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लॉरेंस बिश्नोई (पार्ट-1): यूनिवर्सिटी पॉलिटिक्‍स या गन के ग्‍लैमर? गांव का साधारण लड़का कैसे बन गया खतरनाक गैंगस्‍टर


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लॉरेंस बिश्नोई: पॉलिटिक्‍स या ग्‍लैमर? गांव के लड़का कैसे बना खतरनाक गैंगस्‍टर

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गैंग्‍स ऑफ दिल्‍ली: लॉरेंस बिश्नोई का नाम आज भारत के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में गिना जाता है. लेकिन क्या वह बचपन से अपराधी था? पंजाब के एक संपन्न किसान परिवार में जन्मे लॉरेंस की जिंदगी छात्र राजनीति के दौरान कैसे बदली और उसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में कैसे पहुंचा? गैंग्‍स ऑफ दिल्‍ली में आज जानिए उसके बचपन, परिवार, पढ़ाई, पंजाब यूनिवर्सिटी, छात्र राजनीति, शुरुआती मामलों, गोल्डी बराड़ से पहचान और कथित गैंग नेटवर्क बनने की पूरी कहानी.

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पंजाब के किसान परिवार से निकला लॉरेंस बिश्नोई आज देश के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में गिना जाता है. (एआई इमेज)

गैंग्‍स ऑफ दिल्‍ली: लॉरेंस बिश्नोई का नाम बीते कुछ सालों से देश के सबसे चर्चित गैंगस्‍टर में शामिल हो गया है. कभी पंजाब से दिल्‍ली के बीच सीमित रहने वाले इस गैंगस्‍टर के अपराधों का दायरा हरियाणा, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश और महाराष्‍ट्र तक बढ़ चुका है. बीते कुछ समय में इस गैंगस्‍टर ने कनाडा में भी अपने नेटवर्क को तेजी से फैलाया है. जेल के भीतर रहते हुए इसने भारत के कई ऐसे चर्चित नामों को धमकी दी है, जो विदेश में अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर पंजाब के संपन्‍न किसान परिवार का यह लड़का अपराध की दुनिया तक कैसे पहुंच गया? क्या वह बचपन से ही अपराधी था या हालात और गलत संगत ने उसकी जिंदगी बदल दी? आइए आज आपको बताते हैं पंजाब के दुत्तरांवाली गांव के साधारण से लड़के की इंटरनेशनल गैगेस्‍टर बनने की पूरी कहानी.

