उपभोक्ताओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) अब भारतीय सेना की कैंटीनों में भी अपने कदम जमाने जा रहा है। आने वाले दिनों में देश भर की सभी सैन्य कैंटीनों में भारत ब्रांड का चावल उपलब्ध होगा, जिसकी औपचारिक शुरुआत 12 अक्तूबर से होने की संभावना है। वर्तमान में नैफेड की ओर से कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (सीएसडी) को दालों की आपूर्ति की जा रही है। दालों की बेहतरीन गुणवत्ता को देखते हुए अब आर्मी ने नैफेड से चावल भी लेने का निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में नैफेड की ओर से सेना को सालाना करीब 35 हजार टन दालों की आपूर्ति की जा रही है, जबकि ‘भारत राइस’ की सालाना खपत 30 हजार टन तक होने का अनुमान लगाया गया है। इस संबंध में नैफेड ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस पूरी व्यवस्था को बेहद सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए नैफेड, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साथ मिलकर काम करेगा और किसानों व खुले बाजार से सीधे कच्चा धान या चावल खरीदेगा।
एमएसएमई के लिए एनपीए के वर्गीकरण संबंधी नियमों पर हो पुनर्विचार: सीईए
नई दिल्ली। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रिजर्व बैंक को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसमई) के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए)के वर्गीकरण संबंधी नियमों पर फिर से विचार करना चाहिए। इन नियमों को वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने के बजाय देश की कारोबारी परंपराओं और नकदी प्रवाह के तौर-तरीकों के अनुरूप बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतिगत स्तर पर वित्त मंत्रालय इन मानदंडों की समीक्षा की वकालत करता रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत, बकाया भुगतान की अवधि के आधार पर कर्ज को विशेष उल्लेख खातों (के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसकी श्रेणियां 30 दिन, 60 दिन और 90 दिन के बकाया भुगतान के अनुरूप हैं। आम तौर पर, यदि ब्याज या मूलधन का भुगतान 90 दिन से अधिक समय तक बकाया रहता है तो खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) यानी फंसा कर्ज घोषित कर दिया जाता है।