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Mount Abu Travel Guide: माउंट आबू के विश्व प्रसिद्ध देलवाड़ा जैन मंदिर के आसपास कई ऐसे खास पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जिन्हें पर्यटक अक्सर मिस कर देते हैं. ज्ञान गुफा, लाल मंदिर, अधर देवी मंदिर, रसिया बालम मंदिर, पांच शिवलिंग गुफा और सोमनाथ मंदिर जैसे स्थान धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं. ये सभी स्थल देलवाड़ा जैन मंदिर से वॉकिंग डिस्टेंस पर स्थित हैं.
माउंट आबू आने वाले पर्यटक देलवाड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध जैन मंदिरों के दर्शन तो जरूर करते हैं, लेकिन आज हम आपको यहाँ के आसपास मौजूद कुछ ऐसे छिपे हुए स्थानों (हिडन प्लेस) के बारे में बताएंगे, जहाँ आप पैदल घूमकर प्रकृति का आनंद ले सकते हैं. देलवाड़ा जैन मंदिर से पैदल दूरी पर स्थित होने के कारण, यहाँ तक पहुँचना आपके लिए बेहद आसान और सुविधाजनक होगा.

देलवाड़ा जैन मंदिर से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित ज्ञान गुफा के पास बना यह प्राचीन मंदिर आस्था का एक बड़ा केंद्र है. यहाँ स्थापित 21 फीट ऊँची हनुमान जी की प्रतिमा इतनी भव्य है कि वह दूर से ही नजर आने लगती है. देलवाड़ा आने वाले भक्त मंदिर दर्शन के साथ-साथ ज्ञान गुफा में हनुमान जी के आशीर्वाद लेने जरूर पहुँचते हैं.

माउंट आबू का यह अनोखा मंदिर देलवाड़ा से गुरु शिखर जाने वाले मार्ग पर स्थित है. मंदिर की दीवारों और पूरी इमारत के लाल रंग के कारण ही इसे ‘लाल मंदिर’ के नाम से जाना जाता है. इसे माउंट आबू का स्वयंभू शिव मंदिर माना जाता है, जहाँ भगवान शिव की प्रतिमा जनेऊ धारण किए हुए अत्यंत दुर्लभ स्वरूप में विराजमान है.
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माउंट आबू के देलवाड़ा से महज एक किलोमीटर की दूरी पर प्राचीन शक्तिपीठ अधर देवी मंदिर स्थित है. इस मंदिर तक पहुँचने के लिए मुख्य द्वार के बाद करीब 250 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं. यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित गुफा में बना हुआ है. मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती के अधर (होंठ) गिरे थे, जिसके कारण इसे ‘अधर देवी’ के नाम से जाना जाता है. यहाँ माता की पूजा कात्यायनी स्वरूप में की जाती है.

देलवाड़ा के रसिया बालम मंदिर से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन गुफा और यहाँ बना शिव मंदिर बेहद खास है. यह एक अद्भुत मंदिर है जहाँ एक ही गुफा में पाँच शिवलिंग एक साथ विराजमान हैं. लोक मान्यता है कि पांडवों ने इस गुफा में पाँचों शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना की थी. बारिश के मौसम में यहाँ का दृश्य अत्यंत विहंगम और मनमोहक हो जाता है.

माउंट आबू की प्रसिद्ध नक्की झील के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन इसके पीछे की एक प्रसिद्ध किंवदंती ‘रसिया बालम’ और राजकुमारी की अधूरी प्रेम कहानी से जुड़ी है. आज भी रसिया बालम और कुंवारी कन्या के देलवाड़ा स्थित 1100 वर्ष पुराने इस मंदिर में पूजा होती है. यहाँ दर्शन करने के लिए काफी संख्या में भक्त आते हैं.

माउंट आबू के देलवाड़ा से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित इस प्राचीन तालाब के किनारे आप प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के साथ-साथ सोमनाथ मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं. इस मंदिर में भगवान सोमनाथ पाँच शिवलिंगों के रूप में विराजमान हैं. मान्यता है कि ये पाँचों शिवलिंग भगवान शिव के पाँच मुखों के प्रतीक हैं, जो सृष्टि, पालन, विलय, कल्याण और नियंत्रण के कर्तव्यों को दर्शाते हैं.



