कुछ ही क्षण पहले
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BRICS समिट में परोसे गए खाने की आलोचना करने पर भाजपा ने सोमवार को कांग्रेस पर फिर पलटवार किया।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस ने समिट में हासिल की गई भारत की उपलब्धि के बजाय डिनर के मेन्यू पर ध्यान दिया। यह बेहद हास्यास्पद और शर्मनाक है। सुधांशु ने कहा कि कांग्रेस नेताओं का रवैया साबित करता है कि वे ‘नाराज फूफा’ ही हैं।
कांग्रेस नेताओं ने रविवार को ब्रिक्स डिनर में केवल शाकाहारी खाना परोसे जाने पर कहा था कि, सरकार ने मेहमानों पर अपने खान-पान की पसंद थोप दी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर BRICS डिनर का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा था कि 80% भारतीय मांसाहारी हैं।
दरअसल 12 सितंबर को आयोजित डिनर के मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता, गुजराती खांडवी और मिलेट्स का पुलाव रखा गया था। कश्मीर की मशरूम डिश और मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी भी परोसी गई थी।

13 सितंबर- राहुल ने नॉनवेजेटिरयन डेटा के साथ छोले-भटूरे की फोटो डाली

किरेन रिजिजू ने X पर फूड मेन्यू पर जवाब दिया
जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पोस्ट करते हुए लिखा कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी BRICS देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है।
हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर था और जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं की झलक थी।

पवन खेड़ा ने कहा था- भाजपा का काम बस अपनी पसंद थोपना
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर लिखा- बीजेपी का साथी भारतीयों पर अपनी खान-पान संबंधी पसंद थोपना पहले से ही बेहद समस्या है। अब उन्होंने दुनिया भर से आए गणमान्य लोगों पर भी अपनी पसंद थोपकर इसे एक कदम आगे बढ़ा दिया है।
भारत एक समृद्ध, विविधतापूर्ण और कई तरह के व्यंजनों वाला देश है। यहां मांसाहारी व्यंजनों की भी कई बेहतरीन किस्में हैं, जिन्हें दुनियाभर के लोग पसंद करते हैं और बड़े चाव से खाते हैं।

भारत में नॉनवेजेटेरियन का आंकड़ा कहीं आधिकारिक नहीं
राहुल गांधी ने भारत में 80% नॉनवेजेटेरियन के आंकड़े का कोई सोर्स नहीं बताया। 2023-24 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) में मांसाहारी भोजन के सेवन से जुड़ा ऐसा कोई तुलनात्मक आंकड़ा नहीं बताया गया था।
हालांकि, 2019 से 2021 के बीच हुए पिछले NFHS-5 सर्वेक्षण के अनुसार, 15 से 49 साल की उम्र के 83.4% पुरुष और 70.6% महिलाएं कम से कम कभी-कभार मछली, चिकन या मांस खाते थे।


डिनर में विदेशी मेहमानों के लिए जयपुर में खास टेबलवेयर तैयार किया गया था। अरुण्स ग्रुप ऑफ कंपनीज ने समिट के मेन्यू के हिसाब से बर्तनों और कटलरी का डिजाइन तैयार किया।

सभी बर्तनों पर चांदी की परत चढ़ाई गई थी, जिससे भारतीय कला और शिल्प की झलक देखने को मिले। इसमें पारंपरिक भारतीय कारीगरी के साथ आधुनिक CNC तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
डिनर डिप्लोमेसी की अहमियत
ब्रिक्स समिट जैसे बड़े आयोजनों में ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का मतलब होता है औपचारिक बैठकों और सख्त प्रोटोकॉल से हटकर, रात के खाने की मेज पर अनौपचारिक बातचीत करना।
एक साथ खाना खाते हुए नेताओं के बीच का माहौल सहज हो जाता है, जिससे तनाव कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और विवादित मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने में आसानी होती है।
कई बार जो मुश्किल समझौते बंद कमरों की औपचारिक चर्चा में नहीं सुलझ पाते, उनकी जमीन ऐसे ही डिनर के दौरान अनौपचारिक बातचीत से तैयार होती है।

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