इंफाल2 घंटे पहले
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घटना शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुई और शाम तक जारी रही।
मणिपुर के कामजोंग जिले के चसाद गांव में शनिवार को कुकी और नगा समुदायों के हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा (NSCN-IM) और म्यांमार के तांगखुल उग्रवादी थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
हिंसा के बाद कुकी समुदाय के 15 घरों में आग लगा दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी से अब तक 50 से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
हिंसा की तस्वीरें…

हिंसा के बाद कुकी समुदाय के 15 घरों में आग लगा दी गई।

लोग अपने घर को छोड़ कर जाने लगे, मां अपनी बच्ची को पीठ पर बैठाकर जा रही है।

लकड़ी से बने घर को भी तोड़ दिया गया।
दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शाम तक जारी रही
पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शुरू हुई, जो शाम तक जारी रही। इसमें गांव के मुखिया थंगजाहौ हाओकिप समेत खाइलुन हाओकिप, सेइखोहौ हाओकिप, हेगिन हाओकिप और सेइपाओ हाओकिप घायल हो गए।
असम राइफल्स के जवानों ने सभी घायलों को बचाकर अर्धसैनिक बल के अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, इलाज के दौरान सेइखोहौ हाओकिप की मौत हो गई। बाकी घायलों का इलाज जारी है।
कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने चस्साद गांव पर हुए हमले की निंदा की है। संगठन ने राज्य सरकार से इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने की मांग की है। इस मामले में सरकार की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।
दूसरी घटना में तीन नागरिकों को गोली लगी
दूसरी घटना कामजोंग जिला मुख्यालय में हुई, जहां नगा समुदाय के तीन नागरिकों को गोली लगी। नगा विलेज गार्ड की ईस्टर्न कमांड के मुताबिक, घायलों की पहचान टी. चिथुंग, एस. मालुंग और एम. शिथुंग के रूप में हुई है। तीनों नागरिक रक्षा स्वयंसेवक हैं। उन्हें कामजोंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर है।
संगठन ने आरोप लगाया कि कुकी हथियारबंद समूहों ने तंगखुल नगा समुदाय के लोगों पर हमला किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि चसाद में तैनात असम राइफल्स के जवानों ने हमलावरों की मदद की और नागरिक इलाकों में स्टन बमों का इस्तेमाल किया, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने 17 अक्टूबर को जारी बयान में चसाद में हुई हिंसा की निंदा की। उन्होंने सेइखोहाओ हाओकिप की मौत पर दुख जताया और घायलों व विस्थापित परिवारों के प्रति चिंता जताई। उन्होंने घरों को जलाए जाने को अस्वीकार्य अपराध बताया।
फरवरी से कई जिलों तक फैला संघर्ष
नगा और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष पहले उखरुल जिले तक सीमित था, लेकिन अब यह सेनापति, तामेंगलांग और अन्य जिलों तक फैल चुका है। दोनों समुदाय एक-दूसरे पर उग्रवादियों को पनाह देने और इलाके में वर्चस्व कायम करने के आरोप लगा रहे हैं।
फरवरी में हिंसा दोबारा शुरू होने के बाद से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलांग और नोनी समेत कई इलाकों में घटनाएं हुई हैं। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत और दर्जनों घरों में आगजनी की खबरें सामने आई हैं।
इससे पहले मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 49 लोग लापता हुए थे और हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।
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