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रांची से कामाख्या देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सफर अब बेहद आसान हो सकता है. ट्रेन और फ्लाइट से पहुंचने के विकल्प मौजूद हैं. लेकिन सबसे खास बात यह है कि यदि आप मरीज हैं तो बिना लंबी लाइनों में फंसे महज 30 मिनट में दर्शन संभव हैं. इसके लिए बस एक छोटी सी बात का ध्यान रखना होगा.
रांचीः अगर आप रांची या इसके आसपास के इलाकों में रहते हैं और असम स्थित प्रसिद्ध मां कामाख्या देवी मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. यहां आपको ट्रेन से लेकर फ्लाइट तक की डिटेल मिलेगी. कामाख्या मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. आम तौर पर लोगों को 16 से 18 घंटे तक लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है. यहां तक कि वीआईपी लाइन में भी 4 घंटे से अधिक का समय लग जाता है. ऑनलाइन टिकट बुकिंग 3 महीने पहले ही फुल हो जाती है. ऐसे में शारीरिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए अलग व्यवस्था है. जिसके तहत वे महज आधे घंटे में दर्शन पा सकते हैं.
रांची से कामाख्या कैसे पहुंचे?
- ट्रेन से सफर: रांची से कामाख्या के लिए सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है. हर मंगलवार को ट्रेन संख्या 15661 (रांची-कामाख्या एक्सप्रेस) चलती है. यह एक साप्ताहिक ट्रेन है, जिसमें फर्स्ट एसी (1st AC) समेत सभी श्रेणियों की सुविधा उपलब्ध है. इस सफर के दौरान आपको रास्ते में सुंदर चाय के बागान और ब्रह्मपुत्र नदी के बेहतरीन दृश्य देखने को मिलते हैं.
- फ्लाइट से सफर: अगर आप कम समय में पहुंचना चाहते हैं, तो रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से रोजाना गुवाहाटी के लिए फ्लाइट मिलती है. कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए आप लगभग 4 घंटे 15 मिनट में गुवाहाटी पहुंच सकते हैं. इसका सामान्य किराया ₹7,000 से ₹8,000 के बीच रहता है. यदि 2 महीने पहले बुकिंग कराई जाए, तो किराया ₹5,000 से ₹6,000 तक हो सकता है.
बता दें कि गुवाहाटी एयरपोर्ट पर उतरने के बाद कामाख्या मंदिर की दूरी महज 18 से 20 किलोमीटर है, जहां से टैक्सियों या लोकल ट्रांसपोर्ट के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है.
मरीजों को महज 30 मिनट में दर्शन
कामाख्या मंदिर से जुडे सुदीप बताते हैं कि हर दिन लगभग 12,000 लोग मंदिर आते हैं. जिनमें से मुख्य गुफा के अंदर केवल 5,000 लोग ही दर्शन कर पाते हैं. लेकिन यदि कोई शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट नहीं हैं, हाथ-पैर या शरीर में कोई परेशानी है तो ऐसे लोगों के लिए अलग व्यवस्था भी है.
- मेडिकल पर्ची जरूर साथ ले जाएं: अपने डॉक्टर से बीमारी या शारीरिक समस्या से संबंधित असली और सही मेडिकल पर्ची बनवाकर साथ ले जाना न भूलें.
- मेडिकल पास केंद्र: मंदिर परिसर में बने मेडिकल सेंटर पर डॉक्टर आपकी जांच करेंगे. आपकी पर्ची देखने और जांच के बाद आपको एक ‘स्पेशल पास’ जारी किया जाएगा.
- आधे घंटे में दर्शन: इस स्पेशल पास के जरिए श्रद्धालुओं को स्पेशल गेट से प्रवेश दिया जाता हैइ. ससे आप 18 घंटे की लाइन से बचकर सीधे मुख्य गुफा तक केवल 30 मिनट में पहुंच सकते हैं.
अधिकतर लोग यह गलती करते हैं कि शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद डॉक्टर का पर्चा नहीं ले जाते. बिना पर्चे के स्पेशल पास नहीं बनता है. दर्शन के बाद आप पास ही बह रही ब्रह्मपुत्र नदी के शांत और खूबसूरत दृश्यों का आनंद भी ले सकते हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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