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राजस्थान के सरिस्का में दिखा सफेद मोर: सोने की तरह चमकता ‘गोल्डन सांभर’; प्रदेश में पहली बार देखे गए – Alwar News


अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में ‘सफेद मोर’ और धूप में सोने की तरह चमकता ‘गोल्डन सांभर’ दिखे हैं।

राजस्थान में बाघ-बाघिन का घर इन दिनों नए और अनोखे मेहमानों से गुलजार है। अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार दो बेहद दुर्लभ जीव देखे गए हैं। इनमें से एक ‘सफेद रंग का मोर’ है, तो दूसरा धूप में सोने की तरह चमकता ‘गोल्डन सांभर’। इससे पहल

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दिलचस्प बात यह है कि कभी (18 साल पहले) पूरी तरह ‘टाइगर विहीन’ हो चुके सरिस्का में बाघों का कुनबा भी बढ़कर अब 56 हो गया है। इस अभूतपूर्व सफलता और तेजी से बढ़ती संख्या पर रिसर्च करने के लिए देश भर के वन विभाग के अधिकारी पिछले कुछ दिनों से अलवर में डेरा डाले हुए हैं।

नए मेहमानों को PHOTOS में देखिए….

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर जोन में इन दिनों सफेद मोर दिख रहा है। इस जोन में ही एसटी-19 (बाघिन) भी है।

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में गोल्डन सांभर भी दिखा है। धूप में यह सोने की तरह चमकता हुआ दिखता है।

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में गोल्डन सांभर भी दिखा है। धूप में यह सोने की तरह चमकता हुआ दिखता है।

टाइग्रेस ST-19 के बफर जोन में दिखा ‘सफेद मोर’

यह दूधिया सफेद रंग का मोर सरिस्का के बफर जोन (बाला किला और गंगोडी इलाके के आस-पास) में जून के पहले सप्ताह में देखा गया है। सबसे पहले जंगल में ट्रैकिंग करने वाले वनकर्मियों ने इसे देखा था, लेकिन तब फोटो नहीं ली जा सकी। बाद में ओडिशा के एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ने इसकी खूबसूरत तस्वीरें कैमरे में कैद कीं। अब पर्यटकों को इस जोन में बाघिन ST-19 और अन्य 12 बाघों के साथ इस दुर्लभ मोर के भी दीदार होंगे।

धूप में चमकता ‘गोल्डन सांभर’

दूसरा अनोखा मेहमान है ‘गोल्डन सांभर’। वाइल्डलाइफ एक्सपट्‌र्स के मुताबिक, इसे सामने से देखने पर धूप में इसका शरीर बिल्कुल सोने की तरह चमकता हुआ दिखाई देता है।

टाइगर एक्सपर्ट निरंजन सिंह कहते हैं- सफेद मोर और गोल्डन सांभर का दिखना बेहद खास है। इनके रंग में यह दुर्लभ बदलाव पिगमेंटेशन या हार्मोन्स में गड़बड़ी (जीनेटिक म्यूटेशन) के कारण हो सकता है।

अब बाघों की बात… पहले ये PHOTOS देखिए…

सरिस्का बाघ परियोजना में एसटी-19 (बाघिन) के शावक पानी में अठखेलियां करते हुए देखे गए थे। (फाइल फोटो)

सरिस्का बाघ परियोजना में एसटी-19 (बाघिन) के शावक पानी में अठखेलियां करते हुए देखे गए थे। (फाइल फोटो)

सरिस्का के जंगल में बाघिन एसटी-30 अपने तीन शावकों के साथ। (फाइल फोटो)

सरिस्का के जंगल में बाघिन एसटी-30 अपने तीन शावकों के साथ। (फाइल फोटो)

सरिस्का ने रणथंभौर को पछाड़ा

सरिस्का के जंगल ने ‘कम समय में ज्यादा शावकों’ को जन्म देने का एक अनोखा नेशनल रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले 3 साल के भीतर यहां 4 अलग-अलग बाघिनों ने एक बार में 4-4 शावकों को जन्म दिया है। करीब 90 बाघों वाले सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में भी ऐसा रिकॉर्ड नहीं है।

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट हिमांशु शर्मा ने बताया कि सरिस्का की 0 से 56 बाघों तक की यात्रा रोमांचकारी रही है। पिछले 2 साल में ही यहां 25 शावकों का जन्म हुआ है।

बेहतरीन हैबिटेट का असर, जल्द ही गूंजेगी 100 टाइगर की दहाड़

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट निरंजन सिंह कहते हैं- सरिस्का का जंगल सबसे अलग और विशेष है। यहां का घना जंगल और बेहतरीन हैबिटेट (प्राकृतिक आवास) ही मुख्य वजह है, जिससे बाघिनें एक बार में 4-4 शावक देकर नया इतिहास रच रही हैं। अब सोने सा चमकता सांभर और सफेद मोर देखना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

60 के पार जाएगी संख्या

वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2026 के भीतर ही सरिस्का में बाघों का आंकड़ा 60 के पार निकल जाएगा। जिस तेजी से कुनबा बढ़ रहा है, आने वाले कुछ ही सालों में सरिस्का के घने जंगलों में 100 से ज्यादा टाइगर दहाड़ते नजर आएंगे।

सरिस्का में 3 साल में एक साथ चार-चार शावकों ने जन्म लिया

  • बाघिन ST-19 : जून 2025 में सरिस्का के बफर जोन में एक साथ चार शावकों को जन्म दिया था।
  • बाघिन ST-17 : मार्च 2026 में चार शावकों को जन्म दिया था। पहले तीन, फिर चौथा शावक दिखा था।
  • बाघिन ST-12 : साल 2024 में चार शावकों को जन्म दिया।
  • बाघिन ST-22: साल 2024 में चार शावकों ने जन्म लिया।

रणथम्भौर में 6 साल में 3 बाघिनों ने 4-4 शावक को जन्म दिया

  • बाघिन T-102 : नवंबर 2020 में एक साथ 4 शावकों को जन्म दिया।
  • बाघिन T-111 (शक्ति) : जून 2021 में कुंडेरा रेंज के लक्कड़दा क्षेत्र में 4 शावकों को जन्म दिया।
  • बाघिन T-122 ने फरवरी 2025 में चार शावकों को जन्म दिया था।

पढ़िए- क्या बोले एक्सपट्‌र्स…

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