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राफ्टिंग के ‘Grades’ क्या होते हैं? Level-1 से 6 तक बढ़ता जाता है खतरा


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Rishikesh News: अगर आप राफ्टिंग पर जाने की सोच रहे हैं या कभी इसका प्लान बनाया है, तो ‘ग्रेड’ शब्द जरूर सुना होगा. ये छोटे-छोटे नंबर ही तय करते हैं कि आपका एक्सपीरियंस मजेदार होगा या चुनौती भरा. आइए जानते हैं कि राफ्टिंग में किन-किन टारगेट से होकर गुजरना पड़ता है.

ऋषिकेश: रिवर राफ्टिंग सिर्फ एक एडवेंचर एक्टिविटी नहीं, बल्कि पानी की ताकत और इंसान के साहस का असली टेस्ट है. आपने अक्सर सुना होगा कि राफ्टिंग में ‘ग्रेड’ होते हैं, लेकिन ये ग्रेड असल में क्या बताते हैं. दरअसल इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुसार, नदियों को ग्रेड 1 से लेकर ग्रेड 6 तक बांटा जाता है. ये ग्रेड पानी के बहाव, लहरों की ऊंचाई, रैपिड्स की जटिलता और रिस्क फैक्टर को दर्शाते हैं. जैसे-जैसे ग्रेड बढ़ता है, वैसे-वैसे चुनौती और खतरा भी बढ़ता जाता है. इसलिए राफ्टिंग पर जाने से पहले इन ग्रेड्स को समझना बेहद जरूरी होता है, ताकि आप अपने अनुभव और फिटनेस के हिसाब से सही चुनाव कर सकें.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान धर्मेंद्र सिंह नेगी गंगा नदी राफ्टिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि अगर आप राफ्टिंग पर जाने की सोच रहे हैं या कभी इसका प्लान बनाया है, तो ‘ग्रेड’ शब्द जरूर सुना होगा. ये छोटे-छोटे नंबर ही तय करते हैं कि आपका एक्सपीरियंस मजेदार होगा या चुनौती भरा. बात करें तो ग्रेड 1 सबसे आसान और सुरक्षित स्तर होता है. इसमें पानी शांत रहता है, लहरें बहुत हल्की होती हैं और किसी खास तकनीकी स्किल की जरूरत नहीं पड़ती है. पहली बार राफ्टिंग करने वाले बच्चे और बुजुर्ग भी इसमें आसानी से हिस्सा ले सकते हैं.

बेसिक पैडलिंग जरूरी
इसके बाद आता है ग्रेड-2, जहां पानी का बहाव थोड़ा तेज होता है और छोटे-छोटे रैपिड्स देखने को मिलते हैं. यहां राफ्ट को कंट्रोल करने के लिए बेसिक पैडलिंग जरूरी हो जाती है. यह लेवल उन लोगों के लिए सही है, जो हल्का एडवेंचर चाहते हैं लेकिन ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते. ग्रेड-3 को असली ‘व्हाइट वॉटर राफ्टिंग’ की शुरुआत माना जाता है. इसमें मीडियम से बड़े रैपिड्स, तेज बहाव और ऊंची लहरें होती हैं. यहां टीमवर्क, सही टाइमिंग और गाइड के निर्देशों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है. कई लोकप्रिय राफ्टिंग रूट्स में इसी ग्रेड के रैपिड्स देखने को मिलते हैं, जो एडवेंचर और सेफ्टी का अच्छा बैलेंस देते हैं.

ग्रेड-4 और ग्रेड-5 में ऐसे रास्ते
ग्रेड-4 को एडवांस लेवल माना जाता है. इसमें पानी का बहाव बहुत तेज होता है, रैपिड्स जटिल होते हैं और रास्ते में चट्टानें या अचानक मोड़ जैसी बाधाएं आती हैं. यहां सिर्फ फिटनेस ही नहीं, बल्कि अच्छा अनुभव और मजबूत कोऑर्डिनेशन भी जरूरी होता है. राफ्ट के पलटने की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए यह लेवल सिर्फ अनुभवी राफ्टर्स के लिए ही उपयुक्त होता है. इसके बाद आता है ग्रेड-5, जिसे एक्सट्रीम और हाई रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है. इसमें लगातार शक्तिशाली रैपिड्स, अनिश्चित बहाव, बड़े ड्रॉप्स और बेहद जटिल रास्ते होते हैं. यहां हर मूवमेंट सोच-समझकर करना पड़ता है, क्योंकि रेस्क्यू ऑपरेशन भी मुश्किल हो सकता है. यह लेवल आमतौर पर प्रोफेशनल और बहुत अनुभवी राफ्टर्स के लिए ही होता है और इसे बिना सही ट्रेनिंग के करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

ग्रेड-6 कमर्शियल राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल
सबसे आखिर में आता है ग्रेड-6, जिसे ‘एक्सप्लोरेटरी’ या ‘अनरनेबल’ कैटेगरी कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि इस लेवल के रैपिड्स इतने कठिन और अनिश्चित होते हैं कि इन्हें आमतौर पर कमर्शियल राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसमें बड़े झरने जैसे ड्रॉप्स, बेहद तेज बहाव और ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं, जहां सुरक्षित तरीके से पार करना लगभग असंभव हो. बहुत कम एक्सपर्ट टीमें ही रिसर्च या एडवेंचर एक्सपेडिशन के तहत इसे ट्राय करती हैं, वो भी पूरी तैयारी और रिस्क एनालिसिस के साथ.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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