलाफ सुरक्षा उपायो को और मजबूत किया जा सके। इसके साथ ही रेगुलेटर कैपिटल एफिशिएंसी को बेहतर बनाने और कम्प्लायंस कॉस्ट को कम करने के लिए टेंडर ऑफर, बायबैक और ऑफर फॉर सेल में पैरेलल क्लियरिंग की आवश्सकताओं पर भी ध्यान दे रहा है।

उन्होंने बताया कि, रेगुलेटर अपने इंस्पेक्शन पोर्टल को एक सिंगल डिजिटल वर्कफ़्लो में लाने की भी योजना बना रहा है ताकि सुपरविजन तेज और एक जैसा हो सके। इसके लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सैंडबॉक्स की खोज कर रहा है ताकि नए टूल्स को सुरक्षित रूप से टेस्ट किया जा सके, साथ ही इनोवेटर्स को रेगुलेटरी निश्चितता दी जा सके और सही सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जा सकें। साथ ही  ‘इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज कमीशंस’ (आईओएससीओ) की टूलकिट के अनुरूप, इन गाइडलाइंस में एक स्तरीय  दृष्टिकोण से अपनाया जाएगा, जिसमें स्पष्ट जवाबदेही, डेटा कंट्रोल, ‘किल स्विच’ और मानवीय निगरानी शामिल होगी। इसके अलावा, सेबी कॉर्पोरेट बॉन्ड में सेकेंडरी ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए एक ‘मार्केट-मेकिंग’ फ्रेमवर्क भी तैयार कर रहा है।



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