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एक बेटी की शादी हर मां के जीवन का सबसे खास और भावुक पल होता है. इस दिन की हर छोटी-बड़ी तैयारी में मां का प्यार और आशीर्वाद शामिल होता है. अपनी बेटी के इस खास मौके पर पारंपरिक और पसंदीदा ज्वेलरी पहनना और उसे उपहार में देना हर मां का सपना होता है. लेकिन, जब यह शादी सात समंदर पार अमेरिका में हो, तो मन में एक अनजाना डर और चिंता घर कर जाती है. मन में बस एक ही सवाल होता है कि क्या एयरपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी लगेगी? कुछ ऐसी ही समस्या सुचिता के सामने भी आ खड़ी हुई थी. तभी उसकी सहेली नमृता ने एक ऐसा जुगाड़ बनाया, जिससे सुचिता को चवन्नी की ड्यूटी भी नहीं लगी और वह करोड़ो का सोना अपने साथ बेधड़क अमेरिका ले भी गई और वहां से लेकर भी आ गई. ऐसा कैसे हुआ, जानने के लिए पढ़ें आगे.
शहर के एक कोने में स्थित एक शांत और आरामदायक कैफे में सुचिता और नमृता बैठी थीं. चारों ओर चाय की भीनी-भीनी खुशबू फैली थी, लेकिन सुचिता के चेहरे पर छाई गहरी चिंता इस सुकून भरे माहौल से मेल नहीं खा रही थी. वह बार-बार अपने फोन को देख रही थीं और उनके माथे पर पसीने की बूंदें साफ झलक रही थीं. उनकी घबराहट देख नमृता ने उनका हाथ थाम लिया और बड़ी आत्मीयता से पूछा, ‘सुचिता, आज तुम इतनी परेशान क्यों हो? सब ठीक तो है?’ सुचिता ने एक लंबी और गहरी सांस ली और अपनी उलझन साझा करते हुए कहा, ‘नमृता, मुझे बहुत टेंशन हो रही है!’ नमृता ने तुरंत उनका ढांढस बंधाया और पूछा, ‘क्या हुआ? सब ठीक तो है?’

सुचिता ने अपनी आंखों में एक मां की ममता और ढेर सारी उम्मीदें समेटते हुए नमृता की ओर देखा. उन्होंने धीमी आवाज में अपनी घबराहट की वजह बताते हुए कहा, ‘अमेरिका में बेटी की शादी है…’. जैसे ही नमृता ने यह सुना, उनकी खुशी का ठिकाना न रहा. एक सहेली की बेटी की शादी का समाचार उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं था. उन्होंने खुशी से चहकते हुए सुचिता को बधाई दी और उत्साह भरे लहजे में बोलीं, ‘अरे वाह! ये तो खुशखबरी है!’ नमृता का उत्साह देख सुचिता के चेहरे पर पल भर के लिए मुस्कान तो आई, लेकिन मन में छिपी आशंकाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं.

खुशियों के इस बड़े समाचार के पीछे सुचिता के मन में एक गहरा द्वंद्व चल रहा था. एक तरफ बेटी को पारंपरिक गहनों में देखने की हसरत थी, तो दूसरी तरफ कस्टम नियमों की कड़वाहट. उन्होंने हिचकिचाते हुए नमृता से अपने दिल की बात कही, ‘ज्वेलरी ले जाऊं या नहीं समझ नहीं आ रहा…’ उन्हें डर था कि कहीं विदेशी सरजमीं पर उनके पुश्तैनी गहने किसी कानूनी पचड़े में न फंस जाएं. उनकी इस गंभीर चिंता को सुनकर नमृता मुस्कुरा दीं, जैसे उनके पास हर मुश्किल का हल हो. उन्होंने बड़े ही सहज अंदाज में कहा, ‘बस इतनी सी बात?’
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सुचिता को परेशान देख नमृता ने उन्हें विस्तार से समझाना शुरू किया. उन्होंने बताया कि अब वह जमाना चला गया जब अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान सामान और गहनों को लेकर लोग डरा करते थे. नमृता ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा, ‘अब नियम बहुत आसान हो गए हैं!’ सरकार ने यात्रियों की सुविधा के लिए नियमों में काफी सुधार किया है. यह सुनकर सुचिता के मन में उम्मीद की एक किरण जगी. उन्होंने बड़ी उत्सुकता के साथ नमृता की ओर देखा और जिज्ञासा भरे लहजे में पूछा, ‘सच में? कैसे?’ अब सुचिता उन बारीकियों को जानने के लिए पूरी तरह तैयार थीं.

