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भारत के 6 सबसे खूबसूरत और ‘अनछुए ‘ गांव, जहां आपको जिंदगी में एक बार जरूर जाना चाहिए


Best offbeat places for summer trip : रोजमर्रा की भागदौड़, दफ्तर का तनाव और शहरों का कंक्रीट का जंगल… कभी-कभी मन करता है कि सब कुछ छोड़कर किसी ऐसी जगह चले जाएं जहां सिर्फ सुकून हो. अगर आप भी इस वीकेंड या अगली छुट्टियों में किसी ऐसी ही जगह की तलाश कर रहे हैं, तो मनाली, शिमला या गोवा का घिसा-पिटा प्लान छोड़िए. आज हम आपको भारत के उन 6 अनछुए और खूबसूरत गांवों (Hidden Villages) की सैर पर ले चल रहे हैं, जो किसी जन्नत से कम नहीं हैं, लेकिन आज भी आम पर्यटकों की भीड़ से दूर हैं.

इन ऑफबीट जगहों पर जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहाँ आपको कमर्शियल टूरिज्म की भीड़ नहीं मिलती. यहाँ आप लोकल होमस्टे में रुककर स्थानीय संस्कृति को करीब से देख सकते हैं और वहाँ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं.

ज़ुलुक, सिक्किम (Zuluk) – बादलों के ऊपर बसा एक गांव
समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर बसा ज़ुलुक सिक्किम का एक छोटा सा और बेहद खूबसूरत गांव है. यह कभी भारत और तिब्बत के बीच ऐतिहासिक ‘सिल्क रूट’ का हिस्सा हुआ करता था. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत हैं यहाँ के 32 घुमावदार रास्ते (Hairpin Bends). जब आप यहाँ की वादियों से कंचनजंगा की पहाड़ियों पर सूरज की पहली किरण पड़ते हुए देखते हैं, तो वह नजारा जिंदगी भर के लिए आंखों में बस जाता है.
जिभी, हिमाचल प्रदेश (Jibhi) – पहाड़ों का छुपा हुआ खजाना
अगर आपको हिमाचल प्रदेश पसंद है लेकिन मनाली और कशौल की भीड़ से चिढ़ है, तो जिभी आपके लिए परफेक्ट है. तीर्थन घाटी में बसा यह गांव देवदार और चीड़ के घने जंगलों से घिरा हुआ है. यहाँ की खासियत है लकड़ी के पारंपरिक घर (Kathkuni style houses) और कल-कल बहती नदियाँ. जिभी वॉटरफॉल और जलोड़ी पास जैसी जगहें इस गांव की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं.

मावलिननॉन्ग, मेघालय (Mawlynnong) – एशिया का सबसे साफ और हरा-भरा कोना

ईश्वर की अपनी धरती कहे जाने वाले मेघालय में बसा मावलिननॉन्ग सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, बल्कि बेहद अनुशासित भी है. इसे ‘एशिया के सबसे साफ गांव’ (Cleanest Village in Asia) का खिताब मिला हुआ है. यहाँ की सड़कें हमेशा चमचमाती रहती हैं और हर तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले होते हैं. इस गांव का सबसे बड़ा आकर्षण है ‘लिविंग रूट ब्रिज’ (Living Root Bridge), जिसे यहाँ की खासी जनजाति के लोगों ने पेड़ों की जड़ों को जोड़कर खुद तैयार किया है.
खोनोमा, नगालैंड (Khonoma) – भारत का पहला ‘ग्रीन विलेज’
कोहिमा से करीब 20 किलोमीटर दूर पहाड़ियों के बीच बसा खोनोमा गांव इतिहास और प्रकृति का एक अनोखा संगम है. इसे भारत का पहला ‘ग्रीन विलेज’ कहा जाता है. यहाँ के अंगामी आदिवासियों ने शिकार और पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगाकर इस पूरे इलाके को एक खूबसूरत अभ्यारण्य में बदल दिया है. सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming) और यहाँ की हरी-भरी वादियाँ फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी वरदान जैसी हैं.

नाको, हिमाचल प्रदेश (Nako) – ठंडे रेगिस्तान का तालाब

किन्नौर और स्पीति घाटी के बॉर्डर पर बसा नाको गांव आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है. यह इलाका तिब्बती संस्कृति से काफी प्रभावित है. इस शांत और ठंडे रेगिस्तानी गांव के बीचों-बीच एक बेहद खूबसूरत ‘नाको झील’ है, जिसमें आसपास के पहाड़ों की परछाई साफ दिखाई देती है. यहाँ का प्राचीन बौद्ध मठ और पुराने पत्थरों से बने घर सैलानियों को बेहद सुकून देते हैं.
मुनरो आइलैंड, केरल (Munroe Island) – बैकवॉटर्स का असली सुकून
अगर आपको पहाड़ों से ज्यादा पानी और हरियाली पसंद है, तो केरल के कोल्लम में स्थित मुनरो आइलैंड आपका दिल जीत लेगा. यह 8 छोटे-छोटे द्वीपों का एक समूह है. एलेप्पी के शोर-शराबे से दूर, यहाँ की संकरी नहरों में कयाकिंग (Kayaking) करना और नारियल के पेड़ों के बीच से ढलते सूरज को देखना एक ऐसा अहसास है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

तो देर किस बात की? अपनी डायरी निकालिए, बैग पैक कीजिए और भारत के इन अनछुए कोनों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर लीजिए. यकीन मानिए, यहाँ का सुकून आपकी रूह को तरोताजा कर देगा.



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