गांव के साधारण से लड़के की इंटरनेशनल गैगेस्‍टर बनने की कहानी

  1. पंजाब के गांव से शुरू हुई कहानी: लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 12 फरवरी 1993 को पंजाब के फाजिल्का जिले के दुत्तरांवाली गांव में हुआ था. उसका परिवार आर्थिक रूप से काफी मजबूत माना जाता था. उसके पिता हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल रह चुके थे. बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और खेती करने लगे. परिवार के पास अच्छी-खासी कृषि भूमि थी और गांव में उनका बड़ा नाम था. बचपन में लॉरेंस की जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी. परिवार चाहता था कि बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अधिकारी बने या कोई अच्छा व्यवसाय करे. गांव के लोगों के मुताबिक वह शुरू में पढ़ाई और खेल दोनों में रुचि रखता था. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि आने वाले वर्षों में उसका नाम देशभर की पुलिस और जांच एजेंसियों की फाइलों में दर्ज होगा.
  2. पढ़ाई के लिए पहुंचा चंडीगढ़: स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद लॉरेंस उच्च शिक्षा के लिए चंडीगढ़ चला गया. उसने डीएवी कॉलेज में दाखिला लिया और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी की राजनीति से जुड़ गया. उस समय चंडीगढ़ की छात्र राजनीति काफी सक्रिय मानी जाती थी. यहां छात्र संगठन चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगाते थे और कई बार नौबत मारपीट वाली भी हो जाती थी. यहीं से लॉरेंस की जिंदगी ने नया मोड़ लिया. शुरुआत में वह सिर्फ छात्र राजनीति में सक्रिय था. कॉलेज कैंपस में अपनी पहचान बनाने और चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहा था. लेकिन धीरे-धीरे छात्र राजनीति का माहौल उसके लिए सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं रहा.
  3. छात्र राजनीति बनी टर्निंग पॉइंट: पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति लंबे समय से काफी आक्रामक मानी जाती रही है. चुनाव के दौरान अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच टकराव, झगड़े और हिंसा की घटनाएं लगभग आम हो चुकी थीं. यूनिवर्सिटी में अपना दबदबा बनाने के लिए उसने गलत रास्‍ते अख्तियार करना शुरू कर दिया. यही गलत रास्‍ता लॉरेंस को अपराध की दुनिया तक ले गया. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इसी दौर में लॉरेंस के खिलाफ पहली बार मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज हुई थी. इसके बाद, लॉरेंस ने अपराध की दुनिया में ऐसा तहलका मचाया कि उसके खिलाफ अपराधिक मामलों में एक के बाद एक एफआईआर दर्ज होती चली गईं.
  4. लॉरेंस को मिला गोल्डी बराड़ का साथ: कॉलेज के दिनों में ही लॉरेंस की पहचान सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ से हुई. कुछ ही समय में दोनों के बीच गहरी दोस्‍ती हो गई. जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ सालों के बाद गोल्डी बराड़ विदेश चला गया, लेकिन वह वहीं से अपना गैंग ऑपरेट करता रहा. पुलिस का कहना है कि गोल्‍डी बरार के कहने पर लॉरेंस ने पंजाब में अपना नेटवर्क और गैंग दोनों बढ़ाना शुरू किया. शुरूआती दौर में उसने गोल्‍डी बरार के इशारे पर पंजाब और उससे सटे हुए सूबों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देना शुरू किया. कुछ ही समय में लॉरेंस के अपराधों की फेहरिस्‍त पुलिस और सिक्‍योरिटी एजेंसी तक पहुंच गई. इसके बाद पुलिस ने उसे अरेस्‍ट कर सलाखों के पीछे भेज दिया.
  1. जेल बनी लॉरेंस के गैंग की रिक्‍यूटमेंट सेल: आमतौर पर माना जाता है कि किसी अपराधी को सुधारने के लिए उसे जेल भेजा जाता है. लेकिन लॉरेंस के साथ ऐसा नहीं हुआ. लॉरेंस ने जेल को ही अपनी गैंग का रिक्‍यूटमेंट सेंटर बना दिया. उस समय जेल में बंद हर कुख्‍यात अपराधी से लॉरेंस ने दोस्‍ती की और उसे अपने गैंग में शामिल करना शुरू कर दिया. जेल में ही यह तय होना शुरू हो गया कि गैंग में किस अपराधी की भूमिका क्‍या होगी और जेल से बाहर आने के बाद उसे किस अपराध को अंजाम देना है. इस तरह, जब लॉरेंस जेल से बाहर निकला तो वह सुधरने की जगह एक खतरनाक गैंगस्‍टर बन चुका था. जल्‍द ही उसके आपराधिक कारनामों का असर जमीन पर भी दिखने लगा था.
  2. कैसे बढ़ता गया लॉरेंस का नेटवर्क: जेल से बाहर निकलने के बाद लॉरेंस के गैंग के गुर्गों ने हर तरह के अपराधों को अंजाम देना शुरू कर दिया. वहीं लॉरेंस खुद अलग-अलग राज्यों के नौजवानों को गन का ग्‍लैमर दिखाकर अपने साथ लाना शुरू कर दिया. इनमें कुछ लोग पहले से अपराध की दुनिया में थे, जबकि कुछ बाद में गैंग का हिस्सा बने. धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक उसके नेटवर्क तेजी से फैलने लगा. पुलिस का दावा है कि उसने बड़े गैंग की बजाय छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाए. हर मॉड्यूल अलग इलाके में काम करता था. यही वजह रही कि किसी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से पूरा नेटवर्क खत्म नहीं होता था.
  3. सोशल मीडिया ने भी बढ़ाई पहचान: करीब एक दशक पहले तक गैंगस्टर आमतौर पर पुलिस रिकॉर्ड तक ही सीमित रहते थे. लेकिन सोशल मीडिया के दौर में तस्वीर बदल गई. जांच एजेंसियों के अनुसार, कई गैंगों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी पहचान बनाने और दबदबा दिखाने के लिए किया. लॉरेंस बिश्नोई का नाम भी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनने लगा. कई फर्जी और अनौपचारिक अकाउंट उसके नाम से बनाए गए. पुलिस समय-समय पर ऐसे खातों पर कार्रवाई करती रही. लेकिन, सोशल मीडिया में प्रचार का लॉरेंस का फायदा यह मिला कि तमाम राज्‍यों के छोटे मोटे गिरोह और अपराधी उससे जुड़ना शुरू हो गए.

पुलिस की नजर में कैसे आया लॉरेंस?
अगल-अलग राज्‍यों में हुए आपराधिक वारदातों की जांच में पुलिस को एक बात कॉ‍मन मिली. हर वारदात की कड़ी कहीं ना कहीं लॉरेंस बिश्नोई पर जाकर खत्‍म हो रही थी. दिल्‍ली और पंजाब से शुरू हुआ यह पैटर्न हरियाणा, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्‍ट्र में भी देखने को मिला. इसके बाद, अलग-अलग राज्‍यों में लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ एक-एक कर कई आपराधिक मामले दर्ज होना शुरू हो गए. वहीं, कनाडा सहित कुछ अन्‍य देशों में हुई वारदातों में नाम सामने आने के बाद लॉरेंस बिश्नोई का नाम सेंट्रल इंवेस्टिगेटिंग एजेंसी की फाइलों में भी दर्ज हो गया.

यह नेटवर्क आखिर कैसे काम करता था? गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और अनमोल बिश्नोई जैसे नाम इसमें कैसे जुड़े? गैंग का ऑपरेटिंग मॉडल क्या था और जेल में रहते हुए भी इसका प्रभाव कैसे बना रहा? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए इंतजार कीजिए भाग दो का.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…

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