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मई की चिलचिलाती धूप में पहाड़ों की ठंडक, दिल्ली के पास 400 KM के दायरे में 5 जगहें


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Hill Station Trip Under 3000: मई का महीना शुरू हो गया है. दिल्ली की इस चिलचिलाती गर्मी से हर कोई अजीज आ चुका है. ऐसे में एक ट्रिप तो बनता ही है. लेकिन दिक्कत यह है कि भारत में अधिकांश लोगों के पास इतने पैसे नहीं होते हैं कि वे 2-3 दिनों के लिए कहीं घूमने के लिए जाएं. पर जो लोग दिल्ली में रहते हैं हम उनके लिए ऐसे 5 हिल स्टेशनों पर सैर का प्लान बता रहे हैं जहां वे 2 से 3 हजार के अंदर एक से दो दिनों के लिए घूम सकते हैं.

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3000 रुपये के अंदर कहां-कहां घूम सकते हैं.

मई की चिलचिलाती गर्मी शुरू हो चुकी है. जो लोग दिल्ली में रहते हैं वे यहां के शोर और तपिश से बेहद परेशान हो जाते हैं.इस तपिश से बचने का एक ही रास्ता है कि आप दिल्ली की गर्म आवोहवा से बचने का तरीका यह है कि दिल्ली के आसपास जो हिल स्टेशन है वहां कुछ दिन बिता के आ जाएं. दिल्ली के 400 किलोमीटर के दायरे में कई हिल स्टेशन हैं जहां कुछ दिन बिताया जा सकता है लेकिन मुश्किल यह है कि हिल स्टेशनों पर जाना बेहद महंगा हो गया है. इसलिए हजारों रुपये खर्च करना सबके बस की बात नहीं है. फिर दूसरा रास्ता क्या है. दूसरा रास्ता यह है कि मुख्य टूरिस्ट प्लेस के आसपास ही कई ऐसी जगहें हैं जहां कम बजट में एक-दो दिन आराम से सुकून भरा समय बिताया जा सकता है. हम इसी तरह के ऐसी 5 जगहों के बारे में बता रहे हैं जो दिल्ली से महज 400 किलोमीटर की दूरी पर है और यहां एक-दो दिन बिताने में 3000 से ज्यादा का खर्चा नहीं है.

इन 5 जगहों पर कुछ दिन बिताएं

1. लैंसडाउन, उत्तराखंड : प्रकृति की गोद में बसा लैंसडाउन बेहद शांत और सुकून भरी जगह है. यह दिल्ली के सबसे पास है. दिल्ली से लैंसडाउन की दूरी लगभग 250 किमी है. लैंसडाउन सबसे शांत हिल स्टेशनों में से एक है.यहां दिल्ली से मुजफ्फरनगर, नजीबाबाद, कोटद्वार के रास्ते लैंसडाउन जाया जा सकता है. यहां बहुत ज़्यादा तड़क-भड़क नहीं है, इसलिए होमस्टे और बजट होटल आसानी से मिल जाते हैं. लैंडसडाउन में आपको 600 से 1000 रुपये तक बेहतरीन रूम मिल जाएगा. होमस्टे में भी कम पैसों में रह सकते हैं. दिल्ली से आप कोटद्वार के लिए सरकारी बस पकड़ सकते हैं. इसका किराया 300 के आसपास है. वहां से 50 से 100 रुपये में लोकल टैक्सी से लैंडसडाउन पहुंच सकते है. दिल्ली से कोटद्वार जाने के लिए सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस है. इसमें स्लीपर में 200 रुपये किराया है. यानी जाने-आने का खर्च 800 रुपये से ज्यादा नहीं लगेगा. लैंडसडाउन छोटी सी शांत जगह है, इसलिए वहां पैदल ही हर कहीं जाया जा सकता है या शेयर वाले वाहन से 50 रुपये के अंदर कहीं भी जाया जा सकता है. लैंडसडाउन के चारो तरफ शांत पहाड़ और देवदार के खूबसूरत पेड़ हैं जहां आप दो दिन आराम से सुकून से गुजार सकते हैं. यहां आप भुल्ला ताल झील, टिप-इन-टॉप पॉइंट और शांत देवदार के जंगल में बिना किसी हलचल के घूम सकते हैं.

