उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर उरई के रहने वाले राकेश शेयर बाजार में निवेश करते हैं और बड़े स्टॉक्स में पैसा लगाते हैं। मिडकैप स्टॉक्स में निवेशकों की बीते एक साल में बुरी गत बनी है। म्यूचुअल फंड निवेशक भी घाव सहला रहे हैं। इस बीच बाजार में कुछ बदला। बड़े सूचकांक तो निराश कर रहे थे मगर मझोली कंपनियों यानी मिडकैप शेयरों में तेजी लौटी। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स ने अपने हालिया निचले स्तरों से करीब 17 से 18 फीसदी की शानदार रिकवरी दिखाई है। अब राकेश असमंजस में हैं, बड़े स्टॉक तो चल नहीं रहे क्या मिडैकप में जाया जाए। क्या इन स्टॉक्स के बुरे दिन खत्म हो गए हैं?
मिडकैप में स्थिरता और मजबूती लार्जकैप से ज्यादा
अगर इस साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो समझ आता है कि क्यों निवेशक लार्जकैप को छोड़कर मिडकैप की तरफ भाग रहे हैं। इस साल अब तक जहां बड़े शेयरों वाले इंडेक्स निफ्टी-50 ने नकारात्मक 10.92% का निराशाजनक रिटर्न दिया है, वहीं इसके मुकाबले निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स महज -0.17% पर टिका हुआ है। यानी गिरावट के दौर में भी मझोले शेयरों ने निवेशकों की पूंजी को बिखरने से बचाया है।
इस दौरान बाजार की हलचल को देखें तो निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स की सीमा 60,467 से 60,750 अंकों के बीच रही है, जबकि निफ्टी 50 की सीमा 26,146 से 23,390 अंकों के बीच दर्ज की गई। यह साफ दिखाता है कि बड़े शेयरों के मुकाबले मझोले शेयरों में स्थिरता और मजबूती कहीं ज्यादा रही है।
इन दो खंभों पर टिकी है तेजी
- हाल ही में आए चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों ने पूरे बाजार को चौंका दिया है। मझोली कंपनियों ने अपने कामकाज के खर्चों को नियंत्रित कर मुनाफे के मार्जिन में शानदार सुधार किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
- विदेशी संस्थागत निवेशक भले ही भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर जा रहे हों, लेकिन देश के आम खुदरा निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने बाजार को गिरने नहीं दिया। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये हर महीने आने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा मिडकैप फंड में जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस बंपर तेजी में सब कुछ असली है या फिर हवा ही है? चौथी तिमाही के परिणाम बताते हैं कि मिडकैप कंपनियों ने इस बार 29% की सालाना आय वृद्धि दर्ज की है। यह रफ्तार लार्जकैप कंपनियों की 14% की वृद्धि से दोगुनी है। करीब 60% मिडकैप कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। सिर्फ 12% कंपनियां ही ऐसी रहीं जिनके नतीजे खराब आए। पीई के पैमाने पर बाजार में कई कंपनियां ऐसी हैं, जो निवेश के लिए आकर्षक हैं। हालांकि इन्हें सोच समझ कर चुनना होगा।



