Homeटेक्नोलॉजीलिंग निर्धारण अपराध में पुलिस FIR नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट...

लिंग निर्धारण अपराध में पुलिस FIR नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट बोला-अस्पताल पर छापा मारने का अधिकार भी नहीं, अब स्पेशल टीम करेगी कार्रवाई


  • Hindi News
  • National
  • Supreme Court Ruling: Police Cannot File FIR In PCPNDT Cases | India News

नई दिल्ली23 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अब पुलिस भ्रूण का लिंग पता लगाने वाले मामलों पर FIR नहीं कर सकती। PCPNDT कानून के तहत अब एक स्पेशल टीम इन मामलों पर कार्रवाई करेगी। अब पुलिस अल्ट्रासाउंड सेंटर या अस्पताल पर छापा नहीं मार सकती।

यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांचकर्ता नहीं है और जहां तक संभव हो, पुलिस की मदद लेने से बचना चाहिए।

जांच भी नहीं कर सकती पुलिस

बेंच ने कहा कि प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट, 1994 से जुड़े मामलों में मेडिकल जानकारी और संवेदनशीलता की जरूरत हो सकती है।

  • कोर्ट ने कहा कि PCPNDT कानून के तहत होने वाले अपराधों के लिए पुलिस मुख्य जांच अधिकारी नहीं है।
  • पुलिस सीधे तौर पर न तो FIR कर सकती है और न ही डॉक्टरों या अस्पतालों के खिलाफ एक्शन ले सकती है।
  • पुलिस सिर्फ तभी कार्रवाई कर सकती है, जब उपयुक्त प्राधिकारी उनसे मदद मांगे।
  • बेंच ने कहा की यह कानून चिकित्सा ज्ञान से जुड़ा है, इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस की सहायता लेने से बचा जाना चाहिए।
e14c194a f781 4fbd aa1e 6c563c6e4ddc 1787212718572

AA को शिकायत और जांच का अधिकार

PCPNDT एक्ट की धारा 17(4) के तहत AA के काम में इस कानून के अपराधों की शिकायत दर्ज करना और उनकी जांच करना शामिल है।

  • किसी भी अस्पताल या क्लिनिक में जाकर औचक निरीक्षण करना, छापा मारना और रिकॉर्ड खंगालने का काम AA करेगी।
  • अगर कोई डॉक्टर गलत काम करते पाया जाता है, तो अल्ट्रासाउंड मशीन, कंप्यूटर या अन्य मेडिकल रिकॉर्ड को AA जब्त कर सकती है.
  • दोषी पाए जाने वाले सेंटर का रजिस्ट्रेशन और डॉक्टर का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
  • आरोपी डॉक्टर या अस्पताल के खिलाफ केस रजिस्टर करने के लिए AA सीधे कोर्ट (मजिस्ट्रेट) के पास जाएगी, न कि पुलिस स्टेशन।

PCPNDT एक्ट क्या है?

PCPNDT कानून का उदेश्य लिंग जांचने पर पूरी तरह रोक लगाना है। यह कानून देश में लगातार कम हो रही लड़कियों की संख्या और भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लाया गया था।

इसके तहत देश के हर क्लिनिक और लैब का सरकारी रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है जहां अल्ट्रासाउंड या जेनेटिक जांच की मशीनें होती हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के ऐसी मशीन रखना भी अपराध है।

dainik bhaskar pointer 1787214683844

—–

ये खबर भी पढ़ें:

चरखी दादरी में भ्रूण लिंग जांच करने वाले एक्सपोज:BAMS लेडी डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार; सोनीपत हेल्थ विभाग ने मारी थी रेड

सोनीपत।

मौके पर पकड़े गए BAMS डॉक्टर समेत 3 आरोपी और कार्रवाई के दौरान सोनीपत हेल्थ विभाग की टीम

मौके पर पकड़े गए BAMS डॉक्टर समेत 3 आरोपी और कार्रवाई के दौरान सोनीपत हेल्थ विभाग की टीम

सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिविल सर्जन डॉ. अनुराधा जैन के नेतृत्व में अंतर-जिला कार्रवाई करते हुए चरखी दादरी में कथित भ्रूण लिंग जांच के मामले का खुलासा किया है। पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत की गई इस कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन आरोपियों को पकड़ा। जिनमें BAMS डॉक्टर विभूति, रविंद्र एक्स-रे टेक्नीशियन और प्रियादीप रिसेप्शनिस्ट शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments