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मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक: विपक्षी सांसद 15 मिनट में बाहर निकले, फिर शामिल हुए; बागी सांसदों के मीटिंग में आने का विरोध




मानूसन सत्र से एक दिन पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी में हुई। मीटिंग में कांग्रेस, सपा, टीएमसी, DMK सहित 10 से ज्यादा विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि 15 मिनट बाद विपक्षी सांसद बाहर आ गए और बैठक का वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने TMC के बागी 20 सांसदों के गुट को बैठक में क्यों बुलाया। जबकि स्पीकर ओम बिरला ने उनके गुट को अभी तक मान्यता नहीं दी है। हालांकि वॉकआउट सांकेतिक था, विपक्षी सांसद दोबारा मीटिंग में शामिल हुए। उधर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा- संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 19 बैठकें होंगी। महुआ बोलीं- 20 बागी सांसदों को किस आधार पर न्योता मिला एक दिन पहले स्पीकर ने TMC के बागी गुट को अलग बैठने की अनुमति दी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले TMC के 20 बागी सांसदों को शनिवार को लोकसभा में अलग बैठने की मंजूरी मिल गई थी। 15 जून को तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से विलय कर लिया था। हालांकि विपक्ष का कहना है कि इस गुट को स्पीकर ने अभी मान्यता नहीं दी है। उधर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों को मंजूरी दे दी है। 22 जून को उद्धव का साथ छोड़कर 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। ये सांसद भी अब शिंदे गुट के साथ संसद में बैठेंगे। 22 जून: उद्धव के 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में 22 जून को फिर बगावत हुई थी। लोकसभा के कुल 9 में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे। लोकसभा में अब शिंदे के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। शिंदे के साथ सभी 6 सांसदों ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका ऐलान किया था। डिप्टी सीएम ने कहा, ‘जब 2022 में हमने पार्टी और धनुष-बाण बचाने के लिए विद्रोह किया था, तब 40 विधायक थे और अब हमने छक्का लगाया है।’ 8 जून: टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों का एनडीए को समर्थन देने का ऐलान 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया था। बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया था। NCPI बंगाल में रजिस्टर्ड पार्टी है। त्रिपुरा से चुनावी शुरुआत की थी। 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारे थे। चारों हार गए थे। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के बागी गुट के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। दोनों गुट NDA के साथ, मोदी सरकार का संख्या बल बढ़ा TMC और उद्धव गुट के बागी सांसदों को मंजूरी मिलने से मोदी सरकार को फायदा मिलेगा। मोदी सरकार संसद में दो तिहाई बहुमत के और करीब आ जाएगी, जो संविधान संशोधन विधेयक पास करने के लिए अहम है। सरकार महिला आरक्षण कानून लागू करने और परिसीमन विधेयक के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं की संख्या बढ़ाने वाले संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटानी की कोशिश कर रही है। अप्रैल में राज्यसभा के विशेष सत्र में सरकार की यह कोशिशें नाकाम हो गई थीं। इसके बाद से विपक्ष की चार पार्टियों के 37 लोकसभा और राज्यसभा सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं। अप्रैल के मुकाबले दोनों सदनों में सरकार का समर्थन बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है… लोकसभा: दो-तिहाई आंकड़े से 42 वोट पीछे राज्यसभा: दो-तिहाई बहुमत से 11 वोट पीछे ——————————— ये खबर भी पढ़ें… NDA का मिशन 360, अब DMK-NCP-सपा में सेंध की तैयारी:लोकसभा में दो-तिहाई का आंकड़ा पाने अब 41 सांसदों की जरूरत भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सियासी तस्वीर बदलने के लिए ‘मिशन 360’ में जुटे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बिल पर लोकसभा में झटका लगने के बाद ही भाजपा ने संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज कर दी थी। पूरी खबर पढ़ें…



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