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‘भाई, मर रहा हूं’ मलबे में दबे नीरज का कॉल: दिल्ली बिल्डिंग हादसे में बचे 2 छात्रों की आपबीती, 4 घंटे बाद रेस्क्यू हुआ


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39 मिनट पहले

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‘भाई, मैं मर रहा हूं…’ दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हॉस्टल की पांच मंजिला बिल्डिंग गिरी तो नीरज बावा कई टन मलबे के नीचे दब गए। सांस लेना मुश्किल हो रहा था, शरीर में गंभीर चोटें थीं। उन्होंने मलबे के अंदर से दोस्त को फोन किया और सिर्फ इतना ही कह पाए।

उधर, कुछ दूरी पर नितेश भी मलबे में फंसे थे। लेंटर और मलबे के बीच बनी छोटी-सी जगह से उनके चेहरे तक हवा पहुंच रही थी, जिससे वे सांस ले पा रहे थे और लगातार मदद के लिए आवाज रहे थे।

नीरज और नितेश 4 घंटे तक मलबे में जिंदगी और मौत के बीच फंसे रहे। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने दोनों को बाहर निकाला। इस हादसे में 7 लोगों की जान गई। 12 घायलों में नीरज और नितेश भी हैं। इनका एम्स में इलाज चल रहा है।

बिल्डिंग गिरने के वक्त नितेश और नीरज के साथ क्या हुआ और मलबे में फंसे रहने के दौरान क्या महसूस किया…दोनों की आपबीती उनके चचेरे भाई रोहित छिब से हुई बातचीत पर आधारित है। रोहित ने दैनिक भास्कर को जैसा बताया, हम उसी आधार पर पूरी घटना बता रहे हैं।

दिल्ली की यही वह पांच मंजिला इमारत है, जो रविवार को गिरी थी। यहां हॉस्टल डेज के नाम से पीजी चलता था।

दिल्ली की यही वह पांच मंजिला इमारत है, जो रविवार को गिरी थी। यहां हॉस्टल डेज के नाम से पीजी चलता था।

नितेश ने नीरज से पूछा- भाई पानी की आवाज आ रही है क्या

हॉस्टल गिरने के कुछ मिनट पहले नितेश और नीरज दूसरी मंजिल पर अपने-अपने कमरे में थे। नितेश रविवार को दोपहर 12:30 बजे खाना खाने के बाद अपने कमरे में आया था। तभी दीवारों की तरफ से पानी जैसी आवाज आने लगी। कुछ देर बाद आवाज तेज होने लगी।

नितेश ने पास वाले कमरे में रहने वाले नीरज से पूछा कि क्या उसे भी पानी की आवाज सुनाई दे रही है। नीरज ने भी हां में जवाब दिया। इसके महज 2 सेकेंड बाद ही पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई।

नितेश के मुताबिक, “मैं मलबे के नीचे फंस गया था। मेरे ऊपर लेंटर जैसा भारी मलबा गिरा था। मलबे और लेंटर के बीच एक गैप बन गया था। उसमें मेरा चेहरा फंस गया। इस वजह से मैं सांस ले पा रहा था। बोल भी पा रहा था। मेरे पैर मलबे में फंसे थे।”

नीरज को आवाज दी तो बोला- ‘मुझे बहुत दर्द हो रहा है’

नितेश ने इसके बाद अपने दोस्त नीरज बावा को आवाज लगाई। नीरज ने जवाब दिया- “मुझे दर्द हो रहा है।” नितेश के मुताबिक, नीरज जिस जगह फंसा था, वहां मलबा ज्यादा था और धूल भी भरी हुई थी। उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।”

नितेश ने बताया, “मैंने मलबे के अंदर से लगातार मदद के लिए आवाज लगानी शुरू कर दी। कुछ देर बाद रेस्क्यू टीम मलबे के ऊपर पहुंची। मैंने टीम के लोगों को आपस में बात करते सुना। वे कह रहे थे कि दूसरी बिल्डिंग भी गिरने वाली है।

मेरे लिए यह सुनना और डराने वाला था। मैं पहले ही मलबे के नीचे फंसा अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था। मुझे डर था कि अगर दूसरी बिल्डिंग भी गिर गई तो मैं दोबारा नहीं बच पाऊंगा।”

हॉस्टल डेज का रूम। यह फुटेज वहां रहने वाले स्टूडेंट्स ने शेयर किया।

हॉस्टल डेज का रूम। यह फुटेज वहां रहने वाले स्टूडेंट्स ने शेयर किया।

नीरज ने दोस्त को फोन किया- ‘भाई, मैं मर रहा हूं’