2. नाहन, हिमाचल प्रदेश : नहान हिमाचल प्रदेश में है और यह दिल्ली से महज 250 किलोमीटर की दूरी पर है. यह एक शांत और ऑफबीट जगह है.यहां टूरिस्ट की भीड़ बहुत कम होती है लेकिन शिमला-मनाली का जो दृश्य है वही दृश्य आपको यहां भी मिलेगा लेकिन एकदम शांत वातावरण में. कम भीड़ के कारण यहां सब काम बजट में हो सकता है. यहीं रेणुका झील और सुकेती फॉसिल पार्क है जहां आप घूम सकते हैं. यहां शांति के पल बिताने का सबसे सही मौका आता है. दिल्ली से नाहन के लिए सीधी बसें हैं. कश्मीरी गेट से आपको हिमाचल रोडवेज और हरियाणा रोडवेज की कई बसें कभी भी मिल सकती है. यहां तक जाने में 5 से 6 घंटे लगते हैं. इसका किराया साधारण बस में 300 से 400 के बीच है. वॉल्वो से 650 तक टिकट मिल जाएगा. रेलवे नाहन तक नहीं जाती. यहां जाने के लिए आपको अंबाला कैंट जाना होगा. फिर वहां से 65 किलोमीटर दूर नाहन है जहां बस का किराया 100 रुपये तक लग जाएगा. इसलिए बस से जाना ज्यादा बेहतर होता है. यहां आप 700 से हजार रुपये तक होटल में रुक सकते हैं. रेणुका झील के पास किराया ज्यादा है. यहां 3000 तक आप 2 दिन आराम से रह सकते हैं.

3. चैल, हिमाचल प्रदेश : चैल एक तरह से शिमला ही है लेकिन यह शिमला से काफी सस्ता और शांत है. दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 340 किलोमीटर है. यहां शिमला जैसी भीड़ नहीं होती है, इसलिए होटल्स के दाम कम रहते हैं. चैल में दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड और चैल पैलेस है. चैल की खूबसूरती देवदार के ऊंचे पेड़ों के बीच लिपटी उस मखमली शांति में है, जहां बादलों को छूते पहाड़ की अठखेलियां जादुई अहसास कराते हैं. कश्मीरी गेट से शिमला जाने वाली बसें आपको कंडाघाट पर उतार देंगी. इसका साधारण किराया 500 रुपये तक है. कंडाघाट से आपको लोकल बस से जाना होगा जिसके लिए 50 से 60 रुपये देने होंगे. चैल में ठहरने के लिए होटल्स थोड़ा महंगा है लेकिन साधुपुल के पास के रिवर-साइड कैंप सस्ता है. यहां 1000 रुपये से कम में रह सकते हैं. इस तरह यह ट्रिप भी 3000 से कम में हो सकता है.

4. झड़ीपानी और लंढौर, उत्तराखंड : उत्तराखंड के मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है. मसूरी तो सबका पसंदीदा है लेकिन मसूरी से कुछ ही दूरी पर है झडीपानी और लंढौर. ये दोनों जगहें बेहद शांत और कम भीड़-भाड़ वाला है. अगर आपको कम बजट में हिल स्टेशन की सैर करना है तो ये दोनों जगहें बेहद शानदार है. इस यात्रा में आप मसूरी की भी सैर कर सकते हैं लेकिन झडीपानी और लंढौर में रातें बिता सकते हैं क्योंकि यहां आपको सस्टा बेड मिल जाएगा. यहां से आप पैदल रस्किन बॉन्ड के गांव लाल टिब्बा जा सकते हैं. झाड़ीपानी और लंढौर मसूरी का हिस्सा का ही हिस्सा है. इसलिए समझिए कि मसूरी जाने का ही किराया लगेगा. यहां जाने के लिए आपको पहले देहरादून या मसूरी पहुंचना होगा. ट्रेन से 200 रुपये के अंदर देहरादून चले जाएं और वहां से 100 रुपये से कम में लंढौर पहुंच जाए. बस से 300 से 400 रुपये तक किराया है. पास के क्षेत्रों में हॉस्टल बेड 500–800 रुपये में मिल सकते हैं.

5. वशिष्ठ गुफा : ऋषिकेश से लगभग 25 किमी दूर बद्रीनाथ रोड पर स्थित यह एक बेहद शांत जगह है. यहां आपको ऋषिकेष से कई गुना बेहतरीन गंगा का किनारा मिलेगा जो बहुत ज्यादा साफ और शांत है. यहां बिना किसी शोर के शांति से दो दिन गुजार सकते हैं. यहां पास में कुछ आश्रम और छोटे गेस्ट हाउस में 500 से 800 में कमरा मिल सकता है.आप गंगा किनारे कई गतिविधियां कर सकते हैं. इस अत्यंत शांत और पवित्र स्थान पर कई ध्यान केंद्र है, जहां ऋषि वशिष्ठ ने घोर तपस्या की थी. यहां की प्राकृतिक गुफा में बहने वाली ठंडी हवा और गंगा का साफ तट आध्यात्मिक शांति व ध्यान की तलाश करने वालों के लिए इसे एक आदर्श हिडन जेम बनाता है. दिल्ली से यहां पहुंचने के लिए 200 रुपये के अंदर ट्रेन से ऋषिकेष पहुंचे. फिर शेयर ऑटो से 50 रुपये के अंदर वशिष्ठ गुफा पहुंच जाएं. यह गुफा हाईवे के बिल्कुल किनारे है, इसलिए बस वाले को पहले ही बता दें कि आपको वशिष्ठ गुफा आश्रम पर उतरना है. आश्रम में प्रवेश निःशुल्क है. यहां रहने के लिए आपको 500 से 1000 के बीच कमरा मिल जाएगा.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें



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