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भारत में निवेश का न्योता: डच कंपनी ASML-टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सेमीकंडक्टर पर हाथ मिलाए; कंपनियों ने क्या कहा?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया भर की कंपनियों के लिए निवेश और विकास का सबसे बड़ा और प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इसी सिलसिले में नीदरलैंड के द हेग में एक बेहद खास ‘सीईओ राउंड टेबल ऑन इकोनॉमिक टाइज’ (आर्थिक संबंधों पर सीईओ की गोलमेज बैठक) का आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के शीर्ष डच व्यापारिक नेताओं और बड़ी कंपनियों के सीईओ के साथ सीधा संवाद किया। इस चर्चा के बाद डच उद्योग जगत के नेताओं ने न केवल भारत के तेजी से होते आर्थिक विकास की जमकर तारीफ की, बल्कि सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचे और व्यापार के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर काम करने की अपनी गहरी इच्छा भी जाहिर की।

इस बैठक का सबसे बड़ा और अहम नतीजा यह रहा कि दुनिया की जानी-मानी डच कंपनी एएसएमएल और भारत की प्रमुख कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच सेमीकंडक्टर को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब एएसएमएल के आधुनिक उपकरणों की मदद से भारत में ही सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण किया जाएगा। यह भारत के सेमीकंडक्टर हब बनने के सपने की तरफ एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

एएसएमएल के सीईओ ने भारत के सेमीकंडक्टर विजन पर क्या कहा?

डच कंपनी एएसएमएल के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस्टोफ फौक्वेट ने इस समझौते पर बहुत खुशी जताई। उन्होंने कहा कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ जो अहम साझेदारी हुई है, वह असल में प्रधानमंत्री मोदी की उस मजबूत इच्छाशक्ति का ही नतीजा है, जिसके तहत वे भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को स्थापित करना चाहते हैं। फौक्वेट ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “करीब एक साल पहले, पीएम मोदी ने भारत में इस उद्योग को लाने का लक्ष्य तय किया था। मैं पिछले साल सितंबर में ‘सेमिकॉन इंडिया’ कार्यक्रम में गया था, और वहां की योजनाओं से मैं बहुत प्रभावित हुआ था। हम इस सपने को सच करने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ बहुत करीब से काम करने को लेकर बेहद खुश हैं।”

रॉटरडैम बंदरगाह के सीईओ ने पीएम मोदी की किस बात की तारीफ की?

इस खास बैठक के बाद पोर्ट ऑफ रॉटरडैम अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बौडेविजन सिमन्स ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि जिस ऊर्जा और मजबूत इरादे के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने हम सभी को संबोधित किया, उससे वे बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सिमन्स ने यह भी कहा कि “मुझे पीएम मोदी की वह बात सबसे ज्यादा अच्छी लगी जब उन्होंने कहा कि ‘सबसे अच्छा समय आना अभी बाकी है। मैं उनकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि भारत और नीदरलैंड के बीच अपने रिश्ते, साझेदारी और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए बड़े मौके मौजूद हैं।”

बुनियादी ढांचे और व्यापार को लेकर बाकी कंपनियों की क्या राय है?

बैठक में मौजूद एपीएम टर्मिनल्स के सीईओ कीथ स्वेंडसन ने भी भारत के आर्थिक विकास के लक्ष्यों का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कंपनियों और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते को और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते पर दस्तखत करना एक बहुत ही जरूरी कदम है। कीथ स्वेंडसन ने जानकारी देते हुए बताया कि “हम पिछले साल पीएम मोदी के साथ हुए अहम समझौतों पर काम कर रहे हैं। इनमें भारत में जहाज बनाना, कंटेनर बनाना और युवाओं के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलना शामिल है, ताकि भारत के युवा हमारे सेक्टर से जुड़ सकें। हम भारत के नए बुनियादी ढांचे में भी अपना पैसा लगा रहे हैं।”

वहीं दूसरी तरफ, वोपाक कंपनी के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ डिक रिचेल ने भी भारत में पिछले एक दशक में हुए शानदार बदलावों की जमकर तारीफ की। रिचेल ने कहा कि “मैं पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत में हुए इस बेहतरीन बदलाव को देखकर पूरी तरह से हैरान हूं। भारत को अभी जिस बुनियादी ढांचे की सबसे ज्यादा जरूरत है, उसमें निवेश करने और उसे मजबूत करने के लिए वोपाक जैसी कंपनी के पास कई अच्छे मौके मौजूद हैं।” वीएनओ-एनसीडब्ल्यू (नीदरलैंड उद्योग और नियोक्ता परिसंघ) के अध्यक्ष कोएन वैन ओस्ट्रॉम ने भी पीएम मोदी को एक आधुनिक नेता बताते हुए कहा कि उन्हें डच कंपनियों के बारे में बहुत अच्छी जानकारी थी और वे बिजनेस को लेकर बहुत खुले विचारों वाले हैं।

कंपनियों के अधिकारियों से क्या बोले प्रधानमंत्री ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में मौजूद दुनिया की सबसे इनोवेटिव कंपनियों के अधिकारियों को ‘नमस्ते’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने डच कंपनियों के सीईओ का स्वागत करते हुए बताया कि आज कैसे 300 से भी ज्यादा डच कंपनियां भारत के विकास की कहानी का एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि डच कंपनियों के विजन और भारत पर उनके भरोसे की वजह से ही आज नीदरलैंड, यूरोप से भारत में निवेश करने वाला सबसे बड़ा देश और भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार (ट्रेडिंग पार्टनर) बन गया है।

पीएम मोदी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “दोस्तों, आपकी कंपनियां भारत में सिर्फ एक जाना-माना ब्रांड ही नहीं हैं, बल्कि वे भारत और नीदरलैंड की दोस्ती की ‘ब्रांड एंबेसडर’ भी हैं।” उन्होंने बताया कि एनएक्सपी, फिलिप्स और प्रोसस जैसी डच कंपनियां भारतीय टैलेंट (प्रतिभा) के साथ मिलकर दुनिया के लिए बेहतरीन समाधान (सॉल्यूशन) तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही एपीएम, डेमन और रॉयल वोपाक जैसी कंपनियां भारत के बंदरगाह, शिपिंग और लॉजिस्टिक सेक्टर की पूरी तस्वीर बदल रही हैं।

प्रधानमंत्री ने विदेशी कंपनियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि आज का भारत बड़े स्तर (स्केल) और स्थिरता (स्टेबिलिटी) का बहुत बड़ा प्रतीक है। उन्होंने कहा, “आप सभी की बातों में भारत के प्रति जो उम्मीदें दिख रही हैं, उन्हें हकीकत में बदलना हमारी गारंटी है। हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और हमारे पास सबसे ज्यादा टैलेंट है। इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी या कनेक्टिविटी की बात हो, दुनिया में कोई भी भारत की स्पीड का मुकाबला नहीं कर सकता।”

पीएम मोदी ने स्थिरता के विषय पर भी विदेशी निवेशकों को अपनी नीतियों का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में, मैंने आज सेवा के 12 साल पूरे कर लिए हैं। इन 12 वर्षों में हमने लगातार सुधारों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था का रूप ही बदल दिया है। हमने अंतरिक्ष, खनन और परमाणु ऊर्जा जैसे हर सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया है। हम व्यापार को आसान बनाने (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के लिए लगातार काम कर रहे हैं।” डच कंपनियों के साथ ये सभी नए समझौते और बातचीत यह साफ इशारा करते हैं कि आने वाले समय में भारत दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 





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