इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के आश्वासन के बाद बैंक यूनियनों ने अपनी तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल वापस ले ली है। इससे सोमवार से सामान्य बैंकिंग कामकाज जारी रहेगा। यह हड़ताल पांच दिवसीय कार्य सप्ताह और अन्य मांगों को लेकर बुलाई गई थी।
कैसे टली बैंक हड़ताल?
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने सोमवार से 30 सितंबर तक हड़ताल का आह्वान किया था। रविवार देर रात बैंक यूनियनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। इसका कारण क्या है? आइए समझते हैं। दरअसल, आईबीए ने यूएफबीयू की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। इसमें सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की मांग भी शामिल है। वर्तमान में बैंक रविवार और महीने के दूसरे व चौथे शनिवार को बंद रहते हैं। आईबीए के भरोसे के बाद रविवार की देर शाम यूएफबीयू ने तीन दिन की बैंक हड़ताल टालने का फैसला लिया।
हड़ताल टलने के फैसले के बाद बताया किया कि आईबीए और यूएफबीयू की एक उच्च-स्तरीय समिति तुरंत बनाई जाएगी। यह समिति शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने के मुद्दे पर विचार करेगी। समिति सभी संभावित विकल्पों पर गौर करेगी और हितधारकों से चर्चा करेगी। इसका उद्देश्य सभी हितधारकों, विशेषकर ग्राहकों के लिए स्वीकार्य समाधान खोजना है। रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रखे गए थे। यह ग्राहकों की असुविधा कम करने के लिए किया गया था।
क्या है पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग?
बैंक यूनियन लंबे समय से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग कर रहे हैं। इसका अर्थ है कि सभी शनिवार को बैंकों में अवकाश घोषित किया जाए। वर्तमान में बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं। अन्य शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। इस मांग से बैंक कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन का अवकाश मिलेगा।
समिति कैसे निकालेगी समाधान?
आईबीए और यूएफबीयू की उच्च-स्तरीय समिति इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श करेगी। यह समिति सभी संभावित विकल्पों का पता लगाएगी। विभिन्न हितधारकों के साथ भी चर्चा की जाएगी। ग्राहकों की सुविधा को भी ध्यान में रखा जाएगा। समिति का लक्ष्य एक ऐसा समाधान खोजना है जो सभी पक्षों को स्वीकार्य हो।
अन्य किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
अधिकारियों के लिए पीएलआई योजना में संशोधन पर भी चर्चा होगी। यह योजना स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों पर लागू होती है। यूनियनों की आपत्तियों को दूर करने के लिए संशोधन प्रस्तावित किए जा सकते हैं। 8 मार्च 2024 के कार्यवृत्त में सूचीबद्ध लंबित मुद्दों पर भी बात होगी। इन मुद्दों का शीघ्र समाधान करने के लिए दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।