इस बीच नीरज ने अपने करीबी दोस्त वीर चतरथ को फोन लगाया। वीर ने दैनिक भास्कर को बताया कि दोपहर 1:45 बजे मुझे नीरज का फोन आया। कहा- ‘भाई, मैं मर रहा हूं।’

वीर ने बताया कि हम दोनों के बीच 5-6 बार फोन पर बात हुई। मैंने नीरज से उसकी लाइव लोकेशन भेजने को कहा। हमारी वॉटसऐप कॉल पर करीब 13 सेकेंड बात हुई।

इसके बाद दोपहर 1:55 बजे नीरज ने अपनी लाइव लोकेशन भेजी। दोपहर 2:16 बजे मैंने दोबारा फोन किया, लेकिन इस बार कोई जवाब नहीं मिला।

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मैंने उसे आखिरी मैसेज भेजा था- ‘भाई, हिम्मत नहीं हारनी है तूझे।’

इसके बाद मैने और उसके दोस्तों ने नीरज को बचाने के लिए टीम बनाई। हम लोग घटनास्थल पर पर पहुंचे। पुलिस और NDRF की टीम भी रेस्क्यू में जुटी थी। करीब 3-4 घंटे बाद नीरज को मलबे से बाहर निकाला जा सका।

नीरज को पहले प्राइमस अस्पताल ले जाया गया। वहां करीब 50 मिनट से एक घंटे तक इलाज चला। इसके बाद शाम करीब 6 बजे उसे AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। AIIMS में रात करीब साढ़े 10 बजे उसकी सर्जरी शुरू हुई, जो रात करीब 1 बजे तक चली।

नीरज की हालत गंभीर, एक सर्जरी हो चुकी; दूसरी की तैयारी

नीरज की हालत बेहद गंभीर है। उसकी पीठ में गंभीर चोटें हैं। जांघ के ऊपरी हिस्से में भी गहरी चोट लगी है। पेट में भी गंभीर घाव है। एक सर्जरी हो चुकी है। डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। शरीर में इंफेक्शन फैल चुका है और त्वचा काली पड़ चुकी है। एक और सर्जरी होगी।

हादसे से पहले ‘कनक लता’ हॉस्टल की दीवारें भी दरकने लगी थीं, छात्राओं ने वीडियो बनाया

हॉस्टल डेज के बगल वाले ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था।

वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- ‘लगता है गिरने वाली है।’

हादसे से पहले ‘कनक लता’ हॉस्टल की दीवारें भी दरकने लगी थीं, छात्राओं ने वीडियो बनाया

हॉस्टल डेज के बगल वाले ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने अपने कमरे में आई दरारों का वीडियो बनाया था।

हॉस्टल डेज के बगल वाले ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने अपने कमरे में आई दरारों का वीडियो बनाया था।

हॉस्टलडेज के ठीक पहले बगल की ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था।

वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- ‘लगता है गिरने वाली है।’

हादसे के बाद की 3 तस्वीरें…

यह हादसे वाली जगह का ड्रोन शॉट है। जहां खाली जगह है वहां कभी इमारत हुआ करती थी।

यह हादसे वाली जगह का ड्रोन शॉट है। जहां खाली जगह है वहां कभी इमारत हुआ करती थी।

मलबे में दबा एक छात्र मदद के लिए चीख रहा था, तब पुलिस और वहां मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर बाहर निकाला।

मलबे में दबा एक छात्र मदद के लिए चीख रहा था, तब पुलिस और वहां मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर बाहर निकाला।

मलबे से रेस्क्यू युवक को अस्पताल ले जाती एनडीआरएफ टीम।

मलबे से रेस्क्यू युवक को अस्पताल ले जाती एनडीआरएफ टीम।

DU से सिर्फ 1km दूर सत्य निकेतन, बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास बसा प्रमुख छात्र इलाका है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके में कई छात्र आवास हैं और आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे संस्थान हैं।

इसी वजह से यहां दिनभर छात्रों की आवाजाही रहती है। हालांकि, सत्य निकेतन में कुल कितने छात्र रहते हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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छात्र बोले- 10 मिनट पहले निकले, नहीं तो दबे होते: बिल्डिंग से दरकने की आवाजें आ रही थीं

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शुक्र है हम बच गए….यह कहना है, दिल्ली के सत्य निकेतन के हॉस्टल से कुछ देर पहले निकले छात्रों का। इनके मुताबिक, इमारत गिरने से कुछ देर पहले दीवारों से दरकने यानी क्रैक की आवाजें भी आ रही थीं। कुछ छात्रों ने बताया कि वे हादसे से महज 10-20 मिनट पहले ही बिल्डिंग से बाहर निकले थे। लौटे तो सबकुछ बिखर गया था। पूरी खबर पढ़ें…



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