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राहुल गांधी ने लिखा-सत्य और सत्याग्रह से डरती है सरकार: केन-बेतवा प्रभावितों को न मुआवजा मिला, न पुनर्वास; X पर आंदोलन की तस्वीरें शेयर कीं – Bhopal News




लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में आदिवासियों की जमीन तो ले ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास। राहुल ने सोमवार को ‘X’ पर प्रभावित किसानों और आदिवासियों के आंदोलन का वीडियो साझा किया। इसके साथ लिखा- मोदी सरकार सत्य और सत्याग्रह, दोनों से डरती है। शांतिपूर्ण आंदोलन पुलिस बल से कुचला जा रहा है। सत्य यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं। जल, जंगल और जमीन पर सबसे पहला अधिकार उन्हीं का है और उनका सत्याग्रह इसी अधिकार की रक्षा के लिए है। लिखा- न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा राहुल गांधी ने लिखा- कांग्रेस प्रभावित आदिवासी भाई-बहनों और किसानों के साथ खड़ी है। उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। सरकार को प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास देना ही पड़ेगा। राहुल गांधी ने जो वीडियो पोस्ट किया, उसमें केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के प्रभावित आंदोलन करते नजर आ रहे हैं। बैकग्राउंड में एक कविता के स्वर गूंज रहे हैं। यह कविता शिक्षा पारीक की है। पढ़िए कविता… कोई आओ और हमें भी दिल्ली लेकर जाओ
जंतर-मंतर से सुना है आवाज सुनाई पड़ती है
हमारे भी बच्चे हैं साहब
क्या हुआ हमारे घर कच्चे हैं साहब
देश को बताओ कि वे क्या कर रहे हैं
रोटी छीनकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं
ये तो दिल निचोड़कर प्यास बुझाना हुआ न
हमारी छत छीनकर बांध बना रहे हैं
मन की बात हुक्मरान ही कर सकते हैं क्या
बातों से पेट भर सकते हैं क्या
वे आए और घर तोड़ने की बात करने लगे
ऐसे किसी के घर तोड़ सकते हैं क्या
संविधान कौन है साहब
सुना है ये सबसे ऊंचा है
सब इसके नीचे आते हैं
ये कहां मिलेगा
इससे बात हो सकती है तो करा दीजिए
हमारे घर बचा लीजिए
संसद क्या होती है साहब
सुना है वहां मंत्री देश की समस्याओं पर बात करते हैं
हमारी बात क्यों नहीं करते…
हम कौन से देश में आते हैं साहब? विस्थापित हो रहे छतरपुर के 24 गांव केन-बेतवा लिंक परियोजना से छतरपुर के 24 गांवों का विस्थापन होना है। आठ गांव डूब क्षेत्र में हैं। 16 गांव पन्ना टाइगर रिजर्व में शामिल किए जाएंगे। डूब क्षेत्र वाले गांवों में ज्यादा विरोध है। ग्रामीण विकसित ग्राम में भूखंड और 5 लाख रुपए मुआवजा मांग रहे हैं, जबकि प्रशासन 12.50 लाख रुपए दे रहा है। स्थानीय ग्रामीण इसके विरोध में पानी के अंदर चिता आंदोलन कर रहे थे। कूपी गांव के बराना नदी घाट से आंदोलनकारियों को 20 जुलाई की सुबह प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हटा दिया था। प्रशासन का कहना था कि लगातार बारिश और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए कार्रवाई की गई। प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद ग्रामीणों ने अब चूल्हाबंदी आंदोलन शुरू कर दिया है। ये खबर भी पढ़ें… सरकार से लड़ने वाले 2 चेहरे; भूख-धूप और दबाव…लेकिन नहीं डिगे केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के लिए दौधन बांध बनाए जाने के खिलाफ जल सत्याग्रह 10 दिन के लिए टल गया है, लेकिन आंदोलन के दो प्रमुख चेहरे अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार सुर्खियों में हैं। अमित रिटायर्ड प्रिंसिपल के बेटे हैं। दिव्या साधारण दलित परिवार से आती हैं। दोनों घर-परिवार छोड़कर रात-दिन विस्थापितों के साथ रहे। खुले आसमान के नीचे सोए। पढ़ें पूरी खबर…



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