नमृता ने भारतीय कस्टम के बैगेज रूल्स की जानकारी देते हुए सुचिता को बताया कि नियमों के अनुसार, अब डेली यूज की ज्वेलरी को डिक्लेयर करने की जरूरत नहीं है. नमृता ने बताया कि ‘डेली यूज की ज्वेलरी पर कोई ड्यूटी नहीं होती.’ लौटते समय भी इस ज्वेलरी पर कोई टैक्स नहीं देना होगा. यह सुनते ही सुचिता के कंधे से जैसे एक भारी बोझ उतर गया. उन्होंने राहत की एक लंबी सांस ली और मुस्कुराते हुए बोलीं, ‘ओह! ये तो आसान है!’ अब उन्हें अपनी रोजमर्रा की अंगूठियां और चूड़ियां ले जाने में कोई हिचक नहीं थी.

सुचिता की राहत अभी अधूरी थी, क्योंकि शादी तो खास थी और गहने भी खास होने थे. उन्होंने अपनी अगली शंका नमृता के सामने रखी और कहा, ‘लेकिन मेरी ज्वेलरी थोड़ी ज्यादा है…’ वह अपनी बेटी के लिए कुछ भारी हार और खानदानी कंगन भी ले जाना चाहती थीं. उन्हें लगा कि शायद यहां कोई पेंच फंस सकता है. नमृता ने उनकी बात सुनी और बड़े ही आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया कि ज्यादा ज्वेलरी के लिए भी घबराने की जरूरत नहीं है. उसने रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा, ‘बस एक छोटा सा काम करना होगा!’ सुचिता अब उस समाधान को सुनने के लिए बेताब थीं.

नमृता ने कस्टम विभाग की एक बहुत ही अहम प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि यदि आप सामान्य जरूरत से अधिक कीमती आभूषण विदेश ले जा रहे हैं, तो डिपार्चर के समय एयरपोर्ट पर मौजूद कस्टम अधिकारियों को अपनी ज्वेलरी दिखा दें. वे उन गहनों की जांच कर आपको एक ‘एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट’ जारी कर देंगे. नमृता ने सरल शब्दों में सलाह दी, ‘कस्टम ऑफिसर को दिखाकर सर्टिफिकेट ले लो!’ यह सर्टिफिकेट इस बात का सबूत होगा कि गहने भारत से ही ले जाए गए हैं. सुचिता को यह प्रक्रिया बहुत ही सरल और पारदर्शी भी लगी. उन्होंने हैरानी और खुशी के साथ पूछा, ‘बस इतना ही?’

नमृता ने सुचिता को आगे की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि यह सर्टिफिकेट आपके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा. जब आप शादी संपन्न कर भारत वापस लौटेंगी, तो आपको केवल कस्टम ऑफिसर को अपनी वही ज्वेलरी और वह एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट दिखाना होगा. इससे यह प्रमाणित हो जाएगा कि आप कोई नई ज्वेलरी खरीदकर नहीं ला रही हैं, बल्कि अपनी ही पुरानी ज्वेलरी वापस ला रही हैं. नमृता ने जोर देकर कहा, ‘वापस आते समय यही दिखाना होगा!’ सुचिता के मन में नियमों को लेकर जो धुंध छाई थी, वह अब पूरी तरह छंट चुकी थी. उन्होंने विश्वास के साथ कहा, ‘अब समझ आ गया!’

पूरी प्रक्रिया और कस्टम नियमों की स्पष्टता ने सुचिता के मन से डर को पूरी तरह निकाल दिया था. अब उनकी आंखों में अपनी बेटी की शादी की खुशियां और गहनों की चमक एक साथ तैर रही थी. उन्होंने अपनी सहेली नमृता का हाथ पकड़कर बड़ी कृतज्ञता के साथ कहा, ‘तुमने तो मेरी सारी टेंशन दूर कर दी!’ वाकई, एक सही सलाह ने उनकी महीनों की चिंता को मिनटों में खत्म कर दिया था. नमृता ने सुचिता के कंधे पर हाथ रखा और बड़ी आत्मीयता से हंसते हुए जवाब दिया, ‘दोस्त किस दिन काम आएंगे!’ कैफे का माहौल अब पूरी तरह खुशगवार हो चुका था.

अब सुचिता के चेहरे पर किसी भी प्रकार की शिकन नहीं थी. उनके मन में अब केवल पैकिंग की लिस्ट और शादी की रस्मों के ख्याल थे. उन्होंने बड़े उत्साह के साथ कहा, ‘अब मैं आराम से पैकिंग कर सकती हूं!’ वह अब बिना किसी झिझक के अपने मनपसंद गहनों को सूटकेस में जगह देने के लिए तैयार थीं. नमृता ने अपनी सहेली को विदा करते हुए ढेर सारा प्यार और शुभकामनाएं दीं. उन्होंने सुचिता को गले लगाया और मुस्कुराते हुए कहा, ‘हैप्पी जर्नी और हैप्पी वेडिंग!’ सुचिता अब सात समंदर पार अपनी बेटी के सपनों को सजाने के लिए पूरी तरह निश्चिंत होकर तैयार थीं.



