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ममता की करीबी चंद्रिमा ने बंगाल TMC अध्यक्ष पद छोड़ा: एक महीने पहले पद संभाला था; ममता बोलीं- पार्टी छोड़ने की तैयारी पहले से थी


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कोलकाता59 मिनट पहले

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सीनीयर लीडर चंद्रिमा भट्टाचार्य ने नियुक्ति के महज एक महीने बाद शनिवार को पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के अन्य सभी पद भी छोड़ दिए हैं। उनके बागी गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

चंद्रिमा ने कहा कि उन्होंने यह फैसला ममता बनर्जी की फोन पर की गई नाराजगी के बाद लिया। शुक्रवार को बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कोलकाता में पार्टी हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया था। उस समय चंद्रिमा भवन में मौजूद थीं, लेकिन कुछ देर बाद वहां से चली गईं। ममता ने चंद्रिमा पर बागी गुट का साथ देने का आरोप लगाया था।

चंद्रिमा के इस्तीफे के बाद ममता ने खुद राज्य इकाई की कमान संभालने का ऐलान किया है। उन्होंने मदन मित्रा और कुणाल घोष को पार्टी समिति में शामिल किया है। बनर्जी ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। चंद्रिमा पहले से पार्टी छोड़ने की तैयारी में थीं, क्योंकि उनका बेटा पहले ही भाजपा में शामिल हो चुका था।

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इस्तीफे के बाद बागी नेताओं से मुलाकात

चंद्रिमा भट्टाचार्य तीन बार विधायक रह चुकी हैं, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें दमदम उत्तर सीट से भाजपा के सौरव सिकदार ने हरा दिया था। इस्तीफे के कुछ ही देर बाद चंद्रिमा को विधानसभा में बागी गुट के नेताओं के साथ देखा गया।

हालांकि उन्होंने कहा कि वह सिर्फ पूर्व विधायक के तौर पर कुछ काम से विधानसभा गई थीं और विपक्ष के कमरे में बैठने का मतलब यह नहीं है कि वह बागी गुट में शामिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई फैसला नहीं किया है।

चंद्रिमा के बेटे और कोलकाता नगर निगम के पूर्व पार्षद सौरव बसु कुछ सप्ताह पहले ही बागी खेमे में शामिल हो चुके हैं। वह भी विधानसभा में बागी नेताओं की बैठक में मौजूद थे।

ममता बोलीं- पार्टी के दम पर चुनाव जीते, अब उसी से गद्दारी कर रहे

  • जिन नेताओं ने उनके पार्टी सिंबल पर चुनाव जीता, वही अब कह रहे हैं कि 2023 के बाद पार्टी का अस्तित्व नहीं रहा। पार्टी ने ही उन्हें राजनीतिक पहचान दी, लेकिन अब वे उसी पार्टी के साथ विश्वासघात कर रहे हैं और खुले तौर पर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। अगर हिम्मत है तो खुलकर भाजपा में शामिल हो जाइए।
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  • कुछ लोगों ने केंद्रीय बलों की मदद से तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया। भवन का किराया अक्टूबर 2027 तक जमा है और पार्टी हर महीने एक लाख रुपए किराया देती है। यह किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि ‘मां, माटी, मानुष’ की संपत्ति है। इमारत पर कब्जा किया जा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों पर नहीं।
  • भाजपा ने वोट, वोटर लिस्ट और काउंटिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर सत्ता हासिल की है। केंद्रीय बलों की मदद से मतगणना केंद्रों पर कब्जा किया गया और पूरी प्रक्रिया को हाईजैक किया गया। इसके बावजूद हमने नई सरकार को स्वीकार किया गया है।

बंगाल चुनाव में हार के बाद बागी गुट ने ऋतब्रत को नेता चुना

3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। TMC के 80 में से 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया था।

इसमें मांग की गई थी कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी थी। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था।

टीएमसी के बागी विधायकों ने 3 जून को विधानसभा स्पीकर को ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए समर्थन पत्र दिया था।

टीएमसी के बागी विधायकों ने 3 जून को विधानसभा स्पीकर को ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए समर्थन पत्र दिया था।

ममता के पास अब 22 विधायक और 17 सांसद बचे

टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं।

विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।

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दो तिहाई सदस्य होने पर मिलती है अलग दल की मान्यता

बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर खुद को असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग को पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) की जानकारी दी थी।

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में गुट ने दफ्तर के ताले बदल दिए और नए पोस्टर लगाए। नए पोस्टर्स में ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी। हालांकि, अंदर लगी उनकी तस्वीर और कटआउट को नहीं हटाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

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